Kanker School Repair Scam: करोड़ों का स्कूल मरम्मत घोटाला: महज 30% काम पर ठेकेदार को थमाया 6.63 करोड़ का पूरा भुगतान, ACB ने कसी नकेल

Kanker School Repair Scam: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल विकासखंड में सरकारी स्कूलों की मरम्मत के नाम पर एक बहुत बड़ा वित्तीय घपला सामने आया है। जर्जर स्कूल भवनों को सुधारने के लिए आई करोड़ों रुपये की सरकारी राशि में भारी बंदरबांट का आरोप लगा है। धरातल पर स्वीकृत कार्यों का करीब तीस फीसदी हिस्सा ही पूरा हो सका, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार को कागजों पर काम शत-प्रतिशत दिखाकर पूरा का पूरा भुगतान कर दिया गया। इस गंभीर गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद अब एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जगदलपुर की टीम ने मामले को अपने हाथ में ले लिया है और जांच की रफ्तार तेज कर दी है।

तीन सालों तक चलता रहा भ्रष्टाचार का खेल, 163 जर्जर स्कूलों के सुधार का बजट डकार गए अफसर और ठेकेदार

यह पूरा मामला वर्ष 2022 से लेकर 2025 के बीच का है, जब दुर्गुकोंदल विकासखंड के विभिन्न सरकारी स्कूलों के कायाकल्प की योजना बनाई गई थी। शासन ने मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना, समग्र शिक्षा योजना और विशेष केंद्रीय मद के अंतर्गत क्षेत्र के प्राथमिक, माध्यमिक और हाईस्कूलों के कुल 163 जर्जर भवनों की मरम्मत को मंजूरी दी थी। इसके लिए सरकार की ओर से 6 करोड़ 63 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था। आरोप है कि इस अवधि के दौरान विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ ने मिलकर पूरी राशि का गबन कर दिया और नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ किया।

केवल तीस फीसदी काम कर निकाल ली पूरी रकम, शासन को लगी करोड़ों की चपत

प्रशासनिक स्तर पर की गई शिकायत में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि ग्राउंड जीरो पर ठेकेदारों ने बमुश्किल 30 प्रतिशत काम ही निपटाया था। कई स्कूलों में तो सिर्फ पुताई और मामूली मरम्मत करके ही काम को पूरा दिखा दिया गया। इसके बावजूद लोकधन का दुरुपयोग करते हुए संबंधित ठेकेदारों के खातों में पूरी स्वीकृत राशि ट्रांसफर कर दी गई। इस फर्जीवाड़े के जरिए न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की सीधी आर्थिक क्षति पहुंचाई गई, बल्कि घटिया निर्माण कार्य के चलते बच्चों की सुरक्षा को भी दांव पर लगा दिया गया।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने जिला शिक्षा अधिकारी से तलब की रिपोर्ट, फाइलों को खंगालने में जुटी पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीबी जगदलपुर कार्यालय ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। एसीबी के निरीक्षक मोहम्मद फिरोज खान की ओर से 1 जून 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) उत्तर बस्तर कांकेर को एक आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र के माध्यम से शिक्षा विभाग से अब तक हुई पूरी कार्रवाई की विस्तृत जांच रिपोर्ट और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़े तमाम दस्तावेज मांगे गए हैं। एसीबी ने साफ कहा है कि यदि इस मामले में पूर्व में शिक्षा विभाग की ओर से कोई आंतरिक या विभागीय जांच की गई है, तो उसके तथ्य भी तुरंत जांच टीम को सौंपे जाएं।

प्रमाणित प्रतियों को प्राथमिकता के आधार पर जमा करने के निर्देश, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की कवायद

भ्रष्टाचार के इस मामले में सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, इसके लिए जांच एजेंसी बेहद सतर्कता बरत रही है। एसीबी ने जिला शिक्षा अधिकारी को कड़े निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत कार्यों के टेंडर, तकनीकी स्वीकृति, कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र और भुगतान से संबंधित सभी महत्वपूर्ण फाइलों की प्रमाणित प्रतियां प्राथमिकता के आधार पर तत्काल ब्यूरो कार्यालय में जमा कराई जाएं। इन दस्तावेजों के बारीक अध्ययन के बाद उन तकनीकी इंजीनियरों और आहरण-संवितरण अधिकारियों की सूची तैयार की जाएगी जिन्होंने बिना वेरिफिकेशन के भुगतान की फाइलों को आगे बढ़ाया था।

डीईओ रमेश निषाद ने साधी चुप्पी, कहा नियमानुसार चल रही है स्वतंत्र जांच

करोड़ों रुपये के इस बहुचर्चित स्कूल मरम्मत घोटाले को लेकर जब कांकेर के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इस संवेदनशील विषय पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। डीईओ ने संक्षिप्त टिप्पणी करते हुए केवल इतना कहा कि चूंकि पूरा मामला अब एंटी करप्शन ब्यूरो के पास है और उनके स्तर पर नियमानुसार इसकी वैधानिक जांच की जा रही है, इसलिए विभागीय तौर पर इस समय किसी भी प्रकार का बयान देना उचित नहीं होगा। उनके इस रुख से साफ है कि विभाग के भीतर भी इस घोटाले को लेकर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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