
Kulgam Terror Attack: दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए कायराना आतंकी हमले में जान गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के दो श्रमिकों के पीड़ित परिवारों की मदद के लिए सरकारें आगे आई हैं। राज्य सरकार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और स्थानीय जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 36-36 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इस नृशंस घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा ने गहरा शोक व्यक्त किया है और हमले की सख्त शब्दों में निंदा की है।
36-36 लाख रुपये की सहायता राशि का पूरा गणित
आतंकी हमले में मारे गए दोनों मजदूरों के आश्रितों को मिलने वाली 36-36 लाख रुपये की राशि में अलग-अलग स्तर पर सहायता शामिल है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने कोटे से 20-20 लाख रुपये देने की घोषणा की है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को तात्कालिक राहत के तौर पर संबंधित जिला प्रशासन के माध्यम से 6-6 लाख रुपये की मदद दी गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया शोक, घटना की कड़ी निंदा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सक्ती जिले के रहने वाले दीपक रात्रे (24 वर्ष) और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भूपेंद्र भैना (28 वर्ष) के असमय निधन पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि निहत्थे और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के खिलाफ एक बेहद जघन्य अपराध है। ऐसे क्रूर कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकते। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि दुख की इस विकट घड़ी में पूरी राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने परिजनों से की फोन पर बात
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने घटना के तुरंत बाद दोनों मृतकों के परिजनों से दूरभाष पर संपर्क कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उन्हें हर संभव प्रशासनिक और कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा देश एकजुट होकर आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है और इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले आतंकियों को सुरक्षा बल जल्द ही ढूंढ निकालकर सख्त सजा देंगे।
नाम और पहचान पूछने के बाद आतंकियों ने चलाईं गोलियां
यह दर्दनाक घटना शुक्रवार रात करीब आठ बजे की है, जब कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्टे पर काम कर रहे मजदूरों को निशाना बनाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आतंकियों ने पहले वहां मौजूद श्रमिकों से उनका नाम और पहचान पूछी, फिर उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। गंभीर रूप से घायल दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना को स्थानीय लोगों की मदद से पास के अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया, जबकि भूपेंद्र ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
तीन साल पहले हुई थी दीपक की शादी, परिवार संग गए थे कश्मीर
सक्ती जिले के रहने वाले दीपक रात्रे की शादी तीन साल पहले हुई थी और उनका दो साल का एक मासूम बेटा भी है। दीपक के मामा दिलहरण सांडे ने बताया कि ठंड के मौसम में काम के सिलसिले में दीपक अपनी पत्नी सुमन, मां और भाई के साथ कुलगाम गए थे। इस हादसे ने उनके हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
रक्षाबंधन पर घर लौटने का वादा कर गए थे भूपेंद्र
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के निवासी भूपेंद्र भैना तीन महीने पहले ही अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने के लिए कश्मीर पहुंचे थे। भूपेंद्र ने गांव से निकलते वक्त परिजनों से रक्षाबंधन के त्योहार पर घर लौटने का वादा किया था, लेकिन इस आतंकी हमले ने पूरे गांव को मातम में डुबो दिया। क्षेत्र की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने बताया कि प्रशासन परिजनों के साथ लगातार संपर्क में है और दोनों शवों का अंतिम संस्कार परिजनों की मौजूदगी में जम्मू में कर दिया गया है।



