
CG Liquor Revenue Minister Lakhan Lal Dewangan: छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री से मिलने वाले टैक्स ने इस बार पुराना सारा रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की क्लोजिंग रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के आबकारी विभाग को शराब के व्यापार से कुल 10 हजार 751 करोड़ रुपये का बंपर राजस्व मिला है. इस रिकॉर्ड तोड़ सरकारी आय ने जहां राज्य सरकार की तिजोरी को भारी मजबूती दी है, वहीं प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नया घमासान छेड़ दिया है. सूबे की विष्णुदेव साय सरकार इस पैसे को राज्य के विकास के लिए जरूरी बता रही है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इसे एक गंभीर सामाजिक बुराई से जोड़कर सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल दाग रहा है.
शराब के पैसे से महतारी वंदन और पीएम आवास जैसी योजनाओं को मिल रही गति
इस पूरे मामले पर राज्य के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने एक बड़ा और बेबाक बयान दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि शराब बेचने से सरकारी खजाने में जो भी पैसा आ रहा है, उसका एक-एक रुपया छत्तीसगढ़ के गरीब परिवारों के भले के लिए खर्च किया जा रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रदेश की आधी आबादी को आर्थिक मदद देने वाली ‘महतारी वंदन योजना’, किसानों से बंपर धान खरीदी की समर्थन मूल्य योजना और गरीबों को पक्का मकान देने वाली ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ जैसी तमाम लोक-लुभावन और बड़ी जनकल्याणकारी योजनाएं इसी राजस्व की बदौलत सुचारू रूप से संचालित हो पा रही हैं.
प्रदेश में बढ़कर 703 हुई मदिरा दुकानों की संख्या
आबकारी विभाग से मिले आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में राज्य के भीतर मदिरा दुकानों और क्लबों के नेटवर्क का विस्तार किया गया है. प्रदेश में अब कुल शराब दुकानों की संख्या बढ़कर 703 के पार पहुंच गई है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष के दौरान ही 29 नई शासकीय शराब दुकानें जोड़ी गई हैं. इसके साथ ही शहरों और पर्यटन केंद्रों पर रसूखदारों के लिए 205 क्लब और बार का संचालन किया जा रहा है. आबकारी विभाग के बड़े अधिकारियों का अनुमान है कि नए नियमों के कारण वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस कुल राजस्व में करीब 10 प्रतिशत की और बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है.
कांग्रेस का तीखा हमला, कहा युवाओं को नशे में धकेल कर कमाई कर रही सरकार
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह आक्रामक हो गया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह दलील बेहद शर्मनाक है. विपक्ष का आरोप है कि राज्य की भाजपा सरकार ज्यादा से ज्यादा राजस्व वसूलने के चक्कर में गली-मोहल्लों में शराब की दुकानें खुलवा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ का युवा वर्ग तेजी से नशे की गिरफ्त में जा रहा है. कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या अब छत्तीसगढ़ के गरीबों का कल्याण और माताओं-बहनों का सम्मान केवल शराबियों की गाढ़ी कमाई के भरोसे ही टिका रहेगा.
मंत्री बोले हमारी नियत साफ और कांग्रेस ने सिर्फ घोटाले किए
विपक्ष के इन चौतरफा हमलों पर आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने भी फौरन पलटवार किया है. उन्होंने पुरानी भूपेश बघेल सरकार का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग आज हमें नसीहत दे रहे हैं, उनके खुद के कार्यकाल में शराब के नाम पर हजारों करोड़ रुपये के सिंडिकेट और घोटाले चलाए जा रहे थे. मंत्री ने दावा किया कि हमारी सरकार की नीयत पूरी तरह साफ है और हम बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे सरकारी खजाने में पैसा जमा करा रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल शराब ही नहीं बल्कि खनिज और अन्य सभी स्रोतों से भी आय बढ़ी है, जिससे राज्य का बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है.
अगले वित्तीय वर्ष के लिए आबकारी विभाग ने अभी से शुरू कर दी है नई तैयारियां
बंपर राजस्व मिलने से उत्साहित आबकारी विभाग ने आगामी महीनों के लिए अपनी पूरी कार्ययोजना में बदलाव करना शुरू कर दिया है. अवैध शराब की बिक्री और सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकने के लिए चेक पोस्ट मजबूत किए जा रहे हैं. विभाग का पूरा ध्यान इस बात पर है कि वैध शराब की दुकानों से मिलने वाले टैक्स में कहीं कोई लीकेज न हो. इसके लिए डिजिटल पेमेंट और बारकोड स्कैनिंग जैसी व्यवस्था को और ज्यादा कड़ा किया जा रहा है ताकि अगले साल के लिए तय किए गए राजस्व के ऊंचे लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सके.
छत्तीसगढ़ में शराब राजस्व बनाम सामाजिक सरोकार की बहस और ज्यादा गरमाई
कुल मिलाकर 12 जून 2026 को आए आबकारी विभाग के इन ताजा आंकड़ों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों का भी मानना है कि राजस्व बढ़ाना सरकार की मजबूरी हो सकती है, लेकिन इसके सामाजिक दुष्परिणामों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. एक तरफ जहां सरकार इस मोटी रकम को प्रदेश के चहुंमुखी विकास का मुख्य जरिया बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सड़क से लेकर विधानसभा के भीतर तक सरकार की घेराबंदी करने की रणनीति बना रहा है.



