Dhamtari PM Awas Yojana Pending Installment: धमतरी में पीएम आवास योजना का बुरा हाल: 70 परिवारों के 42 लाख रुपये अटके, आशियाना तोड़ा अब अधूरे मकानों में रहने की मजबूरी

Dhamtari PM Awas Yojana Pending Installment: छत्तीसगढ़ के धमतरी नगर निगम क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 की कछुआ चाल ने गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है. सरकार की तरफ से समय पर अगली किस्त जारी न होने के कारण शहर के 70 से अधिक हितग्राहियों के करीब 42 लाख रुपये अटक गए हैं. हालात इतने खराब हैं कि कई गरीब परिवारों ने पक्के मकान की चाह में अपने पुराने कच्चे घरों को ढहा दिया था, लेकिन अब बजट के अभाव में निर्माण कार्य अधर में लटक गया है. ये पीड़ित परिवार इस भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच तिरपाल तानकर या आधे-अधूरे टूटे मकानों में ही रहने को विवश हैं. राहत की आस में लोग रोज नगर निगम दफ्तर की चौखट पर चक्कर काट रहे हैं.

लक्ष्य से ज्यादा बांटी स्वीकृति पर बजट का प्रबंध करना भूला निगम प्रशासन

धमतरी नगर निगम के भीतर इस पूरी अव्यवस्था के पीछे अफसरों की लापरवाही साफ उजागर हो रही है. योजना के शुरुआती चरण में शासन की ओर से धमतरी शहर के लिए कुल 747 पक्के मकानों का मूल लक्ष्य तय किया गया था. इसके मुकाबले निगम को 1100 से ज्यादा आवेदन मिले, तो अधिकारियों ने पर्याप्त बजट का इंतजाम किए बिना ही आनन-फानन में 1072 हितग्राहियों को मकान निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी. वित्तीय बैकअप न होने का नतीजा आज सबके सामने है कि स्वीकृत आवेदनों में से अब तक केवल 77 मकान ही पूरी तरह से बन पाए हैं, जबकि 525 आवासों का काम बीच में रुका हुआ है.

कर्ज के जाल में फंसे हितग्राही, किस्तों की उम्मीद में काम शुरू कराना पड़ा भारी

निगम दफ्तर पहुंचे पीड़ित रामकुमार साहू और आदित्य पटेल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि अधिकारियों ने जल्द पैसा आने की बात कही थी. इसी भरोसे पर उन्होंने रिश्तेदारों और साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर फाउंडेशन और दीवारों का काम खड़ा करवा लिया. अब जब काम लिंटल और छत के स्तर पर पहुंच चुका है, तो निगम ने हाथ खड़े कर दिए हैं. हितग्राहियों का कहना है कि एक तरफ पुराना घर उजड़ गया, दूसरी तरफ नया मकान आधा बना है और ऊपर से कर्जदारों का दबाव अलग से झेलना पड़ रहा है. इस दोहरी मार से गरीब मजदूर परिवार दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं.

अब तक 6.85 करोड़ बांटे पर अंतिम मंजूरी के लिए 119 फाइलें मंत्रालय में लंबित

नगर निगम के संबंधित विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रशासन अब तक अलग-अलग चरणों में हितग्राहियों के खातों में कुल 6.85 करोड़ रुपये की राशि भेज चुका है. हालांकि यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है क्योंकि निर्माणाधीन मकानों की संख्या बहुत ज्यादा है. इसके अलावा 119 ऐसे गरीब परिवारों के केस हैं, जिनकी फाइलें पूरी तरह तैयार होने के बाद भी अंतिम प्रशासनिक मंजूरी के लिए पिछले कई महीनों से रायपुर मुख्यालय (मंत्रालय) में धूल खा रही हैं. वहां से हरी झंडी न मिलने के कारण इन परिवारों का काम शुरू ही नहीं हो पाया है.

अफसरों का रटा-रटाया जवाब, शासन को भेजा है प्रस्ताव, पैसा आते ही करेंगे भुगतान

जब इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम धमतरी के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनका वही पुराना और रटा-रटाया जवाब सामने आया. अफसरों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बजट की कमी होने के कारण भुगतान रुका हुआ है. लंबित पड़ी 42 लाख रुपये की राशि की मांग को लेकर राज्य शहरी विकास अभिकरण को बकायदा एक नया प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है. अधिकारियों ने दावा किया कि मंत्रालय से बजट स्वीकृत होकर नगर निगम के खाते में आते ही प्राथमिकता के आधार पर सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएंगे.

मूल बजट सुनिश्चित किए बिना मंजूरी देने पर स्थानीय लोगों ने उठाए गंभीर सवाल

निगम के इस ढीले रवैये को लेकर अब धमतरी के जागरूक नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी मोर्चा खोल दिया है. लोगों का सीधा सवाल है कि जब शासन स्तर पर केवल 747 मकानों का ही बजट रिजर्व था, तो अधिकारियों ने अपनी वाहवाही लूटने के लिए 1072 परिवारों को प्रमाण पत्र क्यों बांट दिए. बिना वित्तीय स्वीकृति के काम शुरू करवाने का खामियाजा आज धमतरी के दर्जनों गरीब परिवार भुगत रहे हैं. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर निर्माण कार्य के लिए अगली किस्तें जारी नहीं की गईं, तो हितग्राहियों के साथ मिलकर निगम परिसर का घेराव किया जाएगा.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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