
CG Vegetable Price Hike: छत्तीसगढ़ के खुदरा और थोक बाजारों में हरी सब्जियों के दामों में अचानक भारी तेजी देखने को मिल रही है, जिससे आम लोगों के घर का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है. भीषण गर्मी और स्थानीय स्तर पर उत्पादन ठप होने के कारण मंडियों में सब्जियों की आवक लगातार घट रही है. इस महंगाई का सबसे बड़ा असर टमाटर की कीमतों पर पड़ा है. थोक व्यापारियों के अनुसार, अगर आने वाले दिनों में मौसमी परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो आम उपभोक्ताओं को रसोई के लिए और ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है.
स्थानीय उत्पादन ठप होने से बेंगलुरु और नासिक के भरोसे छत्तीसगढ़ का बाजार
राजिम और आसपास के मैदानी इलाकों में पड़ी तेज गर्मी के चलते टमाटर की स्थानीय फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है. करीब पंद्रह दिन पहले तक जो स्थानीय टमाटर बाजार में आसानी से मिल रहा था, उसकी आवक अब मंडियों में लगभग शून्य हो चुकी है. स्थानीय सप्लाई पूरी तरह रुक जाने के कारण छत्तीसगढ़ के व्यापारी अब बेंगलुरु और नासिक की मंडियों से आने वाले टमाटर पर निर्भर हो गए हैं. बाहरी राज्यों से आने वाली इसी खेप के भरोसे इस समय प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों की मांग पूरी की जा रही है.

थोक मंडी में आठ सौ रुपए प्रति कैरेट तक पहुंचे दाम, खुदरा में पचास रुपए किलो बिका टमाटर
बाहरी राज्यों से आ रहे टमाटर के कारण परिवहन खर्च बढ़ गया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है. थोक सब्जी मंडी में टमाटर की कीमत 700 से 800 रुपए प्रति कैरेट तक पहुंच गई है. वहीं आम उपभोक्ताओं को खुदरा बाजार में टमाटर 40 से 50 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिल रहा है. व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि पिछले साल इसी सीजन में टमाटर का भाव 1200 से 1300 रुपए प्रति कैरेट तक चला गया था. अगर इस बार भी बेंगलुरु से गाड़ियां कम आईं, तो पुराना रिकॉर्ड टूट सकता है.
हरी मिर्च से लेकर अदरक तक के दाम बढ़े, धनिया पत्ती और गोभी भी हुई महंगी
बाजार में सिर्फ टमाटर ही नहीं, बल्कि अन्य हरी सब्जियां भी आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. रायपुर की मुख्य मंडियों से प्राप्त रेट लिस्ट के अनुसार, वर्तमान में फूलगोभी 60 रुपए किलो बिक रही है, जबकि कुंदरू, मुनगा और गवार फली के दाम 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. इसके अलावा लौकी 30 रुपए, करेला 25 रुपए, भिंडी और बैंगन 40 रुपए किलो के भाव पर मिल रहे हैं. तड़के और स्वाद के लिए जरूरी हरी धनिया 80 रुपए, हरी मिर्च 70 रुपए और अदरक 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
मौसमी फलों की कीमतों में भी तेजी, जामुन और परवल के भाव सुन ग्राहक हैरान
सब्जियों के साथ-साथ बाजार में फलों की कीमतें भी आम लोगों को परेशान कर रही हैं. सीजनल फलों की श्रेणी में आने वाला जामुन इस समय खुदरा बाजार में 150 से 200 रुपए प्रति किलो के ऊंचे दाम पर बिक रहा है. वहीं बारहमासी फलों में केला 30 रुपए दर्जन और परवल 50 रुपए प्रति किलो के भाव पर मिल रहा है. महंगे दामों के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों ने अब बाजार से फल और महंगी सब्जियों की खरीद काफी सीमित कर दी है, जिसका असर दुकानदारों की बिक्री पर भी दिख रहा है.
थोक संघ के अध्यक्ष ने जताई और दाम बढ़ने की आशंका, आपूर्ति सुधरने का इंतजार
थोक सब्जी मंडी संघ के अध्यक्ष विष्णु राम जांगड़े ने बाजार की वर्तमान स्थिति पर अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के मौसम में आमतौर पर हरी सब्जियों का उत्पादन घट जाता है और पानी की कमी से फसलें सूख जाती हैं. इस बार स्थानीय स्तर पर टमाटर की भारी किल्लत है, जिसके कारण दूसरे राज्यों से माल मंगवाना हमारी मजबूरी बन गया है. उन्होंने साफ किया कि यदि आने वाले हफ्तों में मौसम सामान्य नहीं हुआ और बाहरी राज्यों से ट्रकों की आवक नहीं बढ़ी, तो कीमतों में और भी ज्यादा उछाल आ सकता है.



