
CG Vishnu Deo Sai Cabinet Late Night Meeting: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर पूरे प्रदेश के सियासी गलियारों में गुरुवार की रात भारी हलचल देखी गई. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सरकारी आवास पर देर रात अचानक एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई, जो करीब पांच घंटे तक चली. रात 9 बजे शुरू हुई यह मैराथन बैठक देर रात 1:40 बजे तक जारी रही. बैठक में मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट के लगभग सभी मंत्री और भाजपा संगठन के बड़े पदाधिकारी मौजूद रहे. इस अचानक बुलाई गई बैठक के बाद से ही प्रदेश में मंत्रिमंडल फेरबदल और मंत्रियों की छुट्टी होने की अटकलें तेज हो गईं, जिस पर अब सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बयान सामने आए हैं.
रात के अंधेरे में जुटी साय कैबिनेट और संगठन के दिग्गज, मंत्रियों के लिए रखा गया था विशेष डिनर
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस अहम बैठक का स्वरूप बेहद गोपनीय रखा गया था. दौरे पर गए कुछ मंत्रियों को भी तत्काल फोन करके रायपुर वापस बुलाया गया था. बैठक के दौरान ही मुख्यमंत्री आवास में सभी मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों के लिए रात्रिभोज (डिनर) का भी आयोजन किया गया था. बैठक खत्म होने के बाद देर रात करीब 2 बजे सभी नेता एक-एक कर सीएम हाउस से बाहर निकले. इस दौरान भाजपा के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल की मौजूदगी ने इस बैठक के राजनीतिक महत्व को और ज्यादा बढ़ा दिया.

दो दिन पहले भी गुपचुप तरीके से हुई थी एक बैठक
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस तरह की एक गोपनीय बैठक दो दिन पहले भी आयोजित की गई थी. उस बैठक के बारे में भी सरकार या संगठन की तरफ से कोई भी आधिकारिक सूचना मीडिया या आम जनता के लिए जारी नहीं की गई थी. उस दौरान केवल रायपुर और उसके आसपास के मैदानी जिलों में मौजूद मंत्रियों को ही अचानक बुलाया गया था. लगातार दो बार हुई इस तरह की सीक्रेट बैठकों ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि सरकार के भीतर कुछ बड़ा पक रहा है.
विजय शर्मा बोले- यह केवल नियमित समीक्षा
बैठक खत्म होने के बाद जब उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मीडिया के सामने आए, तो उनसे सबसे पहला सवाल मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर ही पूछा गया. इस पर उन्होंने साफ शब्दों में इन अटकलों को खारिज कर दिया. विजय शर्मा ने कहा कि बैठक में मंत्रियों को हटाने या बदलने जैसा कोई विषय शामिल ही नहीं था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मीडिया में इस तरह की बातें कहां से आ रही हैं, यह उनकी समझ से परे है. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सब कुछ ठीक है और चिंता की कोई बात नहीं है.

सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल के लिए हर तीन महीने में बैठक होना सामान्य प्रक्रिया
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने बैठक की असल वजह बताते हुए कहा कि सरकार और भाजपा संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए हर तीन महीने में इस तरह की सामूहिक बैठकें आयोजित की जाती हैं. यह कोई पहली बार नहीं हुआ है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी महीनों में होने वाले पार्टी के कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों और मंत्रियों के क्षेत्रीय दौरों की रूपरेखा तैयार करना था. उन्होंने इसे पूरी तरह से एक रूटीन सांगठनिक गतिविधि करार दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता तक ले जाने की रणनीति
बैठक के एजेंडे को लेकर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई इस बैठक में मुख्य रूप से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के सफल कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों पर चर्चा हुई. आने वाले समय में इन उपलब्धियों और विकास कार्यों को प्रदेश के कोने-कोने में जनता के बीच किस तरह लेकर जाना है, इसकी जिम्मेदारी मंत्रियों और विधायकों को सौंपी गई है. इसके साथ ही आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर भी शुरुआती मंथन किया गया.
केदार कश्यप ने बताया मंत्रियों के प्रभार जिलों की हुई समीक्षा
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने बैठक के भीतर हुए कामकाज का ब्यौरा देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की समीक्षा की है. मंत्रियों ने अपने-अपने प्रभार क्षेत्रों में अब तक क्या-क्या काम किए हैं, वहां जनप्रतिनिधियों के दौरे कितने प्रभावी रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों को कितना मिल रहा है, इन सभी बिंदुओं पर मंत्रियों से सीधे सवाल-जवाब किए गए. कश्यप ने कहा कि आने वाले समय में मंत्रियों को अपने प्रभार वाले जिलों में और अधिक समय बिताने के निर्देश दिए गए हैं.

रामविचार नेताम के बयान ने बटोरीं सुर्खियां, कहा सब सुरक्षित है और छत्तीसगढ़ सुरक्षित है
इस पूरी बैठक के बाद सबसे ज्यादा चर्चा कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम के मजाकिया अंदाज की हो रही है. जब पत्रकारों ने उनसे बैठक के फैसलों के बारे में जानना चाहा, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि आप सभी लोग मुस्कुराइए, सब सेफ है और पूरा छत्तीसगढ़ सेफ है. उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में इस तरह देखा जा रहा है कि फिलहाल किसी भी मंत्री की कुर्सी पर कोई संकट नहीं है. हालांकि, भाजपा नेताओं की तमाम सफाई के बावजूद देर रात की इस मैराथन बैठक ने विपक्ष को भी सरकार पर नजर रखने का एक मौका दे दिया है.



