
CGBSE School Admission New Rules: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों में प्रवेश और परीक्षा के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आना बेहद जरूरी हो गया है. अगर कोई नियमित छात्र तय मापदंड के अनुसार स्कूल नहीं आता है, तो उसकी रेगुलर सीट खत्म हो जाएगी और उसे प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर परीक्षा देनी होगी. इसके साथ ही बोर्ड ने छात्रों के मूल्यांकन के लिए नया क्रेडिट सिस्टम और साल में दो बार मुख्य परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया है.
बिना अपार आईडी के नहीं मिलेगा नौवीं से बारहवीं कक्षा में रेगुलर दाखिला
केंद्र सरकार की नीति के तहत छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने अब सभी स्कूली बच्चों के लिए अपार आईडी यानी ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री अनिवार्य कर दी है. यह प्रत्येक छात्र की एक विशिष्ट डिजिटल शैक्षणिक पहचान संख्या होगी, जिसमें उसका पूरा एकेडमिक रिकॉर्ड दर्ज रहेगा. बोर्ड ने साफ किया है कि सत्र 2026-27 में कक्षा नौवीं से लेकर बारहवीं तक किसी भी विद्यालय में बिना इस आईडी के नियमित छात्र के रूप में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. जिन छात्रों की आईडी नहीं बनी है, उन्हें दाखिले से पहले इसे बनवाना होगा.
क्लास में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य, विशेष मामलों में ही मिलेगी थोड़ी राहत
माध्यमिक शिक्षा मंडल के नए नियमों के तहत स्कूल में नियमित विद्यार्थी के रूप में बने रहने के लिए छात्र की न्यूनतम उपस्थिति 75 प्रतिशत होना आवश्यक है. यदि किसी छात्र की हाजिरी इस आंकड़े से कम पाई जाती है, तो उसका रेगुलर फॉर्म निरस्त कर दिया जाएगा और उसे प्राइवेट परीक्षार्थी माना जाएगा. हालांकि गंभीर बीमारी या विशेष परिस्थितियों में बोर्ड की अनुमति से हाजिरी में अधिकतम 10 प्रतिशत तक की रियायत दी जा सकती है. इसका मतलब यह है कि किसी भी सूरत में छात्र की स्कूल में उपस्थिति 65 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए.
फरवरी और जून में होंगी मुख्य परीक्षाएं, फेल होने पर क्रेडिट सिस्टम देगा मौका
छात्रों का तनाव कम करने के लिए बोर्ड अब एक ही सत्र में दो बार मुख्य बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन करेगा. पहली मुख्य परीक्षा हर साल की तरह फरवरी-मार्च के महीने में आयोजित की जाएगी. इसके बाद जो छात्र अंक सुधारना चाहते हैं या फेल हो जाते हैं, उनके लिए दूसरी मुख्य परीक्षा जून-जुलाई में आयोजित होगी. अगर कोई छात्र इस दूसरी परीक्षा में भी कुछ विषयों में अनुत्तीर्ण हो जाता है, तो उसे क्रेडिट योजना का लाभ मिलेगा. इस व्यवस्था के तहत छात्र को पास हुए विषयों को दोबारा पढ़ने की जरूरत नहीं होगी और वह अगले साल बाकी बचे विषयों को पास कर सकेगा.

पढ़ाई में दो साल से ज्यादा का अंतर होने पर रेगुलर छात्र बनने का विकल्प खत्म
अक्सर देखा जाता है कि पारिवारिक या आर्थिक कारणों से कुछ बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है. ऐसे ड्रॉपआउट छात्रों के लिए भी बोर्ड ने नीति स्पष्ट की है. यदि किसी छात्र की पढ़ाई में केवल एक साल का अंतराल आया है, तो वह इसकी वजह बताते हुए एक शपथ-पत्र यानी एफिडेविट जमा करके दोबारा रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर अगली कक्षा में प्रवेश ले सकता है. वहीं अगर पढ़ाई छूटे हुए दो साल या उससे अधिक का समय बीत चुका है, तो छात्र को नियमित दाखिला नहीं दिया जाएगा. ऐसे आवेदकों को केवल प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में ही फॉर्म भरने की छूट होगी.
इकतीस जुलाई तक चलेंगे सामान्य दाखिले, देर होने पर सचिव से लेनी होगी मंजूरी
बोर्ड ने प्रवेश की पूरी समय-सीमा तय कर दी है जिसके तहत सामान्य रूप से दाखिले की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होकर 31 जुलाई 2026 तक संचालित की जाएगी. यदि कोई छात्र इस अवधि में प्रवेश नहीं ले पाता है, तो विशेष और बेहद जरूरी परिस्थितियों में मंडल सचिव की अनुमति से 17 अगस्त 2026 तक दाखिला लिया जा सकेगा. इसके अलावा जो छात्र दूसरी मुख्य परीक्षा में पास होंगे, उन्हें परिणाम घोषित होने के दस दिनों के भीतर अपनी अगली कक्षा में प्रवेश सुरक्षित कराना होगा.
नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए इकतीस अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी
नए सत्र में जो छात्र कक्षा नौवीं में प्रवेश ले रहे हैं, उनके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पंजीयन यानी नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की है. स्कूल प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते सभी बच्चों की अपार आईडी और जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन कर लें ताकि तय तिथि के भीतर बोर्ड के पोर्टल पर उनका ऑनलाइन डेटा अपलोड किया जा सके. समय-सीमा बीतने के बाद किसी भी छात्र का फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे वे परीक्षा से वंचित हो सकते हैं.



