
Raipur NSUI Extortion Case: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में छात्र राजनीति को कटघरे में खड़ा करने वाला एक संगीन मामला सामने आया है. कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के दो बड़े पदाधिकारियों पर एक क्लब में हुए विवाद को रफा-दफा करने के नाम पर डरा-धमकाकर अवैध वसूली करने के आरोप लगे हैं. इस पूरे मामले से जुड़ा एक कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. वायरल क्लिप में संगठन के रसूखदार नेता पुलिस कार्रवाई रुकवाने और मामला शांत कराने के एवज में रुपयों का सौदा करते नजर आ रहे हैं. पीड़ित पक्ष ने इस घटना की शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है.
न्यूज पोर्टल पर खबर चलवाकर पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया
पूरा विवाद शहर के एक नामचीन क्लब में कुछ लड़कों के बीच हुई मारपीट से शुरू हुआ. इस घटना का वीडियो एनएसयूआई के जिला उपाध्यक्ष तारिक अनवर खान और उत्तर विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष बाजपेयी के हाथ लग गया. आरोप है कि इन नेताओं ने पहले इस वीडियो को एक स्थानीय न्यूज पोर्टल के माध्यम से प्रसारित करवाया. इसके बाद संगठन के कार्यकर्ताओं को पुलिस के पास भेजकर देर रात तक क्लब खुला रहने की शिकायत दर्ज कराई और लड़कों की गिरफ्तारी का दबाव बनवाया. जब पुलिस कार्रवाई की खबरें चलने लगीं, तो उसी खबर का हवाला देकर पीड़ितों को कानूनी पचड़े में फंसाने का डर दिखाया गया.

गाड़ी के भीतर बैठाकर मामला रफा-दफा करने के लिए मांगे पचास हजार रुपये
पीड़ितों से पुरानी जान-पहचान होने का फायदा उठाकर एनएसयूआई नेता तारिक अनवर खान ने शनिवार को उन्हें वीआईपी रोड पर मिलने के लिए बुलाया. आरोप है कि तारिक ने लड़कों को अपनी ही गाड़ी के भीतर बैठाया और पुलिस अधिकारियों समेत संगठन के कार्यकर्ताओं से सेटिंग कराने का झांसा दिया. सोशल मीडिया पर लीक हुई बातचीत के मुताबिक मामले को पूरी तरह दबाने और आगे किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन या ज्ञापन न सौंपने के बदले में कथित तौर पर 50,000 रुपये की मांग की गई. इस पूरी डील के दौरान आशीष बाजपेयी के नाम का भी बार-बार इस्तेमाल किया गया.
पीड़ित पक्ष ने साक्ष्य सौंपकर प्रशासन से की निष्पक्ष और कानूनी कार्रवाई की मांग
वीडियो और ऑडियो के सार्वजनिक होने के बाद रायपुर के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है. पीड़ित लड़कों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों से गुहार लगाई है. पीड़ितों ने मांग की है कि वायरल वीडियो और ऑडियो की सत्यता की जांच समय सीमा के भीतर की जाए ताकि छात्र राजनीति की आड़ में दुकान चला रहे इन कथित नेताओं का सच जनता के सामने आ सके. पीड़ितों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है.
छात्र संगठन के भीतर भी मची खलबली, बड़े पदाधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव
इस घटना के बाद एनएसयूआई के प्रदेश नेतृत्व और कांग्रेस पार्टी के भीतर भी आंतरिक कलह और खलबली मचना तय माना जा रहा है. आम नागरिकों और विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं कि कैसे छात्र नेता पुलिस के नाम पर सरेआम वसूली की बिसात बिछा रहे हैं. संगठन के कुछ वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि बदनामी से बचने के लिए जल्द ही दोनों आरोपी पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है या जांच पूरी होने तक उन्हें पद से निलंबित किया जा सकता है.



