CG Assistant Professor Bharti 2026: छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए खुशखबरी: कॉलेजों में 700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती को मंजूरी, उच्च शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ की सरकार राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर देने के लिए सक्रिय हो गई है. सरकारी कॉलेजों की कार्यप्रणाली को सुधारने और लंबे समय से रुके हुए प्रशासनिक मामलों को निपटाने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा की अध्यक्षता में मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस उच्च स्तरीय बैठक में प्राध्यापकों की नई भर्ती से लेकर पदोन्नति और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई दूरगामी और कड़े फैसले लिए गए हैं.

सहायक प्राध्यापकों के 700 खाली पदों पर जल्द शुरू होगी सीधी भर्ती

प्रदेश के बेरोजगार युवाओं और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह बैठक बड़ी राहत लेकर आई है. उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने विभाग में खाली पड़े सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर बिना किसी देरी के सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने बैठक में मौजूद अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया कि भर्ती के काम में किसी भी स्तर पर ढिलाई या रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से होने वाली अन्य भर्तियों के दस्तावेज सत्यापन के काम को भी तेज गति से पूरा करने को कहा गया है.

31 जुलाई तक सभी स्नातक कॉलेजों को मिलेंगे नियमित प्राचार्य

राज्य के कई सरकारी कॉलेजों में स्थाई प्राचार्यों की कमी को लेकर मंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई. उन्होंने कड़े शब्दों में आदेश दिया कि आगामी 31 जुलाई 2026 तक सभी पात्र स्नातक प्राचार्यों की पदोन्नति का काम अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाए. सरकार का लक्ष्य है कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में राज्य का कोई भी स्नातक स्तर का सरकारी कॉलेज बिना नियमित प्राचार्य के न रहे. शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए कॉलेजों में प्रशासनिक कसावट लाना सरकार की पहली प्राथमिकता है.

पुराने नियमों के आधार पर होगा प्रमोशन

बैठक में प्राध्यापकों और विभागीय कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई संवेदनशील निर्णय भी लिए गए. साल 2019 से पहले के बचे हुए सहायक प्राध्यापकों को वरिष्ठता का लाभ देने के लिए 1990 के पुराने नियमों के तहत ही प्राध्यापक पद पर प्रमोट किया जाएगा. इसके अलावा सहायक प्राध्यापकों के वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान की रुकी हुई सूचियों को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिन्हें जल्द ही जारी कर दिया जाएगा. वहीं कॉलेजों में सहायक ग्रेड-3 और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर रुकी हुई नियुक्तियां अब ‘राज्य कर्मचारी चयन आयोग’ के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएंगी.

ग्रामीण और आदिवासी अंचल के छात्रों के लिए चलेगा विशेष अंग्रेजी कम्युनिकेशन कोर्स

बदले हुए वैश्विक परिवेश को देखते हुए राज्य सरकार ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के लिए एक विशेष योजना तैयार की है. सुदूर वनांचल के कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भीतर से संकोच को दूर करने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए “90 घंटे, 90 दिन” का एक विशेष अंग्रेजी संप्रेषण (कम्युनिकेशन) कोर्स शुरू किया जाएगा. इस कोर्स के जरिए छात्रों को व्यावहारिक अंग्रेजी सिखाई जाएगी ताकि वे शहरों के युवाओं के साथ बराबरी से मुकाबला कर सकें. साथ ही पूरे राज्य में शैक्षणिक कैलेंडर का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.

बजट आवंटन में पक्षपात का खेल खत्म

सरकारी धन के सही उपयोग और पारदर्शिता को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि विभाग में किसी भी प्रकार की वित्तीय लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है. अब से किसी भी सरकारी कॉलेज को विकास कार्यों के लिए बजट जारी करने से पहले शासन से प्रशासनिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा. नए और पिछड़े क्षेत्रों में खुले महाविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाएंगे ताकि सभी संस्थानों को जरूरत के मुताबिक बराबर राशि मिल सके और किसी के साथ भेदभाव न हो.

नए सत्र से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी पूरी तरह लागू होगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति

छत्तीसगढ़ सरकार अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को उच्च शिक्षा के हर स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. कॉलेजों में चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम की सफलता के बाद अब स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं को भी पूरी तरह से एनईपी के दायरे में लाया जाएगा. वर्तमान में इस नई नीति के तहत पांचवें और छठे सेमेस्टर के लिए केंद्रीय अध्ययन मंडल की सूची तैयार कर ली गई है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया है. इसके लागू होने से छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम पढ़ने को मिलेगा.

प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए अपर संचालक और प्राचार्य के पद को किया गया अलग

प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही तय करने के लिए विभाग ने ‘अपर संचालक’ के पद को ‘प्राचार्य’ के पद से पूरी तरह से अलग करने का फैसला लिया है. इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों में प्राचार्यों के कार्यकाल के दौरान हुए वित्तीय खर्चों का ऑडिट करने के लिए राज्य के लेखा परीक्षा उत्तीर्ण अनुभवी कर्मचारियों की विशेष सेवाएं ली जाएंगी. इससे लंबे समय से लंबित पड़ी जांच और ऑडिट के मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा. इस अहम बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, आयुक्त और मंत्रालय के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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