
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तुरतुरिया माता मंदिर में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. माता के दर्शन करने पहुंचे करीब 250 श्रद्धालु अचानक आई तेज बाढ़ की वजह से मंदिर परिसर के चारों तरफ घिर गए. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण स्थानीय नदी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों के वापस लौटने का एकमात्र रास्ता पूरी तरह पानी में डूब गया. घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और अपनी जान जोखिम में डालकर एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.
सुबह का सुहाना सफर दोपहर बाद अचानक बड़ी मुसीबत में बदला
रविवार की सुबह भंडारपुरी डुम्हा गांव के रहने वाले करीब 250 ग्रामीण एक साथ माता के दर्शन की आस लेकर तुरतुरिया धाम के लिए रवाना हुए थे. जब श्रद्धालु सुबह मंदिर पहुंचे, तब मौसम सामान्य था और रास्ते में पड़ने वाली बालमदेही नदी में पानी का बहाव बेहद कम था. सभी लोगों ने बिना किसी परेशानी के नदी को पैदल पार किया और मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. उस वक्त किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ घंटों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है.

दोपहर बाद शुरू हुई मूसलाधार बारिश और उफान पर आई बालमदेही नदी
दोपहर ढलते ही पूरे क्षेत्र में अचानक घने बादल छा गए और कड़कड़ाती बिजली के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया. पहाड़ियों से घिरे इस इलाके में लगातार पानी गिरने की वजह से बालमदेही नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगा. कुछ ही मिनटों के भीतर शांत दिखने वाली नदी उफान पर आ गई और पानी मंदिर के रास्तों तक पहुंच गया. नदी का बहाव इतना तेज था कि उसे पार करना मौत को दावत देने जैसा था, जिसके कारण सभी लोग वहीं फंस गए.

रास्ता बंद होते ही श्रद्धालुओं में मची अफरा-तफरी, रोने लगे बच्चे और बुजुर्ग
वापसी का रास्ता पूरी तरह जलमग्न देखकर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच घबराहट फैल गई. नदी के बढ़ते पानी को देखकर लोग सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तरफ भागने लगे. फंसे हुए लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, जो तेज बारिश और बाढ़ के हालात देखकर सहम गए थे. स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर के पुजारियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए इस आपातकालीन स्थिति की जानकारी कसडोल पुलिस को दी.
कसडोल थाना प्रभारी की अगुवाई में पुलिस बल ने संभाला मोर्चा
बाढ़ की सूचना मिलते ही कसडोल थाना प्रभारी प्रवीण मिंज बिना वक्त गंवाए अपनी पूरी टीम और रेस्क्यू उपकरणों के साथ तुरतुरिया के लिए रवाना हो गए. मौके पर पहुंचकर जब पुलिस ने नदी के रौद्र रूप को देखा, तो स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने का फैसला किया गया. पुलिस के जांबाज जवानों ने बिना देर किए उफनती नदी के तेज बहाव के बीच कदम रखा और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए एक सुरक्षित मानव श्रृंखला बनाई.

जांबाज पुलिस जवानों ने कंधे पर बैठाकर पार कराई उफनती नदी
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बच्चों, बीमार लोगों और चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी. ऐसे नाजुक समय में पुलिस के जवानों ने संवेदनशीलता और बहादुरी का परिचय दिया. जवानों ने एक-एक कर छोटे बच्चों, रोती हुई महिलाओं और लाचार बुजुर्गों को अपने मजबूत कंधों पर बैठाया और कमर तक भरे तेज पानी के बहाव के बीच से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया. यह सिलसिला लगातार कई घंटों तक चलता रहा.
घंटों चले रेस्क्यू अभियान के बाद सुरक्षित बचाए गए सभी 250 नागरिक
लगभग तीन से चार घंटे तक चले इस बेहद कठिन और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पुलिस टीम ने सभी 250 श्रद्धालुओं को सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया. जब आखिरी नागरिक को सुरक्षित किनारे पर लाया गया, तब जाकर आयोजकों और स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली. सबसे अच्छी बात यह रही कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ की बदौलत इतने बड़े संकट के बाद भी किसी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई और सभी लोग सुरक्षित हैं.
नगर सेना की लेटी-लतीफी पर फूटा गुस्सा, ढाई घंटे बाद भी नहीं पहुंची टीम
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जहां एक तरफ पुलिस की पीठ थपथपाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रबंधन से जुड़ी नगर सेना की टीम पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दोपहर करीब ढाई बजे ही नगर सेना और होमगार्ड के कंट्रोल रूम को इस बाढ़ की सूचना दे दी गई थी. इसके बावजूद शाम पांच बजे तक उनकी कोई भी टीम या नाव मौके पर नहीं पहुंची. लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर मोर्चा नहीं संभालती, तो कोई अप्रिय घटना घट सकती थी.
बरसात के मौसम में पिकनिक स्पॉट और नदी-नालों से दूर रहने की सख्त हिदायत

इस पूरी घटना के बाद कसडोल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने आम जनता के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है. थाना प्रभारी प्रवीण मिंज ने लोगों से पुरजोर अपील की है कि मानसून के दौरान नदी-नालों के आसपास जाने या उन्हें पार करने का दुस्साहस बिल्कुल न करें. खासकर अंदरूनी और पहाड़ी इलाकों में स्थित धार्मिक या पर्यटन स्थलों पर जाने से पहले मौसम विभाग के पूर्वानुमान और स्थानीय गाइडलाइंस की जानकारी जरूर लें, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट से बचा जा सके.
सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह
प्रशासन ने मैदानी अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे बारिश के दिनों में ऐसे संवेदनशील नदी-नालों और रपटों पर नजर रखें जहां अचानक बाढ़ आने का खतरा रहता है. ग्रामीणों को भी समझाया जा रहा है कि तेज बारिश के दौरान कच्चे मकानों या पेड़ों के नीचे रुकने के बजाय पक्के और सुरक्षित सामुदायिक भवनों में शरण लें. इसके साथ ही पुल-पुलियों के ऊपर पानी होने की स्थिति में वाहनों को जबरन निकालने की कोशिश न करने की सलाह दी गई है.
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