CG School New Rule: सरकारी स्कूलों के लिए नया अल्टीमेटम: 5वीं और 8वीं के बच्चों को याद होना जरूरी इतने तक पहाड़ा, लापरवाही पर नपेंगे स्कूल प्रमुख

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और बच्चों की बुनियादी समझ को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है. राज्य सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए गणित और भाषा के कुछ कड़े मापदंड तय किए हैं. नए आदेश के मुताबिक, अगर तय समय के भीतर बच्चे निर्धारित शैक्षणिक स्तर को हासिल नहीं कर पाते हैं, तो इसके लिए सीधे तौर पर स्कूल के प्रधानाध्यापक या प्राचार्य को जिम्मेदार माना जाएगा. लापरवाही बरतने वाले संस्था प्रमुखों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

पांचवीं के बच्चों को 20 और आठवीं को 25 तक पहाड़ा याद कराना अनिवार्य

शिक्षा विभाग ने गणित विषय में बच्चों की पकड़ मजबूत करने के लिए एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके तहत पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को अक्टूबर महीने तक 20 तक का पहाड़ा पूरी तरह याद होना जरूरी है. इसी तरह, आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए 25 तक का पहाड़ा अनिवार्य कर दिया गया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षकों को रोजाना क्लास में विशेष अभ्यास कराने को कहा गया है ताकि कमजोर बच्चों को भी मुख्यधारा में लाया जा सके.

क्लासरूम के ब्लैकबोर्ड पर लिखी जाएगी उलटी गिनती, लगेंगे गणितीय चार्ट

बच्चों को खेल-खेल में और लगातार देखकर सीखने में मदद मिले, इसके लिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे में भी कुछ बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं. अब सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के क्लासरूम में बने ब्लैकबोर्ड पर एक से लेकर सौ तक की सीधी और उलटी गिनती स्थायी रूप से लिखी जाएगी. इसके साथ ही क्लास की दीवारों पर बड़े और साफ अक्षरों वाले गणितीय पहाड़ा चार्ट लगाए जाएंगे. इस पहल का मकसद यह है कि क्लास में आते-जाते समय बच्चों की नजर इन चार्ट्स पर पड़ती रहे और वे रोज इसका मौखिक अभ्यास कर सकें.

पहली कक्षा को हिंदी और छठवीं के छात्रों को अंग्रेजी पढ़ना-लिखना सिखाने का टारगेट

प्रशासन ने केवल गणित ही नहीं, बल्कि भाषा के ज्ञान को लेकर भी हर कक्षा के हिसाब से अलग-अलग लक्ष्य तय किए हैं. नए नियमों के अनुसार, पहली कक्षा के बच्चों को इस काबिल बनाया जाएगा कि वे हिंदी की किताबों को बिना रुके धाराप्रवाह पढ़ सकें. वहीं, छठवीं कक्षा में पहुंचने वाले बच्चों के लिए अंग्रेजी भाषा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है. शिक्षकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे छठवीं के हर छात्र को अंग्रेजी की किताब पढ़ने और उसे सही तरीके से लिखने के योग्य तैयार करें.

यूडाइस पोर्टल पर 30 सितंबर तक छात्रों की पूरी जानकारी अपडेट करने की डेडलाइन

बिलासपुर में हुई समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्कूल प्रमुखों को प्रशासनिक कार्यों को लेकर भी कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि सभी शासकीय स्कूलों को अपने प्रत्येक छात्र का यूडाइस (UDISE) डाटा आगामी 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से पोर्टल पर दर्ज करना होगा. जांच में यह बात सामने आई थी कि कई स्कूलों की लापरवाही के कारण बच्चों के यूडाइस नंबर पोर्टल पर अपडेट नहीं हैं. कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि इस काम में किसी भी तरह की हीलाहवाली या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

यूडाइस लिंक से ही मिलेगी मुफ्त यूनिफॉर्म और किताबें, लापरवाही पर रुकेगा लाभ

स्कूलों का यूडाइस डाटा अब सीधे तौर पर सरकार की कल्याणकारी और छात्र-केंद्रित योजनाओं से जोड़ दिया गया है. इसी पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर ही आने वाले समय में विद्यार्थियों को मुफ्त स्कूल यूनिफॉर्म, पाठ्यपुस्तकें, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. यदि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही या डाटा एंट्री न होने की वजह से कोई भी पात्र छात्र इन सुविधाओं से वंचित रह जाता है, तो इसकी पूरी जवाबदेही स्कूल के प्राचार्य की होगी और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

मिड-डे मील की जांच के लिए बनेगी स्वाद पंजी, रोज दर्ज होगी खाने की क्वालिटी

बैठक में बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था और उसकी स्वच्छता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई. अब राज्य के सभी स्कूलों में ‘स्वाद पंजी’ यानी टेस्ट रजिस्टर बनाना अनिवार्य कर दिया गया है. भोजन परोसने से पहले स्कूल के शिक्षकों या प्रबंधन समिति के सदस्यों को उसे चखना होगा और उसकी गुणवत्ता की प्रविष्टि इस रजिस्टर में रोज करनी होगी. इसके साथ ही स्कूलों में रसोई गैस सिलेंडर की समय पर सप्लाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को सौंपी गई है ताकि ईंधन की कमी से बच्चों का खाना प्रभावित न हो.

कार्य विभाजन और दैनिक डायरी से तय होगी शिक्षकों की समय पर उपस्थिति

प्रशासन ने स्कूलों के भीतर आंतरिक अनुशासन बनाए रखने के लिए संस्था प्रमुखों को कार्य विभाजन स्पष्ट रखने के निर्देश दिए हैं. अब हर स्कूल में शिक्षकों की समय-सारणी (टाइम-टेबल), छात्रों की दैनिक उपस्थिति और शिक्षकों की दैनिक डायरी को पूरी तरह व्यवस्थित रखना होगा. इस सख्ती के बाद अब स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की बुनियादी पढ़ाई को लेकर दबाव बढ़ेगा. इस पूरे फैसले के पीछे सरकार की सोच यह है कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की नींव मजबूत रहे ताकि आगे की कक्षाओं में उन्हें पढ़ाई में कोई कठिनाई न हो.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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