छत्तीसगढ़ भाजपा में मचेगी बड़ी हलचल: नितिन नवीन की टीम में किसे मिलेगी जगह, अरुण साव या विजय शर्मा की दावेदारी सबसे मजबूत

छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन और सत्ता के स्तर पर बहुत जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. देश की राजधानी दिल्ली में हुई एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन की नई टीम का ढांचा लगभग अंतिम रूप ले चुका है. केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद अब केवल इसकी आधिकारिक घोषणा होना ही बाकी रह गया है. माना जा रहा है कि इस नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छत्तीसगढ़ के कुछ बहुत ही प्रभावशाली और कद्दावर चेहरों को बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं.

दिल्ली की मैराथन बैठक में नामों पर लगी अंतिम मुहर

पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार नई टीम को लेकर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के बीच एक लंबी मैराथन बैठक संपन्न हुई. इस बैठक में आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए देश भर के संभावित नामों पर गंभीर चर्चा की गई. इसी चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ से भी कुछ प्रमुख नेताओं की कुंडली और उनके कामकाज के रिकॉर्ड को खंगाला गया. केंद्रीय नेतृत्व ने गहन विचार-विमर्श के बाद अंतिम सूची तैयार कर ली है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार छत्तीसगढ़ को केंद्रीय संगठन में पहले से कहीं ज्यादा तरजीह मिलने जा रही है.

छत्तीसगढ़ की जमीनी राजनीति से नितिन नवीन का पुराना नाता

नितिन नवीन का छत्तीसगढ़ से बहुत ही पुराना और गहरा नाता रहा है क्योंकि वे लंबे समय तक प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. यहां के जमीनी समीकरणों और एक-एक स्थानीय नेता की कार्यशैली से वे बहुत अच्छी तरह वाकिफ हैं. यही वजह है कि जब वे अपनी नई केंद्रीय टीम का चुनाव कर रहे हैं, तो छत्तीसगढ़ के हिस्से में कोई बड़ा और वजनदार पद आना बिल्कुल तय माना जा रहा है. चर्चा है कि प्रदेश के किसी बड़े चेहरे को राष्ट्रीय महामंत्री जैसा बेहद रसूखदार और नीति-निर्धारक पद दिया जा सकता है, जो सीधे तौर पर केंद्रीय फैसलों में शामिल होगा.

उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा की दावेदारी सबसे आगे

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस रेस में जिन नामों को लेकर भाजपा के अंदरूनी हलकों में सबसे ज्यादा चर्चाएं चल रही हैं, उनमें छत्तीसगढ़ के दोनों उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के नाम सबसे ऊपर हैं. इन दोनों नेताओं ने पिछले कुछ समय में प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है. इसके अलावा दिल्ली के गलियारों में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने की बात भी सामने आ रही है. इन प्रमुख नामों के साथ ही कुछ अन्य सांसदों और विधायकों को भी राष्ट्रीय मंत्री या मुख्य कार्यकारिणी में शामिल किए जाने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं.

सांसदों और विधायकों को भी केंद्रीय टीम में मिल सकती है एंट्री

मुख्य दावेदारों के अलावा राजनांदगांव के लोकसभा सांसद संतोष पांडेय और महासमुंद की सांसद रूपकुमारी चौधरी को भी राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. विधायकों की बात करें तो गोमती साय, सुशांत सिंह और सौरभ सिंह के नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है. इन सभी चेहरों को या तो सीधे तौर पर संगठन के किसी मुख्य विंग का प्रभार दिया जाएगा या फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बतौर सदस्य शामिल करके उनका कद बढ़ाया जाएगा. पार्टी की कोशिश है कि राज्य के हर संभाग और वर्ग को राष्ट्रीय स्तर पर संतुलित प्रतिनिधित्व दिया जा सके.

परफार्मेंस के आधार पर साय सरकार के मंत्रिमंडल में भी होगा फेरबदल

संगठन में होने वाले इस बड़े बदलाव का सीधा असर छत्तीसगढ़ की साय सरकार पर भी पड़ना तय है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही राष्ट्रीय टीम के नामों का एलान होगा, उसके तुरंत बाद राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल का पुनर्गठन भी किया जा सकता है. इस संभावित फेरबदल में मंत्रियों के पिछले छह से आठ महीनों के कामकाज के परफार्मेंस की समीक्षा की जाएगी. खराब या सुस्त प्रदर्शन करने वाले कुछ चेहरों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है, जबकि कुछ नए और ऊर्जावान विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है.

राष्ट्रीय संगठन में हमेशा मजबूत रहा है छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक कद

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से ही भाजपा के केंद्रीय संगठन में यहां के नेताओं का हमेशा से ही एक बड़ा और सम्मानजनक स्थान रहा है. इतिहास गवाह है कि सरोज पांडेय और रामविचार नेताम जैसे छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता अतीत में राष्ट्रीय महामंत्री जैसी बड़ी सांगठनिक जिम्मेदारी निभा चुके हैं. वहीं करुणा शुक्ला भी राष्ट्रीय महिला मोर्चा की कमान संभालने के साथ-साथ उपाध्यक्ष पद पर रह चुकी हैं. वर्तमान में भी सरोज पांडेय और लता उसेंडी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं. इस बार भी पार्टी इसी पुरानी और मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाने के मूड में दिख रही है.

छत्तीसगढ़ को जल्द मिलेगा एक नया और पूर्णकालिक प्रदेश प्रभारी

चूंकि नितिन नवीन अब राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी और नई भूमिका में आ चुके हैं, इसलिए छत्तीसगढ़ भाजपा को बहुत जल्द एक नया प्रदेश प्रभारी भी मिलने वाला है. नया प्रभारी कौन होगा, इस पर भी कयास लगाए जा रहे हैं क्योंकि उनके कंधों पर ही छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. इसके अलावा चर्चा यह भी है कि इस बार छत्तीसगढ़ के किसी युवा और तेज-तर्रार नेता को ‘राष्ट्रीय सह-मीडिया प्रभारी’ का पद देकर राष्ट्रीय स्तर की मीडिया डिबेट्स के लिए तैयार करने की रणनीति बनाई जा रही है.

भविष्य की युवा लीडरशिप तैयार करने पर पार्टी आलाकमान का दांव

बीजेपी आलाकमान इस बार केवल वरिष्ठ नेताओं को ही नहीं, बल्कि भविष्य की नई और युवा लीडरशिप को भी आगे बढ़ाने की सोच रहा है. इसके लिए राज्य के टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जा सकती है. पार्टी की रणनीति यह है कि आने वाले समय में जो भी नेता केंद्रीय टीम का हिस्सा बनेंगे, वे राज्य में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और सांगठनिक मजबूती के लिए एक रीढ़ की हड्डी की तरह काम करेंगे. युवाओं को आगे लाने से संगठन में एक नया उत्साह देखने को मिलेगा.

संगठनात्मक नियमों के तहत ये बड़े चेहरे होंगे पदेन सदस्य

भाजपा के तय सांगठनिक नियमों और संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राज्यों के कुछ बेहद प्रमुख नेता अपने पद के प्रभाव से सीधे ही स्थायी आमंत्रित सदस्य बन जाते हैं. छत्तीसगढ़ के संदर्भ में बात करें तो प्रदेश संगठन महामंत्री, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष इस सूची में स्वाभाविक रूप से शामिल रहेंगे. इन पदेन सदस्यों के अलावा जो नई नियुक्तियां होंगी, वे पूरी तरह से नितिन नवीन की पसंद और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति से तय की जा रही हैं.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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