CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें महादेव ऐप पर 72 आरोपियों पर चार्जशीट व करोड़ों का खेल, कोंडागांव में शिक्षकों से 12 करोड़ की ठगी, वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट की जांच रिपोर्ट तैयार, इंद्रावती रिजर्व में बाघ के शिकार पर 3 वनकर्मी निलंबित, कवर्धा में दो महीने में उखड़ी ढाई करोड़ की सड़क, CGPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में नया विवाद, नाबालिग को कार देने पर 3 मौतों के आरोपी पिता को राहत नहीं, विधानसभा सत्र से पहले भाजपा मंत्रियों पर भारी पड़ी अफसरी, इजराइल में नर्सों की भर्ती पर मचे बवाल की जांच शुरू और प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में MBBS इंटर्नशिप के नए नियम लागू समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे
महादेव सट्टा ऐप: 72 आरोपियों पर चार्जशीट, करोड़ों के खेल में नए खुलासों की तैयारी
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने अदालत में छह नई चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा को आरोपी बनाया गया है। इस कदम से देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क पर शिकंजा और कस गया है। जांच एजेंसी ने छह प्रमुख आरोपियों को नामजद करते हुए भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत अदालत में दस्तावेज पेश किए हैं। सीबीआई ने जिन छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के साथ भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन लोगों ने पूरे सट्टा नेटवर्क को चलाने और आर्थिक अपराध को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई। इसके साथ ही मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त सबूत अदालत में पेश किए गए हैं। इससे दोनों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ना तय है। सीबीआई ने एक समानांतर जांच में 66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच और आरोप पत्र दाखिल किए हैं, जो सट्टेबाजी सिंडिकेट पैनल के सदस्य बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। सोशल मीडिया के जरिए देशभर में नए यूजर्स जोड़े जाते थे। सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को पहले फर्जी बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था और फिर विदेश भेज दिया जाता था। इस अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण के लिए रिश्वत के रूप में दिया जाता था। सीबीआई के अनुसार ऐप के प्रमोटर कुछ वर्ष पहले ही भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में चले गए थे और वहीं से पूरा ऑपरेशन संभाल रहे थे।
शिक्षकों से करोड़ों की ठगी, पुलिस ने दबोचे 5 शातिर जालसाज
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में लोन दिलाने के नाम पर 43 शिक्षकों से करोड़ों रुपए की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह शिक्षकों से लोन करवाकर 60 प्रतिशत राशि खुद रख लेता था और तीन साल में कर्ज चुकाने का झांसा देता था। अब तक ये लोग 43 शिक्षकों से करीब 12 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी कर चुके हैं। मामले की शिकायत मिलने के बाद कोंडागांव पुलिस ने विशेष टीम का गठन कर अलग-अलग जिलों में दबिश देकर इन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को लोन एजेंट बताकर शिक्षकों से संपर्क करते थे और उन्हें पर्सनल लोन आसानी से दिलाने का भरोसा देते थे। जब बैंक से लोन स्वीकृत हो जाता था, तब ठगी का खेल शुरू होता था। लोन पास होने के बाद आरोपी शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत रकम देते थे और बची हुई 60 प्रतिशत राशि अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे। आरोपी शिक्षकों को भरोसा दिलाते थे कि तीन साल के अंदर पूरा लोन चुका दिया जाएगा, लेकिन बाद में वे गायब हो जाते थे। इससे शिक्षकों पर बैंक का पूरा कर्ज रह जाता था। इस मामले में फरसगांव और केशकाल क्षेत्र के कई शिक्षकों ने पुलिस से शिकायत की थी। फरसगांव निवासी शिक्षक संजय कोडोपी की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके क्षेत्र से ही करीब दो करोड़ रुपए की ठगी हुई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों का नेटवर्क फरसगांव, केशकाल, बड़े डोंगर, धनोरा और विश्रामपुरी सहित कई इलाकों में फैला हुआ था। पुलिस ने बैंक खातों के रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन की तकनीकी जांच के बाद इन पांचों को दबोचा।
वेदांता ब्लास्ट: तीन महीने बाद रिपोर्ट तैयार, अब एक्शन की बारी
सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण विस्फोट में 25 मजदूरों की मौत हो गई थी। इस हादसे के करीब तीन महीने बाद जांच रिपोर्ट तैयार हो गई है। बिलासपुर संभाग के कमिश्नर और दिल्ली से आई केंद्रीय विशेषज्ञ टीम अपनी जांच पूरी कर चुकी है। दोनों रिपोर्ट अगले सप्ताह राज्य सरकार को सौंप दी जाएंगी। माना जा रहा है कि इन रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर में नामजद अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। बिलासपुर संभाग के कमिश्नर सुनील कुमार जैन ने पुष्टि की है कि उनकी जांच रिपोर्ट पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल लॉग्स और विभिन्न विभागों से प्राप्त दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। वहीं हादसे के बाद बने दबाव के बीच केंद्रीय बॉयलर बोर्ड और उद्योग संवर्धन विभाग ने सात सदस्यीय केंद्रीय विशेषज्ञ टीम गठित की थी, जिसमें भेल और एनटीपीसी के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। इस टीम की रिपोर्ट भी तैयार है और केवल औपचारिक हस्ताक्षर होने बाकी हैं। शुरुआती तकनीकी जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, प्लांट में अधिक बिजली उत्पादन और मुनाफे के चक्कर में बॉयलर को निर्धारित सीमा से अधिक दबाव पर चलाया जा रहा था। सबसे गंभीर तथ्य यह है कि हादसे से दो दिन पहले सुरक्षा प्रणाली ने अलार्म दिया था, लेकिन प्लांट बंद करने के बजाय काम जारी रखा गया। जांच में यह भी सामने आया है कि वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास मार्ग मलबे से बंद थे, जिससे विस्फोट के समय मजदूर बाहर नहीं निकल सके।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार मामला: 3 वनकर्मी निलंबित
बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पासेवाड़ा रेंज के रेंजर, डिप्टी रेंजर और बिट गार्ड को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मैदानी स्तर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और विस्तृत जांच अभी जारी है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया था। वन विभाग की टीम इस मामले में शिकारियों और घटना से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इसके अलावा जंगल क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था और गश्ती रिकॉर्ड की भी समीक्षा की जा रही है। जांच टीम स्थानीय स्तर पर सूचना जुटाने के साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही है। जंगल क्षेत्र में लगे कैमरा ट्रैप की फुटेज भी खंगाली जा रही है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है और यह बाघों का प्राकृतिक आवास है। दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण यहां निगरानी करना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। विभाग का कहना है कि संरक्षित वन्यजीवों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दो महीने में उखड़ी दो करोड़ की सड़क, डिप्टी सीएम के इलाके में बना था रोड
छत्तीसगढ़ के कवर्धा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी करीब 2.49 करोड़ रुपए की सड़क दो महीने में ही खराब हो गई है। सड़क कई जगह से उखड़ गई है और एक भारी ट्रक के धंसने का मामला भी सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस सड़क का वीडियो जारी कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह सड़क उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के गृह निर्वाचन क्षेत्र में आती है और इस विभाग का जिम्मा भी उन्हीं के पास है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत दलदली से मेन रोड खरिया होते हुए अगरी तक 3.60 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण ठेकेदार तिलकराम चंद्रवंशी द्वारा कराया गया था। निर्माण कार्य पूरा हुए अभी महज दो महीने ही बीते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क की डामर परत उखड़ने लगी है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में आवागमन की परेशानी को देखते हुए इस सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया सामग्री के उपयोग के कारण यह पहली बारिश भी नहीं झेल सकी।सड़क खराब होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है और उखड़े हुए हिस्सों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका गहरा गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। क्षेत्रवासियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन का इस तरह दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए और सड़क की मरम्मत दोबारा कराई जानी चाहिए।
CGPSC: असिस्टेंट प्रोफेसर पद का चयन रद्द, फिर भी दस्तावेज सत्यापन
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा तकनीकी त्रुटि के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन रद्द होने के बावजूद, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने उसी डॉक्टर को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुला लिया है, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है। आयोग ने सीटीवीएस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर पद का चयन निरस्त किया था, लेकिन इसके बावजूद विभाग ने संबंधित डॉक्टर को 13 जुलाई को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुला लिया है। दूसरी तरफ आयोग इसी पद के लिए 14 जुलाई को नए सिरे से इंटरव्यू भी आयोजित कर रहा है। यह पूरा मामला बिना डिग्री वाले डॉक्टर को वरीयता देने से जुड़ा था। मीडिया में सवाल उठाए जाने के बाद आयोग ने माना था कि शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वरीयता देने में तकनीकी गलती हुई थी। इसके बाद 4 जून को डॉक्टर का चयन निरस्त कर स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया था। अब चयन रद्द होने के बाद भी सत्यापन के लिए बुलावा भेजने पर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच नेहरू मेडिकल कॉलेज स्थित एसीआई के सीटीवीएस विभाग के संविदा कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. बालकृष्ण साहू ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफे की वजह कम वेतन बताई है। टीडीएस और अन्य कटौतियों के बाद उन्हें करीब 1.40 लाख रुपए ही मिल रहे थे, जबकि एक निजी अस्पताल से उन्हें बड़ा ऑफर मिला था। उनसे पहले डॉ. तान्या छौड़ा भी इस्तीफा दे चुकी हैं, जिससे अस्पताल में जटिल सर्जरी का काम प्रभावित हो रहा है।
नाबालिग को कार की चाबी देना पड़ा भारी, 3 मौतों पर पिता को राहत नहीं
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत के मामले में नाबालिग बेटी को कार देने वाले पिता की याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पिता के खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत की कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में मामले में अपराध के साक्ष्य मौजूद हैं, इसलिए इस स्तर पर कानूनी कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती। यह सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने की। यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है, जब रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में एक भीषण कार हादसा हुआ था। इस हादसे में एक महिला और दो पुरुषों की जान चली गई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि दुर्घटना के समय कार एक नाबालिग लड़की चला रही थी। पुलिस के अनुसार, पिता घनश्याम महिलाने को पता था कि उनकी बेटी की उम्र वाहन चलाने के लिए कानूनी रूप से कम है, फिर भी उन्होंने उसे चाबी सौंपी। इसी आधार पर पुलिस ने पिता को भी आरोपी बनाया। घनश्याम महिलाने ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि हादसे के समय कार उनकी बेटी नहीं बल्कि एक बालिग व्यक्ति चला रहा था। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला भी दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन सबूतों की सच्चाई का फैसला निचली अदालत में ट्रायल के दौरान होगा। कोर्ट ने कहा कि कानूनन पिता की जिम्मेदारी बनती है और उन्हें ट्रायल कोर्ट में अपने तर्क रखने की स्वतंत्रता है।
मंत्रियों पर भारी पड़ी अफसरी, छत्तीसगढ़ विधानसभा में हो रही माननीयों की किरकिरी
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अधिकारियों की कागजी रिपोर्ट के कारण मंत्रियों को विपक्ष के सामने असहज होना पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए भाजपा मंत्रियों ने अब मानसून सत्र से पहले नया रास्ता निकाला है। मंत्री अब जिलों का दौरा कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से सरकारी योजनाओं की जमीनी रिपोर्ट ले रहे हैं। मंत्री खुद भी मौके पर जाकर हकीकत देख रहे हैं ताकि अफसरों के तैयार किए जवाबों के कारण उन्हें सदन में शर्मिंदा न होना पड़े। पिछले सत्रों के दौरान कई नए मंत्रियों को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा था। विपक्ष का आरोप था कि मंत्री केवल अधिकारियों द्वारा लिखी गई नोटशीट पढ़ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत अलग है। कुछ मामलों में सूचना के अधिकार से मिली जानकारी और विधानसभा में दिए गए जवाबों में अंतर भी पाया गया था, जिससे सरकार की किरकिरी हुई थी।हाल ही में रायपुर में संगठन और सरकार के वरिष्ठ नेताओं की एक विशेष बैठक हुई थी, जिसमें संसदीय कार्यशैली और सदन में जवाब देने की तैयारी को लेकर चर्चा की गई। मंत्रियों को साफ संदेश दिया गया है कि वे केवल फाइलों के भरोसे न रहें। यही वजह है कि अब मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और फीडबैक जुटा रहे हैं ताकि आगामी सत्र में मजबूती से जवाब दे सकें।
इजराइल के लिए नर्सों की भर्ती पर मचा बवाल, राजभवन के बाद सरकार ने बैठाई जांच
छत्तीसगढ़ सरकार की इजराइल में होम-केयरगिवर भर्ती योजना विवादों में घिर गई है। भर्ती के जॉब डिस्क्रिप्शन में नर्सों से घरेलू काम कराने के आरोप और महिला अभ्यर्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने आयुक्त को पूरे मामले की नियमानुसार जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। विवाद की वजह भर्ती विज्ञापन की शर्तें हैं। कांग्रेस के चिकित्सा प्रकोष्ठ का आरोप है कि छत्तीसगढ़ की बेटियों से मरीजों की देखभाल के नाम पर खाना बनाना, घर की सफाई और कपड़े धोने जैसे काम कराए जाएंगे। उनका कहना है कि जीएनएम और बीएससी नर्सिंग जैसी पेशेवर डिग्री धारकों से ऐसा काम कराना नर्सिंग पेशे की गरिमा के खिलाफ है। इसके अलावा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। विज्ञापन में शामिल 3500 पदों में से अधिकांश महिलाओं के लिए हैं। युद्ध ग्रस्त इजराइल में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को भेजना उनके लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। शिकायत राजभवन पहुंचने के बाद राज्यपाल सचिवालय ने इसे स्वास्थ्य विभाग को भेजा, जिसके बाद सरकार ने जांच शुरू कराई है।
MBBS इंटर्नशिप के नए नियम लागू, अब सीटों से ज्यादा छात्रों को नहीं मिलेगी अनुमति
छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस इंटर्नशिप को लेकर नया नियम लागू किया गया है। आयुष एवं हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश के किसी भी सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज में उसकी स्वीकृत सीटों से अधिक छात्रों को इंटर्नशिप की अनुमति नहीं मिलेगी। इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो दूसरे कॉलेजों से पढ़ाई पूरी कर रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर कराने की कोशिश करते थे। पिछले कुछ सालों से रायपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप ट्रांसफर के आवेदन लगातार बढ़ रहे थे, जिससे वहां के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। विश्वविद्यालय का मानना है कि इस नए नियम से सभी कॉलेजों में प्रशिक्षण का संतुलन बना रहेगा। अब कोई भी कॉलेज अपनी क्षमता से अधिक इंटर्न नहीं रख सकेगा, जिससे प्रशासनिक विवादों में भी कमी आएगी। एमबीबीएस की साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद छात्रों के लिए एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करना जरूरी होता है, जिसमें उन्हें स्टाइपेंड मिलता है। इसके बाद डॉक्टरों को दो साल की बांड सेवा ग्रामीण क्षेत्रों या जिला अस्पतालों में देनी होती है। बांड सेवा का पालन न करने पर 20 से 25 लाख रुपए तक की पेनाल्टी का प्रावधान है। नए नियम से मेडिकल कॉलेजों में पारदर्शिता और प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।



