Chandkhuri Ram Statue: चंदखुरी में श्रीराम नई मूर्ति पर छिड़ा विवाद, 80 लाख की श्रीराम प्रतिमा खेत में जलमग्न, विभागीय मंत्री बोले ‘मुझे पता नहीं था’

Chandkhuri Ram Statue: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर चंदखुरी में स्थित माता कौशल्या मंदिर इन दिनों एक अनोखे सियासी और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गया है। भगवान श्रीराम की एक नई और भव्य 51 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर यहां भारी खींचतान चल रही है। लगभग 80 लाख रुपये की लागत से तैयार की गई यह विशालकाय प्रतिमा पिछले चार महीनों से पास के ही गोढ़ी गांव में एक खुले खेत के भीतर रखी हुई है। इसे सिर्फ एक मामूली नीली तिरपाल से ढका गया है जो वर्तमान मानसूनी सीजन में पूरी तरह से नाकाफी साबित हो रही है।

लगातार हो रही बारिश से जलमग्न हुई प्रतिमा, न कोई शेड है और न ही सुरक्षाकर्मी

Ram Mandir Chandkhuri: मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बीच यह ऐतिहासिक और कीमती प्रतिमा इस समय खेत में जमा हुए घुटनों तक पानी में डूबी हुई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी भारी-भरकम राशि से बनी इस मूर्ति की हिफाजत के लिए संस्कृति विभाग ने अब तक कोई पक्का शेड या अस्थाई ढांचा तक नहीं बनाया है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी यहां घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। पूरे परिसर में न तो कोई चौकीदार तैनात है और न ही किसी अधिकारी ने इस बात की सुध ली है कि खुले आसमान के नीचे रखी प्रतिमा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

पूर्व संस्कृति मंत्री की घोषणा के बाद ग्वालियर के शिल्पकारों ने तैयार की थी यह मूर्ति

इस पूरे विवाद की जड़ें राज्य के पिछले प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी हुई हैं। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मंदिर परिसर में श्रीराम की एक मूर्ति स्थापित की गई थी। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और वर्तमान बीजेपी सरकार के तत्कालीन संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 22 जनवरी 2024 को विधानसभा में इस पुरानी मूर्ति की बनावट पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे जनभावनाओं के विपरीत बताते हुए बदलने का ऐलान किया था। सदन की सहमति के बाद आनन-फानन में ग्वालियर के नामचीन मूर्तिकारों को इसका ऑर्डर दिया गया और यह नई प्रतिमा बनकर तैयार हुई।

प्राण-प्रतिष्ठा की औपचारिकता के कारण पुरानी मूर्ति को हटाने पर अड़े स्थानीय ग्रामीण

ग्वालियर से प्रतिमा रायपुर तो आ गई लेकिन इसे मुख्य मंदिर में स्थापित करने की राह में एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक पेंच फंस गया है। मंदिर में जो पुरानी मूर्ति इस समय लगी हुई है, उसका पूरे विधि-विधान से नवग्रह पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हो चुका है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक बार प्रतिष्ठित हो चुकी मूर्ति को बिना किसी ठोस कारण या खंडित हुए बिना हटाना शुभ नहीं माना जाता है। इसी धार्मिक संशय के कारण चंदखुरी की मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय ग्रामीण इस नई मूर्ति को वहां लगाने का लगातार विरोध कर रहे हैं।

मंदिर समिति का दावा, बिना कोई राय-मशविरा किए थोपा जा रहा है नया फैसला

मां कौशल्या जन्मभूमि सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उनका साफ कहना है कि जो मूर्ति वर्तमान में स्थापित है, वह पिछले कुछ सालों में चंदखुरी की एक वैश्विक पहचान बन चुकी है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु उसी रूप के दर्शन करने आते हैं। वर्मा ने आरोप लगाया कि पर्यटन और संस्कृति विभाग ने इस नई मूर्ति को मंगाने या स्थापित करने से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पुजारियों और ग्राम समिति से कोई भी औपचारिक बातचीत नहीं की। इसी प्रशासनिक लेत-लतीफी और जिद के कारण यह प्रतिमा खुले में सड़ने को मजबूर है।

विभागीय मंत्री राजेश अग्रवाल ने जताई अनभिज्ञता, दिए तत्काल जांच और संरक्षण के आदेश

मामला मीडिया में आने के बाद प्रदेश के वर्तमान पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार जनभावनाओं का पूरा सम्मान करती है और भगवान श्रीराम की इस भव्य प्रतिमा को बहुत जल्द एक सम्मानजनक स्थान पर स्थापित किया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मूर्ति को इस तरह खेत में असुरक्षित और लावारिस हालत में छोड़ा गया है, इसकी उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी। मंत्री ने विभाग के उच्चाधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी कर मूर्ति की गरिमा के अनुकूल सुरक्षा इंतजाम करने को कहा है।

पौराणिक इतिहास में दर्ज है माता कौशल्या की जन्मभूमि और दशरथ से विवाह की कथा

चंदखुरी का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाल्मीकि रामायण के पन्नों से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक त्रेतायुग में जब अयोध्या के राजा दशरथ का युवराज के रूप में राज्याभिषेक होना था, तब दक्षिण कोसल के राजा भानुमंत को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। राजा भानुमंत अपनी अत्यंत सुंदर पुत्री राजकुमारी भानुमति के साथ अयोध्या पहुंचे थे। वहां राजकुमारी की सुंदरता और सद्गुणों से प्रभावित होकर राजा दशरथ ने विवाह का प्रस्ताव रखा। विवाह के बाद कोसल राज्य की बेटी होने के कारण ही राजकुमारी भानुमति का नाम माता कौशल्या पड़ा, जिनकी कोख से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म हुआ।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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