
CG Legislative Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज का दिन बेहद सरगर्मियों वाला रहने वाला है। विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस वर्तमान भाजपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से यह विधानसभा के भीतर पेश किया जाने वाला 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। इस प्रस्ताव के आने से सदन में तीखी बहस और सियासी रस्साकशी होना तय माना जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष आज की आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस बात का निर्णय करेंगे कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा किस दिन कराई जाएगी।
विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस का पहला बड़ा अविश्वास प्रस्ताव
विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार को अलग-अलग मोर्चों पर नाकाम बताते हुए इस प्रस्ताव को लाने का फैसला किया है। हालांकि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य सरकार गिराना नहीं होता है बल्कि इसके बहाने विपक्ष को सरकार की नीतियों और कामकाज पर खुलकर हमला करने का एक बड़ा मंच मिल जाता है। अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस शासन के कामकाज की कमियों को उजागर करने की कोशिश करेगी जबकि सत्ता पक्ष अपनी विकास योजनाओं और उपलब्धियों का ब्यौरा देकर पलटवार करेगा।
सदन में संख्या बल का गणित पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में
अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा के मौजूदा गणित को देखें तो सत्ताधारी दल भाजपा पूरी तरह से सुरक्षित स्थिति में नजर आ रही है। कुल 90 सदस्यों वाली विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के पास 54 विधायक हैं जबकि विपक्षी दल कांग्रेस के पास केवल 35 सीटें हैं। वहीं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का महज एक विधायक सदन में मौजूद है। इस तरह स्पष्ट बहुमत होने के कारण भाजपा सरकार को संख्या बल के स्तर पर कोई खतरा नहीं है। यही कारण है कि इस प्रस्ताव को केवल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
नकटी गांव की कार्रवाई और कानून व्यवस्था पर घेराबंदी की तैयारी
कांग्रेस ने इस अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से सरकार को घेरने के लिए कई बड़े मुद्दों की एक सूची तैयार की है। इसमें सबसे प्रमुख मुद्दा नकटी गांव में हुई हालिया बुलडोजर कार्रवाई का है। इसके साथ ही कांग्रेस राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, किसानों को आ रही समस्याएं, युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, अलग-अलग विभागों में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक ढिलाई जैसे गंभीर मामलों को लेकर सदन में सरकार से सीधे जवाब मांगेगी।
छत्तीसगढ़ विधानसभा का पुराना रिकॉर्ड, आज तक नहीं गिरी कोई भी सरकार
छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कुल 9 बार अविश्वास प्रस्ताव अलग-अलग सरकारों के खिलाफ लाए जा चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि हर बार तत्कालीन सरकारें सदन में अपना बहुमत साबित करने में पूरी तरह सफल रहीं और एक बार भी सरकार नहीं गिरी। सबसे पहले अजीत जोगी की कांग्रेस सरकार के खिलाफ साल 2002 और 2003 में भाजपा दो बार यह प्रस्ताव लाई थी। इसके बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने पांच बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किए थे।

भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव भी ध्वनिमत से हुआ था खारिज
पिछली विधानसभा के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ भी भाजपा साल 2022 और 2023 में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। जुलाई 2023 में भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का एक लंबा आरोप-पत्र पेश किया था। उस समय कांग्रेस के पास 72 विधायकों का भारी बहुमत था जिसके चलते लंबी बहस के बाद यह प्रस्ताव सदन में ध्वनिमत से खारिज हो गया था। छत्तीसगढ़ में अब तक सबसे लंबी बहस जुलाई 2015 में रमन सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी जो रिकॉर्ड 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।
प्रश्नकाल में गूंजेगा जल जीवन मिशन और रायपुर की पेयजल व्यवस्था का मुद्दा
अविश्वास प्रस्ताव के अलावा आज का प्रश्नकाल भी काफी हंगामेदार होने की उम्मीद है। सत्ता पक्ष के विधायक भैय्यालाल राजवाड़े जल जीवन मिशन के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइन और पानी टंकियों के निर्माण में अनियमितता का मामला उठाएंगे। वहीं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर रायपुर शहर में पेयजल आपूर्ति की लचर व्यवस्था और अमृत मिशन योजना के क्रियान्वयन को लेकर अपनी ही सरकार के संबंधित विभाग से तीखे सवाल पूछेंगे।
शिक्षकों के खाली पद, शराब दुकानें और सरकारी खर्च पर भी तीखे सवाल
विपक्ष की तरफ से नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत प्रदेश में हाल ही में हुई औद्योगिक दुर्घटनाओं और उनकी जांच का गंभीर मुद्दा उठाएंगे। कांग्रेस विधायक विद्यावती सिदार सरकारी शराब दुकानों के संचालन से जुड़ी अनियमितताओं पर सरकार को घेरेंगी। वहीं विधायक अटल श्रीवास्तव बिलासपुर जिले में हुए सरकारी आयोजनों के भारी-भरकम खर्च का हिसाब मांगेंगे और विधायक राघवेंद्र सिंह प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पड़े पदों का मुद्दा सदन के पटल पर रखेंगे। इसके साथ ही आज की कार्यसूची में कई अन्य महत्वपूर्ण शासकीय कार्य भी शामिल हैं।



