
Crop Insurance CG: छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी करने वाले परिवारों के लिए एक बेहद जरूरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने खरीफ मौसम 2026 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों का पंजीकरण शुरू कर दिया है। कृषि विभाग की तरफ से साझा की गई जानकारी के मुताबिक योजना के तहत आवेदन करने की प्रक्रिया 12 जुलाई 2026 से चालू हो चुकी है। मौसम की अनिश्चितता और खेती में होने वाले अप्रत्याशित घाटे से बचने के लिए विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी फसलों का बीमा जरूर सुरक्षित करा लें।
एल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका
मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल राज्य में म्स छपदव (एल नीनो) के सक्रिय होने की संभावना जताई है। इस मौसमी बदलाव के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून के दौरान अनियमित, खंडित या औसत से काफी कम बारिश होने का खतरा मंडरा रहा है। सूखे या कम पानी की स्थिति में किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिरने का डर रहता है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में संभावित वित्तीय नुकसान की भरपाई करने और किसानों को कर्ज के दलदल से बचाने के लिए यह फसल बीमा योजना एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगी।
इन 11 फसलों को दायरे में लाया गया
इस बार राज्य सरकार ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुल 11 प्रमुख खरीफ फसलों को इस योजना के तहत अधिसूचित किया है। इसमें मुख्य रूप से सिंचित और असिंचित धान, मक्का, सोयाबीन शामिल हैं। इसके अलावा दलहन और तिलहन वर्ग की अरहर, मूंगफली, मूंग और उड़द को भी शामिल किया गया है। वहीं राज्य में मिलेट्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मोटे अनाजों में कोदो, कुटकी और रागी की फसल का भी बीमा कराया जा सकेगा। किसान अपने क्षेत्र की सटीक फसल सूची की जानकारी स्थानीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से ले सकते हैं।
ऋणी और अऋणी किसान इन अलग-अलग माध्यमों से आसानी से पूरा करें रजिस्ट्रेशन
फसल बीमा कराने के लिए सरकार ने बेहद सरल व्यवस्था बनाई है। जिन किसानों ने सहकारी या व्यावसायिक बैंकों से कृषि ऋण ले रखा है, उनका पंजीकरण संबंधित वित्तीय संस्थान के माध्यम से सीधे तौर पर कर दिया जाएगा। वहीं जिन किसानों के ऊपर कोई मौजूदा लोन नहीं है, वे अपने नजदीकी बैंक, वित्तीय संस्थान, लोक सेवा केंद्र (सीएससी) या अधिकृत बीमा एजेंट की मदद ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त जागरूक किसान भारत सरकार के आधिकारिक फसल बीमा पोर्टल पर जाकर खुद भी ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।
बोनी के संकट से लेकर कटाई के बाद तक, इन 4 प्रमुख परिस्थितियों में मिलेगा क्लेम
सरकार ने किसानों के व्यापक हितों को ध्यान में रखकर इस योजना में नुकसान के चार बड़े चरणों को कवर किया है। यदि मौसम खराब होने के कारण किसान अपने खेतों में बोनी (बुआई) नहीं कर पाता है या शुरुआती दौर में रोपण पूरी तरह विफल हो जाता है, तो भी मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा स्थानीय आपदाओं जैसे भारी ओलावृष्टि, खेतों में लंबे समय तक जलभराव होने या फसल की कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई उपज को नुकसान पहुंचने की स्थिति में भी तय मापदंडों के आधार पर क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।
फसल खराब होने के 72 घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 14447 पर देना होगी सूचना
कृषि विभाग ने नियम और शर्तों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या स्थानीय स्तर पर हुए नुकसान के बाद किसानों को बेहद सतर्क रहना होगा। फसल खराब होने के अधिकतम 72 घंटे के भीतर इसकी लिखित या मौखिक सूचना देना अनिवार्य है। इसके लिए भारत सरकार ने एक नया टोल-फ्री नंबर 14447 जारी किया है जो कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन के रूप में काम करता है। किसान इस नंबर पर कॉल करने के अलावा अपने क्षेत्रीय कृषि कार्यालय, राजस्व अमले या संबंधित बीमा कंपनी को भी समय सीमा में सूचित कर सकते हैं।
यहाँ फसल बीमा कराने की पूरी प्रक्रिया और तरीके को और अधिक सरल व स्पष्ट भाषा में पुनर्गठित (Rewrite) करके दिया गया है:
छत्तीसगढ़ में फसल बीमा कराने के 5 आसान चरण
- चरण 1: जरूरी कागजात तैयार रखें: आवेदन करने से पहले अपने पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक (खाता संख्या और IFSC कोड स्पष्ट हो), जमीन की नकल (B-1 और खसरा) तथा पटवारी या ग्राम सेवक द्वारा सत्यापित बुवाई प्रमाण-पत्र जरूर रख लें।
- चरण 2: लोन लेने वाले (ऋणी) किसानों के लिए प्रक्रिया: यदि आपने बैंक या सहकारी समिति (PACS) से कृषि ऋण या केसीसी (KCC) लिया है, तो बैंक द्वारा आपकी फसलों का बीमा स्वतः और अनिवार्य रूप से कर दिया जाता है।
- चरण 3: बिना लोन वाले (अऋणी) व बटाईदार किसानों के लिए विकल्प: जिन किसानों पर कोई लोन नहीं है या जो बटाई पर खेती करते हैं, वे अपने नजदीकी चॉइस सेंटर (CSC केंद्र) जाकर या खुद मोबाइल पर ‘क्रॉप इंश्योरेंस ऐप’ के जरिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।
- चरण 4: प्रीमियम (बीमा किस्त) का भुगतान: धान और मक्का जैसी खरीफ फसलों के लिए किसानों को कुल बीमित राशि का महज 2 प्रतिशत प्रीमियम शुल्क के रूप में देना होता है।
- चरण 5: सहायता और समाधान: यदि बीमा फॉर्म भरने या प्रीमियम राशि को लेकर कोई भी शंका या समस्या हो, तो किसान सीधे कृषि विभाग के कार्यालय में जा सकते हैं या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14447 पर कॉल कर मदद ले सकते हैं।



