
CG Legislative Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला गूंजा। विपक्ष ने गुजरात राज्य में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी कंपनियों से छत्तीसगढ़ में दवाइयों की सप्लाई का मुद्दा उठाकर सरकार को जमकर घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुपस्थिति में कांग्रेस विधायकों ने स्वास्थ्य मंत्री पर तीखे सवालों की बौछार कर दी। विपक्ष ने राज्य में मरीजों को बिना गुणवत्ता वाली दवाइयां बांटने का आरोप लगाया।
गुजरात में प्रतिबंधित दवाइयों की छत्तीसगढ़ में सप्लाई पर विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि जो दवाइयां गुजरात में खराब गुणवत्ता के कारण बैन की जा चुकी हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ में तुरंत प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बिना उचित गुणवत्ता जांच के दवाइयां सप्लाई की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया दवाइयों की जांच का तरीका, कहा आने के बाद होता है लैब टेस्ट
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विभाग की पूरी प्रक्रिया को सदन के सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) के नियम पहले से तय हैं। इन नियमों के अनुसार, दवाइयां खरीदने से पहले उनका प्री-टेस्ट (आपूर्ति से पहले की जांच) नहीं कराया जाता है। हालांकि, जब दवाइयां राज्य के स्टॉक में पहुंच जाती हैं, तब विभाग अपनी सरकारी लैब में उनका अनिवार्य रूप से टेस्ट करवाता है।
कांग्रेस विधायक ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुपस्थिति में विधायक अटल श्रीवास्तव ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए कुछ विशिष्ट तकनीकी सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या यह सच है कि दवा निर्माता कंपनी मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड द्वारा बनाई जाने वाली एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी मानकों पर फेल हो गई थी और गुजरात सरकार ने उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इस प्रतिबंध की कोई आधिकारिक जानकारी छत्तीसगढ़ सरकार या सीजीएमएससी को मिली थी।
विपक्ष ने लगाया नियमों को शिथिल करने का आरोप, दोषी अधिकारियों पर मांगी कार्रवाई
अटल श्रीवास्तव ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या गुजरात में बैन होने के बाद भी छत्तीसगढ़ में इसी अमानक दवा की खरीद और सप्लाई के आदेश को जल्दबाजी में मंजूरी दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ऐसा हुआ है तो स्थापित वित्तीय नियमों को शिथिल करने यानी ढील देने के लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस प्रतिबंधित अवधि के दौरान कंपनी को किए गए कुल भुगतान और दोषी अधिकारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार की ब्लैकलिस्ट की बात, कहा 25 मार्च 2026 को मिली थी सूचना
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लिखित जवाब में यह स्वीकार किया कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दवा निर्माता कंपनी मेसर्स यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी को गुणवत्ता मानकों पर फेल होने के कारण ब्लैकलिस्ट किया था। मंत्री ने सदन को तारीखों की जानकारी देते हुए बताया कि इस संबंध में संबंधित फर्म यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 25 मार्च 2026 को सीजीएमएससी लिमिटेड को आधिकारिक सूचना प्राप्त हो गई थी।
छत्तीसगढ़ में सप्लाई हो रही दवा को मंत्री ने बताया अलग, एहतियातन ऑर्डर निरस्त करने का दावा
स्वास्थ्य मंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें नियमों को ताक पर रखकर त्वरित स्वीकृति देने की बात कही गई थी। मंत्री ने तकनीकी अंतर समझाते हुए कहा कि गुजरात में जिस एस्पिरिन गैस्ट्रो-रजिस्टेंट टैबलेट (150 मिलीग्राम और 75 मिलीग्राम) को बैन किया गया था, छत्तीसगढ़ में ऑर्डर की गई एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड) उससे पूरी तरह अलग है। उन्होंने कहा कि दोनों दवाएं अलग होने के बावजूद, जनहित को ध्यान में रखते हुए फर्म से सूचना मिलते ही सीजीएमएससी ने इस दवा के क्रय आदेश और दर-अनुबंध को तुरंत निरस्त कर दिया था।
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