
CG Legislative Assembly Monsoon Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रदेश की प्राचीन संस्कृति और पुरातत्व धरोहरों के संरक्षण का गंभीर मुद्दा सदन के पटल पर गूंजा। ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और धर्मजीत सिंह ने इस विषय की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। विपक्षी और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने साझा तौर पर चिंता जताई कि राज्य गठन के ढाई दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ऐतिहासिक साक्ष्यों को सहेजने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
राज्य गठन के 26 साल बाद भी छत्तीसगढ़ में एक केंद्रीय अभिलेखागार का अभाव
विधायक अजय चंद्राकर ने सदन में पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को बने हुए 26 साल का लंबा वक्त बीत चुका है लेकिन आज तक प्रदेश में एक अदद केंद्रीय अभिलेखागार (आर्काइव) का निर्माण नहीं हो पाया है। इस कमी के कारण शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को समृद्ध छत्तीसगढ़ का पूरा इतिहास एक ही स्थान पर प्रामाणिक रूप से उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन्होंने धरोहरों के दस्तावेजीकरण की धीमी प्रक्रिया को लेकर भी भारी असंतोष व्यक्त किया।
सिरपुर और भोरमदेव जैसी ऐतिहासिक जगहों की प्राचीन मूर्तियों के रिकॉर्ड अधूरे
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि सिरपुर, भोरमदेव, राजिम और बारसूर जैसे ऐतिहासिक स्थल अपनी अद्वितीय स्थापत्य कला और प्राचीन इतिहास के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। इन पुरातात्विक स्थलों की खुदाई और आसपास के क्षेत्रों से कई शताब्दियों पुरानी बहुमूल्य मूर्तियां और अवशेष प्राप्त हुए हैं। इसके बावजूद पुरातत्व विभाग के पास इन ऐतिहासिक सामग्रियों का कोई विस्तृत या वैज्ञानिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे इन अमूल्य संपत्तियों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है।
रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय से चोरी हुई 19 करोड़ की अवलोकितेश्वर प्रतिमा का मामला
सदन में रायपुर के ऐतिहासिक महंत घासीदास संग्रहालय का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिसकी स्थापना साल 1875 में जनसहयोग से की गई थी। इस संग्रहालय में सिरपुर से प्राप्त सातवीं शताब्दी की अत्यंत दुर्लभ अवलोकितेश्वर की मूर्ति सुरक्षित रखी गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 19 करोड़ रुपये आंकी गई है। अस्सी के दशक में यह बेशकीमती मूर्ति संग्रहालय से चोरी हो गई थी, जिसे लेकर अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
दीमक खा गए सरकारी रजिस्टर, अमेरिका में मिली चोरी की मूर्ति वापस लाने में फंसा पेंच
विधायक चंद्राकर ने विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि तस्करों के नेटवर्क से यह दुर्लभ मूर्ति अमेरिका में बरामद कर ली गई है और अमेरिकी प्रशासन इसे भारत सरकार को सौंपने के लिए तैयार है। हालांकि इस मामले में सबसे बड़ी बाधा यह आ रही है कि महंत घासीदास संग्रहालय में रखे जिस सरकारी रजिस्टर में इस मूर्ति का पूरा ब्योरा दर्ज था, उसे दीमक खा चुके हैं। रिकॉर्ड नष्ट होने के कारण पुरातत्व विभाग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी दावेदारी के लिए पुख्ता कानूनी प्रमाण पेश नहीं कर पा रहा है जिससे मूर्ति की वापसी लटक गई है।
पुरखौती मुक्तांगन की जमीनें दूसरे विभागों को बांटने और शोध कार्य ठप होने का आरोप
विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन की नजर में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक परंपराएं और साक्ष्य पूरी तरह महत्वहीन हो चुके हैं। पुरखौती मुक्तांगन की वह जमीन जहां एक भव्य खुला मानव संग्रहालय विकसित किया जाना था, उसे अन्य व्यावसायिक व प्रशासनिक कार्यों के लिए आवंटित किया जा रहा है। वर्तमान में पूरे प्रदेश के भीतर केवल एक ही स्थान पर पुरातात्विक खुदाई का काम चल रहा है, जबकि दर्जनों ऐतिहासिक साइट्स उपेक्षा के कारण जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। पिछले 26 वर्षों में इतिहास पर कोई उल्लेखनीय शोध भी नहीं हुआ है।
मल्हार और सरगुजा के रामगढ़ में भी प्राचीन नाट्यशाला की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
चर्चा में भाग लेते हुए विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि ताला, मल्हार और भोरमदेव जैसे प्रमुख ऐतिहासिक केंद्रों पर एक भी सर्वसुविधायुक्त स्थानीय संग्रहालय नहीं है जिससे वहां बिखरी प्राचीन संपदाएं नष्ट हो रही हैं। वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने भी सुरगुजा के रामगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्थित विश्व की सबसे प्राचीन नाट्यशाला भी आज उचित संरक्षण के अभाव में असुरक्षित है। इन तमाम नेताओं ने सरकार से ऐतिहासिक धरोहरों को कबाड़ की तरह छोड़ने की बजाय उनके पुनरुद्धार की मांग की।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल का जवाब, मध्यप्रदेश से लाए जा रहे लाखों डिजिटल दस्तावेज
इन सभी तीखे आरोपों पर बिंदुवार जवाब देते हुए संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के साथ मिलकर निरंतर संरक्षण कार्य कर रही है। भोरमदेव मंदिर के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने बताया कि घासीदास संग्रहालय में रजिस्टर नष्ट होने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। साथ ही नया अभिलेखागार बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है, जिसके तहत अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर के लाखों ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर छत्तीसगढ़ वापस लाया जा रहा है।



