
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम बरबसपुर में नई शराब दुकान खोलने का प्रस्ताव अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद में बदल गया है। स्थानीय ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बीच पहुंचे पूर्व कांग्रेस मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आबकारी अधिकारी को फोन पर जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने अधिकारी को चेतावनी देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि गांव में शराब दुकान खोलने का प्रयास किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
आबकारी अधिकारी से फोन पर तीखी बातचीत
निरीक्षण की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने धरने की शुरुआत कर दी। रविवार को ग्रामीणों के बुलावे पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर धरना स्थल पर पहुंचे। जयसिंह अग्रवाल ने मौके से ही आबकारी अधिकारी राकेश राठौर को फोन लगाया और कड़े लहजे में कहा कि किसी विधायक का भाई होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं भूखी-प्यासी बैठी हैं, इसलिए अधिकारी स्वयं आकर लिखित में घोषणा करें कि बरबसपुर में कोई शराब दुकान नहीं खुलेगी।
जयसिंह अग्रवाल के तीखे बोल और आरोप
बातचीत के दौरान पूर्व मंत्री ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानों में ओवररेट वसूली, नकली शराब और अवैध बिक्री की छूट दी जा रही है। उन्होंने अधिकारी से कहा कि बेवजह ग्रामीणों पर दबाव बनाने की कोशिश न की जाए, वरना उत्पन्न होने वाली स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भवन मालिक ने शराब दुकान के लिए जगह देने से किया इनकार
ग्राम बरबसपुर में जिस मकान को शराब दुकान के लिए चयनित करने की चर्चा चल रही थी, उसके मालिक ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मकान मालिक ने स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हुए अपनी इमारत आबकारी विभाग को सौंपने से मना कर दिया है। इससे विभाग के सामने दुकान संचालन के लिए स्थान जुटाने की नई चुनौती खड़ी हो गई है।
आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन की प्रतिक्रिया
विवाद बढ़ता देख राज्य के वाणिज्य एवं आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने अपना रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम केवल संभावित स्थानों का जायजा लेने गई थी और वहां दुकान खोलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आबकारी मंत्री ने आश्वस्त किया कि यदि क्षेत्र की महिलाएं और स्थानीय ग्रामीण दुकान का विरोध करेंगे, तो वहां किसी भी सूरत में शराब दुकान नहीं खोली जाएगी।



