
Dhamtari News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आत्महत्या के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत मकेश्वर वार्ड से एक और दुखद घटना सामने आई। यहां रहने वाले मिलन साहू नामक व्यक्ति ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवन लीला समाप्त कर ली। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और फिर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया।
शराब की लत और पत्नी के अलग होने से थे परेशान
Dhamtari Milan Sahu Case: स्थानीय लोगों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार मिलन साहू लंबे समय से अत्यधिक शराब पीने का आदी था। उसकी इस लत के कारण घर में आए दिन विवाद होता रहता था। करीब तीन साल पहले पति की इस आदत से परेशान होकर उसकी पत्नी उसे छोड़कर अपने मायके चली गई थी। पत्नी के चले जाने के बाद से मिलन घर में अकेले रह रहे थे और लगातार मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।
अकेलेपन के कारण बढ़ता गया तनाव
पत्नी के मायके जाने के बाद मिलन साहू का अकेलापन और बढ़ गया। समय के साथ उनकी शराब पीने की लत कम होने के बजाय और अधिक गंभीर होती चली गई। परिजनों का कहना है कि घर में अकेले रहने और पारिवारिक तनाव के चलते वे अक्सर उदास रहते थे। आखिरकार इसी अवसाद और अकेलेपन से तंग आकर उन्होंने अपने ही कमरे में फांसी का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी।
कोतवाली पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
घटना की जानकारी मिलते ही मकेश्वर वार्ड के लोग मौके पर एकत्र हो गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी। कोतवाली थाना पुलिस की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक दृष्ट्या यह मामला पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या का प्रतीत होता है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
धमतरी जिले में तेजी से बढ़ रहे खुदकुशी के मामले
धमतरी में लगातार हो रही खुदकुशी की घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों के भीतर ही जिले में 174 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इन मामलों की समीक्षा करने पर पारिवारिक विवाद, आर्थिक तंगी, प्रेम संबंध में असफलता और अत्यधिक मानसिक तनाव मुख्य कारण के रूप में सामने आए हैं।
नशा और मानसिक तनाव रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह
इन घटनाओं के विश्लेषण में यह बात भी साफ हुई है कि नशे की लत व्यक्तियों के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। नशा सोचने-समझने की शक्ति कम कर देता है, जिससे लोग आवेग में आकर जानलेवा कदम उठा लेते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परिवार में कोई सदस्य लंबे समय से गुमसुम है या नशे की गिरफ्त में है, तो उससे बातचीत करें और समय रहते चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक परामर्श दिलाएं।



