
DJ New Rules: तेज आवाज में बजने वाले डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों से होने वाले शोर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। स्वतः संज्ञान ली गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने साफ कहा कि आने वाला समय त्योहारों का है, इसलिए इस दौरान डीजे और तेज आवाज वाले उपकरणों पर कड़ी निगरानी रखनी होगी। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि ध्वनि प्रदूषण पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में बड़े और कड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
कोलाहल नियंत्रण कानून में होगा बड़ा बदलाव
राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण से निपटने के लिए साल 1985 के पुराने कानून को बदलना बेहद जरूरी हो गया था। गृह विभाग द्वारा गठित ड्राफ्ट कमेटी ने हाल ही में मई और जून के महीनों में लगातार बैठकें आयोजित की हैं। इन बैठकों में प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न पक्षों से मिले सुझावों पर विचार किया गया। प्रस्तावित कानून की धारा-दर-धारा बारीकी से समीक्षा की गई है और अब नए संशोधन का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में पेश होगा संशोधन विधेयक
सरकार की योजना के मुताबिक ड्राफ्ट कमेटी से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस प्रस्ताव को राज्य की मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट की मोहर लगने के बाद इस संशोधन विधेयक को छत्तीसगढ़ विधानसभा में विचार और पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद यह संशोधित नियम पूरे प्रदेश में कानून के रूप में लागू हो जाएगा। हाईकोर्ट ने शासन से इस प्रक्रिया की ताजा प्रगति रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
500 रुपये का जुर्माना देकर बच निकलते थे आरोपी, अब बनेगा कड़ा कानून
अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखते हुए वकीलों ने बताया कि वर्तमान में लागू कानून बेहद लचर है। नियम तोड़ने वाले डीजे संचालकों पर महज 500 से 1000 रुपये तक का नाममात्र जुर्माना लगाकर मामला खत्म कर दिया जाता है। सख्त कानूनी प्रावधान न होने की वजह से न तो साउंड सिस्टम जब्त किए जाते हैं और ना ही कोई बड़ी कार्रवाई होती है। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर लोग लगातार तेज आवाज में डीजे बजाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं।
त्योहारों से पहले सख्त कार्रवाई की तैयारी, हाईकोर्ट रखेगा नजर
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि आगामी त्योहारों के सीजन में आम जनता को तेज आवाज के शोर से राहत मिलनी चाहिए। पुराने कानून में जब्ती और भारी जुर्माने के प्रावधान शामिल न होने से जमीनी स्तर पर इसका असर नहीं दिख रहा था। अब नए कानून में कड़े दंडात्मक प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है ताकि नियम तोड़ने वालों के उपकरण तुरंत जब्त किए जा सकें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह कानून बनने की इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखेगी।



