
Property Tax Gram Panchaya Order Controversy: छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर लागू करने के प्रशासनिक आदेश से राजनीतिक विवाद गरमा गया है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की जनपद पंचायत भरतपुर ने क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों को अपने-अपने इलाकों में हर कर योग्य परिवार से सालाना 1200 रुपये यानी 100 रुपये प्रतिमाह की दर से भवन-मकान कर वसूलने का निर्देश जारी किया है। इस नए आदेश के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
जनपद पंचायत भरतपुर ने सचिवों को दिया कड़ा निर्देश
जनपद पंचायत भरतपुर द्वारा जारी किए गए अंतिम स्मरण पत्र में सभी ग्राम पंचायत सचिवों को प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है। आदेश में उल्लेख है कि 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ‘समर्थ पंचायत पोर्टल’ और ‘ग्राम संपदा ऐप’ में संपत्ति कर का डेटा 24 घंटे के भीतर दर्ज किया जाए। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों के राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है।

राशन कार्डधारी परिवारों को आधार बनाकर तय होगा टैक्स
जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार गांव के राशन कार्डधारी परिवारों को आधार मानकर कर योग्य परिवारों की पहचान की जाएगी। इसके बाद प्रत्येक पात्र परिवार पर न्यूनतम 1200 रुपये का वार्षिक कर लगाया जाना तय हुआ है। इस प्रक्रिया के तहत करदाता की प्रोफाइल बनाना, संपत्ति पंजी में एंट्री करना, संपत्ति को मालिक से लिंक करना और कर की मांग सूची तैयार करने का काम पंचायतों को सौंपा गया है।
काम में लापरवाही पर सचिवों का वेतन रोकने की चेतावनी
बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी काम में सुस्ती बरतने वाली ग्राम पंचायतों को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। जिला पंचायत सीईओ के निर्देशों का हवाला देते हुए जनपद पंचायत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते काम पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित ग्राम पंचायत सचिव का वेतन आहरण रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
टीएस सिंहदेव का हमला: जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ
ग्राम पंचायतों में संपत्ति कर लगाने के फैसले पर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रही ग्रामीण जनता पर प्रशासनिक आदेशों के जरिए एक और टैक्स लाद दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही जनता को राहत देने का तरीका है। सिंहदेव ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस कर आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और पीएम गारंटी पर घेरा
पूर्व डिप्टी सीएम ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या यह 16वें वित्त आयोग के अनिवार्य निर्देश हैं या सरकार की अपनी नीति है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच इस तरह का नया टैक्स लगाना अनुचित है। विपक्ष का कहना है कि गांवों के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर इस कर का सबसे ज्यादा विपरीत असर पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में टैक्स लागू होने से उपजा असंतोष
आदेश जारी होने के बाद से ही भरतपुर क्षेत्र सहित प्रदेश के अन्य ग्रामीण हिस्सों में भी इस टैक्स को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीणों का मानना है कि शहरी निकायों की तर्ज पर गांवों में टैक्स लागू करने से पहले बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीति तेज होने के कारण आने वाले दिनों में सरकार पर इस फैसले की समीक्षा करने का दबाव बढ़ सकता है।



