
Megha Mahanadi Flood Girl Missing: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित गंगरेल बांध के सभी गेट खोले जाने के बाद महानदी पूरे उफान पर है। इसी दौरान मगरलोड थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत मेघा में बाढ़ का पानी देखने गई 13 वर्षीय छात्रा कु. तराना (तनु) निषाद पेट्रोल पंप के पास उफनती नाली के तेज बहाव में बह गई। प्राथमिक शाला मेघा में कक्षा 7वीं की छात्रा तराना पिता उदय (छोटू) निषाद और मां रानी निषाद की बेटी है। घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई पता नहीं चल सका है, जिससे पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है।

26 सितंबर की सुबह हुआ हादसा, पुलिस के देरी से पहुंचने का आरोप
यह हादसा 26 सितंबर की सुबह लगभग 8:30 बजे हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित संवेदनशील इलाका होने के बावजूद मौके पर पुलिस का कोई जवान तैनात नहीं था। घटना के 1 घंटे बाद पुलिस टीम पहुंची और लगभग 2 घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। शाम ढलते ही रेस्क्यू टीम वापस लौट गई और रात में 2 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी नदी जाने के रास्ते में लगाई गई। अगले दिन मगरलोड थाना प्रभारी के नेतृत्व में नाली के चेंबर खोलकर और महानदी के मुहाने तक दोबारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तीसरे दिन भी टीम के हाथ निराशा ही लगी।

PWD की ढकी नाली में पेट्रोल पंप के सामने खुले मिले दो चेंबर
सेन्हाभाठा राइस मिल से मेघा महानदी तक लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाई गई सड़क के दोनों ओर पक्की नाली का निर्माण कराया गया है। नियमानुसार पूरी नाली को सीमेंट के चेंबर से ढका गया है। ऐसे में मातारानी पेट्रोल पंप के ठीक सामने नाली के 2 चेंबर खुले होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेट्रोल पंप प्रबंधन ने अपनी सुविधा के लिए चेंबर हटाए है और बाद में उन्हें वापस नहीं ढका। जबकि ग्रामीणों का कहना है की उस खुले चेंबर में कई गाड़ियों के भी चक्के धंसे की घटना पहले भी हो चुकी है जिसके बाद भी उसे नहीं ढका गया हैं। महानदी के बाढ़ आने पर उफनते पानी में खुले चेंबर न दिखने के कारण बच्ची का पैर फिसला और वह अंदर चली गई।

सोरिद हादसे से तुलना कर ग्रामीणों ने बोला प्रशासनिक भेदभाव का हमला
घटना के बाद से आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासनिक ढिलाई पर फूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि मेघा की घटना के अगले दिन धमतरी के सोरिद में एक 7 साल का बच्चा नाली में गिरा था, जहां प्रशासन ने दिन-रात 24 घंटे लगातार सर्च ऑपरेशन चलाकर शव बरामद कर लिया। वहीं दूसरी ओर ग्राम मेघा में 3 दिन बीत जाने के बावजूद रोजाना केवल 6-7 घंटे का ही औपचारिक अभियान चलाया जा रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि सोरिद जैसी तत्परता मेघा की मासूम को ढूंढने में क्यों नहीं दिखाई जा रही है।

रो-रोकर बेहाल हुआ मासूम का परिवार
हादसे के 3 दिन बाद भी बेटी की कोई खबर न मिलने से तराना के माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि रेस्क्यू टीम की संख्या बढ़ाकर 24 घंटे का निरंतर अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही खुले चेंबर की लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को तत्काल उचित आर्थिक सहायता राशि देने की बात कही जा है।

सर्च ऑपरेशन तेज करने और जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक बच्ची का सुराग नहीं मिल जाता, रेस्क्यू टीम को नाली और महानदी के तटीय इलाकों में अपनी खोजबीन जारी रखनी चाहिए। इसके अलावा PWD विभाग और पेट्रोल पंप प्रबंधन की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से किसी अन्य मासूम की जान जोखिम में न पड़े।



