
Raipur Blue Water Banned: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे नवा रायपुर क्षेत्र की बहुचर्चित ‘ब्लू WATER’ खदान में लगातार हो रहे जानलेवा हादसों पर राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। खदान में डूबने से अब तक 10 लोगों की जान जाने के बाद सरकार ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। प्रदेश के आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने घोषणा की है कि आम लोगों को खदान के खतरनाक पानी तक पहुंचने से रोकने के लिए इसके चारों ओर मजबूत फेंसिंग (तारों की बाड़) कराई जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी नागरिक यहां पहुंचकर अपनी जान जोखिम में न डाले।

वर्ष 2017 से 2026 तक गई 10 लोगों की जान, खदान का खौफनाक रिकॉर्ड
Blue Water Khadan Death List: नवा रायपुर की इस खदान में हादसों का सिलसिला काफी पुराना है। वर्ष 2017 से अब तक खदान के गहरे पानी में डूबने से कुल 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस खतरनाक स्थल पर हादसों का सिलसिला 2017 में सुनैना (17 वर्ष) और मई 2019 में मोहन बाघ (17 वर्ष) की डूबने से हुई मौत के साथ शुरू हुआ था। इसके बाद मार्च 2023 में 2 युवकों और जून 2023 में नदीम, फैजल व शहबाज की जान चली गई। हादसों का दौर यहीं नहीं थमा; अक्टूबर 2025 में स्कूल बंक करके नहाने पहुंचे दो छात्र जयेश साहू और मृदुल भी गहरे पानी की चपेट में आ गए। वहीं, अगस्त 2026 में मौदहापारा निवासी आदिल खान (24 वर्ष) की दोस्तों के साथ तैरकर खदान पार करने की शर्त के दौरान डूबने से मौत हो गई, जिससे इस स्थल पर जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 10 पहुंच गया है।
आदिल खान के डूबने से फिर मचा हड़कंप, शर्त लगाकर पानी में उतरा था युवक
Raipur Adil Khan Case: हाल ही में मौदहापारा निवासी 24 वर्षीय आदिल खान की डूबने की घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। आदिल अपने दोस्तों के साथ घूमने ब्लू वाटर खदान पहुंचा था। वहां दोस्तों के बीच खदान को तैरकर पार करने की शर्त लगी। शर्त जीतने की होड़ में आदिल गहरे पानी में उतर गया और देखते ही देखते लापता हो गया। इस घटना के बाद से ही राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और NDRF की टीमें लगातार खदान के पानी में तलाशी अभियान चला रही हैं।

400 फीट गहरी है खदान, 60 फीट से नीचे जाने में गोताखोरों के छूट रहे पसीने
तलाशी अभियान में जुटी टीमों के सामने खदान की अत्यधिक गहराई सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बताया जा रहा है कि इस खदान की कुल गहराई लगभग 400 फीट तक है, जबकि बचाव दल के गोताखोर केवल 60 फीट की गहराई तक ही नीचे उतर पा रहे हैं। पानी के निचले हिस्से में दृश्यता बेहद कम होने और अत्यधिक गहराई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी खतरे को देखते हुए बाहरी विशेषज्ञ टीमों की मदद भी ली जा रही है।
नीले पानी का आकर्षण खींचता है पर्यटकों को, गहराई बनती है जानलेवा
बारिश के मौसम में इस खदान में जमा पानी का रंग बेहद साफ और नीला दिखाई देता है। यही सुंदरता युवाओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। दूर-दराज से लोग यहां रील्स बनाने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं। हालांकि, ऊपरी तौर पर शांत दिखने वाला यह पानी अंदर से अत्यधिक गहरा और असमान बनावट वाला है। पानी की गहराई का सही अंदाजा न होने के कारण लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

बाहर से बुलाई गई सुरक्षा टीम, क्षेत्र को सील करने की तैयारी तेज
आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने बताया कि खदान क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए विशेष टीम मौके पर भेजी गई है। सरकार का उद्देश्य इस पूरे इलाके को सील करना है ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति प्रवेश न कर सके। फेंसिंग के साथ-साथ जगह-जगह चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएंगे और पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी। प्रशासन का यह कदम भविष्य में होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो सकता है।



