Jantar Mantar Reservation Protest: जंतर-मंतर पर भारी बवाल, आरक्षण नियमों और UGC गाइडलाइन्स के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, जानें क्या है यह आंदोलन

Jantar Mantar Reservation Protest: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बन गया है। शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के स्थगित किए जा चुके इक्विटी नियमों और देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पिछले 45 दिनों से शांतिपूर्ण विरोध जता रहे प्रदर्शनकारियों के साथ नए संगठनों के जुड़ने से आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। हाथ में पोस्टर, बैनर और झंडे लिए लोगों ने नारेबाजी करते हुए मौजूदा आरक्षण नीतियों की व्यापक समीक्षा करने की पुरजोर मांग रखी।

जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त, आरएएफ और आईटीबीपी के जवान तैनात

Creamy Layer SC ST Act UGC Row: प्रदर्शन के बड़े पैमाने को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। जंतर-मंतर और आसपास के सभी रास्तों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ राष्ट्रीय राइफल्स, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और आईटीबीपी (ITBP) की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात किया गया था। शुरुआत में अनुमति को लेकर आयोजकों और पुलिस के बीच कुछ असमंजस रहा, लेकिन बाद में कड़े निर्देशों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दे दी गई।

जाति की जगह आर्थिक स्थिति बने सहायता का आधार, जरूरतमंदों तक पहुंचे लाभ

Delhi Jantar Mantar UGC Protest: आंदोलन में शामिल लोगों का मुख्य तर्क था कि सरकारी सहायता और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति के आधार पर तय होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश में किसी भी जाति का गरीब व्यक्ति हो, उसे मुफ्त शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, छात्रवृत्ति और फीस में राहत जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वास्तविक रूप से पिछड़े और साधनहीन लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।

SC/ST एक्ट के दुरुपयोग पर रोक और क्रीमी लेयर लागू करने की उठी मांग

प्रदर्शन के दौरान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के प्रावधानों पर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस कानून का गलत इस्तेमाल रोककर निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के भीतर भी ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत लागू करने की मांग उठी, ताकि इन समुदायों के भीतर जो लोग पहले से सशक्त हो चुके हैं, उनके बजाय सबसे निचले पायदान पर खड़े वंचितों को प्राथमिकता मिल सके।

यूजीसी के इक्विटी नियमों पर जताया विरोध, छात्रों के बीच भेदभाव बढ़ाने का लगाया आरोप

प्रदर्शन में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इक्विटी नियमों को लेकर भी तीखा आक्रोश देखने को मिला। भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय सचिव सुधीर चौहान ने कहा कि यूजीसी के नए दिशा-निर्देश पूरी तरह से निरस्त होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के नियम विद्यार्थियों के बीच आपसी सद्भाव बिगाड़ने और भेदभाव की भावना को बढ़ावा देने का काम करते हैं। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रतिनिधियों ने भी शिक्षा व्यवस्था में आर्थिक आधार को प्राथमिक मापदंड बनाने पर जोर दिया।

प्रदर्शन के दौरान हुआ हनुमान चालीसा का पाठ, शांतिपूर्ण रहा पूरा आंदोलन

आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक और धार्मिक रंग भी देखने को मिला। मंच के पास कई प्रदर्शनकारियों ने एक साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के नारे लगाए। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी जायज मांगें पहुंचाना है। पुलिस की निगरानी में शाम तक चला यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा, हालांकि प्रदर्शनकारियों ने मांगें न माने जाने पर आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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