
Kondagaon Runners In Ladakh: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के दो सीनियर धावक संतोष साहू और ज्वाला प्रसाद शर्मा अपनी बढ़ती उम्र को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर नया कीर्तिमान रचने की तैयारी में हैं। 58 वर्षीय संतोष साहू और 70 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ज्वाला प्रसाद शर्मा इससे पहले भी कई राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में पदक जीत चुके हैं। अब यह जोड़ी दुनिया की सबसे मुश्किल मानी जाने वाली लद्दाख मैराथन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेगी। पेशे से मैकेनिक संतोष साहू को क्षेत्र में लोग संतु नाम से जानते हैं। उन्होंने हाल ही में अंडमान में आयोजित 10 किलोमीटर की मैराथन में नंगे पैर दौड़कर पहला स्थान हासिल किया था।
दुनिया की सबसे ऊंची और कठिन दौड़
Inspirational News CG: लद्दाख मैराथन की गिनती दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण मैराथन स्पर्धाओं में होती है। यह दौड़ लेह शहर के आसपास समुद्र तल से 11,500 फीट से भी अधिक की ऊंचाई पर आयोजित की जाती है। पहाड़ी रास्तों, अप्रत्याशित मौसम और हवा में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होने की वजह से यहां साधारण चाल चलना भी मुश्किल होता है। ऐसे वातावरण में 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन पूरी करने के लिए धावकों को असाधारण शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की आवश्यकता होती है।
11500 फीट की ऊंचाई पर 42 किमी की चुनौती
Chhattisgarh Senior Runners: संतोष साहू और ज्वाला प्रसाद शर्मा 11,500 फीट की ऊंचाई पर 42.195 किलोमीटर की पथरीली चढ़ाई पर दौड़ लगाएंगे। इतनी ऊंचाई पर शरीर को ढालना बेहद मुश्किल काम होता है। संतोष साहू ने बताया कि उनकी 42 किमी की फुल मैराथन 13 सितंबर को निर्धारित है। इसके लिए वे 4 सितंबर को ही कोंडागांव से लद्दाख के लिए रवाना हो जाएंगे। वहां लगभग एक हफ्ते तक रहकर अपने शरीर को स्थानीय जलवायु और कम ऑक्सीजन वाले माहौल के अनुकूल ढालेंगे।
युवाओं को नशा छोड़ने का संदेश
Ladakh Marathon 2026: जब संतोष साहू से इस उम्र में इतनी कठिन दौड़ में हिस्सा लेने का कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसी उम्र में तो खुद को साबित करना है। वे युवाओं को नशे की आदतों से दूर रहने और दैनिक जीवन में कम से कम एक किलोमीटर दौड़ने का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि जैसे गाड़ी के इंजन को चालू रखना पड़ता है, वैसे ही शरीर का इंजन भी रोज चलाना जरूरी है। वे कहते हैं कि साथ दौड़ने वाला एक दोस्त सौ डॉक्टरों से बेहतर होता है।
जुनून के आगे फीकी पड़ी उम्र की बाधा
70 वर्षीय ज्वाला प्रसाद शर्मा और संतोष साहू का यह प्रयास न केवल कोंडागांव बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। दोनों धावकों का स्पष्ट मानना है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो उम्र कभी भी किसी लक्ष्य में रुकावट नहीं बन सकती। अपने मजबूत हौसले के दम पर वे लद्दाख की कठिन वादियों में भी 42 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर युवाओं के सामने एक अनूठी मिसाल कायम करने जा रहे हैं।



