CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की 10 बड़ी खबरें स्कूली किताबों की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल छात्रों का खैरागढ़-धमधा मार्ग पर जोरदार चक्काजाम सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव की एसएलपी खारिज की ड्रॉपआउट बच्चों की डिजिटल ट्रैकिंग 1 लाख मीट्रिक टन धान गायब और 250 करोड़ का हिसाब अटका रायपुर ड्रग्स केस में एक साल बाद खुली पुलिस की नींद 1600 रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर कवर्धा में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी रक्षाबंधन से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा अभियान छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉलेजों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल समेत पढ़ें छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें…

CG Top 10 News Today: छत्तीसगढ़ की सभी बड़ी और छोटी खबरें रोजाना हमारी नजर में रहती हैं। दक्षिण कोसल के विशेष सेगमेंट ‘CG की 10 बड़ी खबरें’ में हम आपको समाचार जगत की हर गतिविधि का अपडेट सरल और सहज भाषा में प्रदान करेंगे। तो आइए, पत्रकारिता की इस दुनिया में बने रहें और छत्तीसगढ़ की हर ताजातरीन खबर से अपनी जानकारी को और विस्तृत करे

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स्कूली किताबों की गुणवत्ता पर उठे सवाल, 18 लाख में से 3 लाख किताबें निकलीं खराब

Education News: छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर गुणवत्ता संकट के घेरे में आ गई है, क्योंकि हाल ही में स्कूलों तक पहुंचाई गई करीब 18 लाख पाठ्यपुस्तकों में से 3 लाख से अधिक किताबें पढ़ने लायक नहीं पाई गई हैं। यह मामला तब सामने आया जब नए शिक्षा सत्र के दौरान सरकारी और निजी स्कूलों में भेजी गई किताबों की भौतिक जांच और स्कैनिंग की गई। रायपुर जिले सहित प्रदेशभर के कई स्कूलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि इन पुस्तकों के पन्ने फटे हुए हैं, छपाई धुंधली है, बाइंडिंग बेहद कमजोर है और कई जगहों पर तो पूरे के पूरे अध्याय ही गायब हैं। इस बड़ी लापरवाही के कारण छात्रों की बुनियादी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, खासकर तब जब सत्र के कई महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य विषयों की किताबें बच्चों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अकेले रायपुर जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में बड़ी संख्या में क्षतिग्रस्त किताबें दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 1.93 लाख और 40 हजार किताबें शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए करीब 220 स्कूलों ने आधिकारिक तौर पर विभाग को रिपोर्ट भेजकर नई किताबों की मांग उठाई है। इस पूरे मामले ने पाठ्यपुस्तक निगम और प्रिंटिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर बिना जांच के इतनी बड़ी संख्या में खराब किताबें बच्चों तक कैसे पहुंच गईं। अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त पुस्तकों को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन विलंब के कारण छात्रों की पढ़ाई को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

दुर्ग के आत्मानंद स्कूल में 400 छात्रों पर सिर्फ 3 शिक्षक, छात्रों का जोरदार चक्काजाम

Protest News: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र के पेंड्रावन स्थित आत्मानंद स्कूल के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की भारी कमी से त्रस्त होकर पांच दिन के भीतर दूसरी बार खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। छात्रों का मुख्य आरोप है कि स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक पढ़ने वाले लगभग 400 विद्यार्थियों के शिक्षण कार्य के लिए केवल 3 शिक्षक और 1 प्रिंसिपल तैनात हैं, जबकि नियमानुसार संस्थान में कम से कम 17 शिक्षकों की सख्त आवश्यकता है। इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही के कारण बच्चों का पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। पूर्व में 21 अगस्त को पहला प्रदर्शन करने के बाद भी जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो नाराज विद्यार्थियों ने बारिश के बीच सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। आंदोलन के दौरान जब पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों से बात करने की कोशिश की, तो छात्रों ने दो टूक कह दिया कि वे केवल जिला कलेक्टर या प्रदेश के शिक्षा मंत्री से ही सीधी चर्चा करेंगे। बच्चों ने यह भी मांग उठाई कि स्कूल के मौजूदा शिक्षकों को ओपन स्कूल के कार्यों में भेजने की प्रथा पर तुरंत रोक लगाई जाए, क्योंकि इससे उनकी नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं। यह प्रदर्शन इसलिए भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला है। फिलहाल छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और प्रशासन की तरफ से उठाए जाने वाले अगले ठोस कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके।

भिलाई नगर विधानसभा चुनाव विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की देवेंद्र यादव की एसएलपी

Politics: भिलाई नगर विधानसभा चुनाव के बहुचर्चित परिणाम विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को एक बड़ा झटका देते हुए उनकी विशेष अनुमति याचिका यानी एसएलपी को सिरे से खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भाजपा नेता और पूर्व मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से दायर निर्वाचन याचिका पर नियमित ट्रायल की प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी। यह पूरा कानूनी विवाद साल 2024 में शुरू हुआ था जब प्रेम प्रकाश पांडेय ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि देवेंद्र यादव ने अपने नामांकन पत्र और शपथ पत्र में जरूरी जानकारियों को छिपाया था और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए चुनाव में भ्रष्ट आचरण का सहारा लिया था, जिसके आधार पर उनका निर्वाचन रद्द किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान विधायक देवेंद्र यादव की ओर से हाईकोर्ट में आवेदन देकर कुछ शुरुआती कानूनी बिंदुओं और धाराओं पर पहले फैसला लेने की मांग की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इन मामलों में तथ्यों की गहरी जांच जरूरी है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए देवेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने भी हाईकोर्ट के आदेश में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। इस न्यायिक निर्णय के परिणामस्वरूप अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दोनों पक्षों के बीच गवाहों और सबूतों के आधार पर सामान्य ट्रायल चलेगा, जो यह तय करेगा कि भिलाई नगर का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

ड्रॉपआउट बच्चों की डिजिटल ट्रैकिंग के लिए छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ ‘लइका चिन्हारी’ ऐप

Government: छत्तीसगढ़ में स्कूल छोड़ चुके यानी ड्रॉपआउट बच्चों और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक अनूठी डिजिटल पहल के रूप में ‘लइका चिन्हारी’ मोबाइल ऐप की शुरुआत की है। राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा द्वारा तैयार किए गए इस विशेष ऐप के माध्यम से मैदानी स्तर पर घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा और बच्चों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि शिक्षा विभाग के पास हर एक बच्चे की वास्तविक स्थिति उपलब्ध हो सके। माध्यमिक स्तर पर राज्य में ड्रॉपआउट दर लगभग 13.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसे कम करने के लिए इस डिजिटल सर्वे अभियान को बेहद सुनियोजित तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय साक्षरता प्रेरकों और अतिथि शिक्षकों को मुख्य सर्वेकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ऐप पर रजिस्ट्रेशन से लेकर संकुल समन्वयकों द्वारा ऑनलाइन सत्यापन तक का कड़ा प्रावधान किया गया है। सर्वेकर्ता को प्रत्येक छात्र की सही जानकारी दर्ज करने पर शुरुआती प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, और जब उस बच्चे का दोबारा स्कूल में प्रवेश कराकर कम से कम तीन महीने तक उसकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, तब प्राचार्य के सत्यापन के बाद उसे 500 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से परीक्षा दिलाने पर भी वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान रखा गया है और सभी भुगतानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा जाएगा ताकि व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

खरीफ सीजन के धान मिलान में बड़ा अंतर, 1 लाख मीट्रिक टन धान गायब और 250 करोड़ का सवाल

Economy: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान हुई धान खरीदी के भौतिक सत्यापन और ऑनलाइन रिकॉर्ड के मिलान में लगभग 1.16 लाख मीट्रिक टन धान का भारी अंतर सामने आया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 250 करोड़ रुपये आंकी गई है। मार्कफेड और खाद्य विभाग के साझा आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में कुल 141 लाख मीट्रिक टन धान की समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड खरीदी की गई थी, लेकिन उपार्जन केंद्रों में 68 हजार और संग्रहण केंद्रों में लगभग 48 हजार मीट्रिक टन धान की कमी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि अधिकारी यह स्पष्ट करने में जुटे हैं कि इस अंतर में धान की प्राकृतिक सूखत, परिवहन के दौरान हुआ नुकसान और रिकॉर्ड रखरखाव की त्रुटियां भी शामिल हो सकती हैं, फिर भी इतनी बड़ी मात्रा में धान का हिसाब गड़बड़ाना गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। विभाग के नियमों के मुताबिक सभी उपार्जन और संग्रहण केंद्रों से धान का शत-प्रतिशत उठाव निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना था और भौतिक सत्यापन के दौरान पाई गई इस कमी की भरपाई संबंधित सहकारी समितियों के माध्यम से सुनिश्चित की जानी है। पिछले साल भी खरीफ सीजन 2024-25 के दौरान लगभग 1.57 लाख मीट्रिक टन धान की कमी सामने आई थी, जिसकी कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी, जिससे तुलना करने पर इस वर्ष का अंतर थोड़ा कम जरूर है लेकिन समस्या की पुनरावृत्ति ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। फिलहाल खाद्य विभाग और मार्कफेड के वरिष्ठ अधिकारी अंतिम लेखा मिलान करने और समितियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक गबन कितना है और प्रशासनिक खामियां कहां पर रहीं।

रायपुर ड्रग्स केस में एक साल बाद खुली पुलिस की नींद, 17 इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स फॉरेंसिक लैब भेजे

Crime Update: राजधानी रायपुर के बहुचर्चित हाई-प्रोफाइल ड्रग्स और रेव पार्टी मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि मुख्य आरोपियों से जुड़े 17 इलेक्ट्रॉनिक मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप लगभग एक साल तक थाने के मालखाने में धूल फांकते रहे और उनकी तकनीकी जांच नहीं कराई गई। इस मामले की मुख्य आरोपी नव्या मलिक और विधि अग्रवाल समेत अन्य तस्करों से जुड़े इन गैजेट्स में ड्रग्स सप्लाई के बड़े नेटवर्क, चैट और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम सुराग छिपे होने के बावजूद तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने समय पर इन्हें फॉरेंसिक लैब भेजने की जहमत नहीं उठाई। प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिस के सामने 325 से अधिक ऐसे प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए थे जो इन पार्टियों में शामिल होते थे, लेकिन इसके बावजूद केवल 11 लोगों पर औपचारिक कार्रवाई करके मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई। इस गंभीर लापरवाही और मामले को दबाने के संभावित साजिश के उजागर होने के बाद अब सेंट्रल रेंज के डीआईजी ताकेश्वर पटेल के निर्देश पर नव्या मलिक और विधि अग्रवाल के मोबाइल और अन्य डिवाइसेज को अंततः फॉरेंसिक साइंस लैब में जांच के लिए भेज दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग्स तस्करी जैसे ऑनलाइन संचालित होने वाले नेटवर्क में मोबाइल फोन और चैट्स सबसे बड़े डिजिटल सबूत होते हैं जिनकी समय पर जांच न होने से तस्करों को कानूनी लाभ मिलने का खतरा पैदा हो जाता है। अब फॉरेंसिक लैब से आने वाली वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि उन 325 से अधिक संभ्रांत लोगों की सूची में शामिल अन्य रसूखदारों की इस अवैध कारोबार में क्या भूमिका थी और क्या लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है या नहीं।

छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती: 1600 खाली पदों को भरने की मांग को लेकर कवर्धा में प्रदर्शन जारी

Employment: छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती 2023-24 प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद रिक्त रह गए लगभग 1600 पदों को तत्काल भरने और दूसरी चयन सूची जारी करने की मांग को लेकर प्रदेशभर के युवा अभ्यर्थी कवर्धा में डिप्टी सीएम विजय शर्मा के कार्यालय के सामने डटे हुए हैं। भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम की परवाह किए बिना बड़ी संख्या में पहुंचे युवक-युवतियों ने लगातार दूसरे दिन भी अपना आंदोलन जारी रखा है और नगाड़ा बजाकर सरकार का ध्यान अपनी लाचारी और मांगों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का तर्क है कि इस भर्ती में कुल 5967 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू हुई थी जिसमें से लगभग 4367 पदों पर ही नियुक्तियां हो पाई हैं, जबकि कई उम्मीदवारों के नाम एक से अधिक जिलों की सूची में आने के कारण करीब 1600 पद खाली रह गए हैं जिन्हें प्रतीक्षा सूची के माध्यम से भरा जाना पूरी तरह न्यायसंगत है। आंदोलन के उग्र होने पर पुलिस प्रशासन ने कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए कड़े बंदोबस्त किए हैं और कबीरधाम पुलिस अधीक्षक जितेंद्र यादव का कहना है कि यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस द्वारा पहले दिन कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की गई है, लेकिन इसके बावजूद अभ्यार्थियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं और वे बारिश के बीच सड़क पर ही भोजन कर अपने आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। युवाओं को पूरी उम्मीद है कि शासन स्तर पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा और दूसरी चयन सूची जारी करके उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाएगा, जिस पर पूरे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं।

निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी, दो साल में जारी हुए चार नोटिस

Education News: छत्तीसगढ़ के निजी विश्वविद्यालयों में संचालित तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारण मनमानी और प्रवेश प्रक्रियाओं में हो रही भारी अनियमितताओं को लेकर सरकार और नियामक आयोगों के बीच पत्राचार का दौर पिछले दो वर्षों से लगातार चल रहा है, लेकिन धरातल पर ठोस अनुपालन का अभाव बना हुआ है। सितंबर 2024 से लेकर अगस्त 2026 तक तकनीकी शिक्षा संचालनालय, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा एक के बाद एक चार कड़े निर्देश और नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि संस्थान अपने स्तर पर मनमाने तरीके से फीस तय नहीं कर सकते और उन्हें 2008 के अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करना होगा। इसके बावजूद कई संस्थान दोहरी व्यवस्था का लाभ उठाकर छात्रों और अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं और विनियामक समितियों के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं।

रक्षाबंधन से पहले खाद्य विभाग का कड़ा अभियान, मिठाइयों और मावे की गुणवत्ता की होगी जांच

Directives: हाल ही में तकनीकी शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी नए पत्रों में यह बात जोर देकर कही गई है कि बीई, बीटेक, एमबीए, एमसीए और फार्मेसी जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश केवल सीजी पीईटी, जेईई और अन्य निर्धारित राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाओं की वैध मेरिट सूची के आधार पर ही किए जाने चाहिए और नियमों के विपरीत दिए गए प्रवेश पूरी तरह अवैध या शून्य माने जाएंगे। इन तमाम चेतावनियों के बावजूद बार-बार नोटिस जारी करने की स्थिति यह बताती है कि निजी विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक शिकंजा कसने की प्रक्रिया अभी भी केवल कागजी पत्राचार तक ही सीमित है। यदि समय रहते इन नियमों का पालन सख्ती से नहीं कराया गया तो इसका सीधा खामियाजा प्रदेश के हजारों छात्रों को भुगतना पड़ेगा जिनकी डिग्रियों की मान्यता और भविष्य पर कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए छत्तीसगढ़ के महासमुंद और अन्य जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान चलाने की तैयारी कर ली है, जिसके तहत बाजारों में बिकने वाली मिठाइयों, मावे, खोआ और पैक्ड खाद्य उत्पादों के नमूने लिए जाएंगे। त्योहार के इस सीजन में दूध और उससे बनी मिठाइयों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर कई व्यापारी घटिया और मिलावटी सामग्री का खुलेआम धड़ल्ले से विक्रय करते हैं, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम मिष्ठान दुकानों और होटलों का औचक निरीक्षण कर सैंपल एकत्र करेगी और उन्हें प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली मिठाइयां पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुकूल हैं। हालांकि इस पूरी जांच प्रक्रिया को लेकर एक व्यावहारिक चुनौती भी सामने आ रही है क्योंकि प्रयोगशाला से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने में अमूमन 14 दिन यानी दो सप्ताह का लंबा समय लग जाता है, तब तक अधिकांश मिलावटी मिठाइयां बाजारों में बिककर लोगों के घरों तक पहुंच चुकी होती हैं। इसके बावजूद खाद्य विभाग का दावा है कि रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई नमूना अमानक या मिलावटी पाया जाता है तो संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा त्योहार के दिनों में अस्थायी दुकानों और काउंटरों के कारण सड़कों पर लगने वाले भारी जाम को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त करने का प्रयास कर रहा है ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉलेजों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 55 सहायक प्राध्यापकों को पदोन्नति

Government: छत्तीसगढ़ के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 55 सहायक प्राध्यापकों को सह प्राध्यापक के पद पर पदोन्नत करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस प्रमोशन के साथ-साथ कई डॉक्टरों की पदस्थापना में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत कुछ चिकित्सकों को उनके वर्तमान मेडिकल कॉलेज में ही बनाए रखा गया है जबकि कई अन्य को राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित नए मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया गया है ताकि प्रदेशभर के शिक्षण संस्थानों में फैकल्टी की कमी को संतुलित किया जा सके। उदाहरण के लिए फोरेंसिक विभाग के डॉ. भोज कुमार साहू को कोरबा में ही सह प्राध्यापक पद पर जिम्मेदारी दी गई है, जबकि डॉ. किशोर सिंह ठाकुर कांकेर मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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