
Raksha Bandhan Shubh Muhurat: साल 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। ज्योतिष पंचांग के अनुसार इस बार बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा के समाप्त होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साल 2022 के बाद यह पहला मौका है जब रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह से भद्रा के साए से मुक्त रहेगा। सनातन परंपरा में भाई और बहन के इस पवित्र रिश्ते के त्योहार को हमेशा भद्रा रहित शुभ काल में मनाने का विधान है।
जानिए पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति की समय सारणी: Raksha Bandhan Muhurat Timing
| तिथि विवरण | पंचांग अनुसार समय |
| पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ | 27 अगस्त 2026, सुबह 08:31 बजे |
| पूर्णिमा तिथि की समाप्ति | 28 अगस्त 2026, सुबह 09:18 बजे |
| भद्रा काल की अवधि | 27 अगस्त, सुबह 08:31 बजे से रात 08:54 बजे तक |
| सबसे उत्तम मुहूर्त | 28 अगस्त, सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | 28 अगस्त, सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक |
सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी भद्रा की छाया
Raksha Bandhan 2026 Guide: वाराणसी पंचांग की गणना के अनुसार श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 08 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी। इसके साथ ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा जो उसी दिन रात 08 बजकर 54 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। चूंकि भद्रा 28 अगस्त के सूर्योदय से काफी पहले ही खत्म हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त की उदया तिथि में बहनें बिना किसी विघ्न या संकोच के पूरा दिन अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी।
भद्रा काल में राखी बांधना क्यों माना जाता है वर्जित
धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को अत्यंत अशुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा के समय किया गया कोई भी शुभ कार्य फलदायी नहीं होता और उससे जीवन में कई बाधाएं आने लगती हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल के दौरान ही रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके कारण रावण के पूरे कुल का विनाश हो गया। इसी कारण भद्रा रहित काल में ही राखी बांधना श्रेष्ठ माना जाता है।
28 अगस्त को राखी बांधने के दो सबसे बड़े शुभ मुहूर्त
28 अगस्त को बहनों के लिए राखी बांधने का पहला और सबसे उत्तम समय सुबह 05 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। यदि कोई इस समय सीमा के भीतर राखी न बांध सके, तो वह दोपहर के समय मिलने वाले अभिजित मुहूर्त का उपयोग कर सकता है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जिसे सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
कलाई पर तीन गांठें लगाने का धार्मिक और पौराणिक महत्व
राखी बांधते समय भाई की कलाई पर तीन गांठें लगाने की परंपरा रही है। शास्त्रों में इन तीन गांठों को त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक माना गया है। पहली गांठ भाई की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए बांधी जाती है। दूसरी गांठ दोनों के बीच अटूट प्रेम और विश्वास को दर्शाती है, जबकि तीसरी गांठ भाई द्वारा बहन की जीवनभर रक्षा करने के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।
(नोट: इस लेख में दी गई जानकारियां सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। विशेष जानकारी या व्यक्तिगत शंकाओं के समाधान के लिए संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।)



