
Pasahar Rice Price Hike: छत्तीसगढ़ में हलषष्ठी यानी कमरछठ पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है। पूजा-पाठ की तैयारियों के बीच इस बार कमरछठ में इस्तेमाल होने वाले पसहर चावल के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। बाजार में यह चावल 200 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। सामान्य दिनों की तुलना में बाजार में इसकी आवक कम होने और मांग अचानक बढ़ने से कीमतों में तेजी आई है। इसके अलावा दूध, दही और घी के दामों में हुई बढ़ोतरी से भी इस बार व्रत का बजट बढ़ गया है।

2 सितंबर को मनाया जाएगा हलषष्ठी का पर्व
Kamarchhath Tihar 2026: इस वर्ष हलषष्ठी का पर्व 2 सितंबर को पूरे प्रदेश में परंपरागत रूप से मनाया जाएगा। माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा-अर्चना के दौरान पसहर चावल, छह तरह की भाजियों और अन्य विशेष सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। दिन भर के उपवास के बाद शाम को व्रत खोलते समय महिलाएं पसहर चावल से बने भोजन का ही सेवन करती हैं। इसी वजह से पर्व से ठीक पहले इसकी खरीदारी काफी बढ़ गई है।

खेती नहीं होती, खुद से उगती है पसहर चावल की फसल
Hal Shashti Puja Preparation: पसहर चावल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती। यह चावल तालाबों के किनारे, गीली जमीन या खाली पड़े खेतों में प्राकृतिक रूप से उगता है। इसकी फसल तैयार होने के बाद इसे इकट्ठा करने में काफी मेहनत लगती है। जयस्तंभ चौक पर पूजा सामग्री बेच रही महिलाओं का कहना है कि अब शहरों और गांवों में खाली जमीनों की कमी होती जा रही है। इस वजह से इसकी प्राकृतिक पैदावार हर साल घट रही है, जबकि मांग लगातार बनी हुई है।
पसहर चावल की सीमित आवक के कारण बढ़ीं कीमतें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पसहर चावल का उत्पादन कृत्रिम रूप से बढ़ाना संभव नहीं है। फसल का रकबा प्राकृतिक रूप से कम होने के कारण मंडियों तक सीमित मात्रा में ही चावल पहुंच पा रहा है। आवक कम होने और कमरछठ के मौके पर हर घर में इसकी जरूरत होने से विक्रेताओं को इसके दाम बढ़ाने पड़े हैं। दामों में आई तेजी की वजह से कई लोग अपनी जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में ही चावल की खरीदारी कर रहे हैं।

दूध, दही और घी के दामों में भी देखने को मिली बढ़ोतरी
कमरछठ पूजा की थाली में केवल पसहर चावल ही नहीं, बल्कि भैंस के दूध, दही, घी और महुआ पत्तों का भी विशेष महत्व होता है। इस बार केवल चावल ही नहीं, बल्कि डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फल, फूल और छह प्रकार की भाजियों के भाव भी सामान्य दिनों के मुकाबले चढ़े हुए हैं। इसके चलते इस साल पूजन सामग्री खरीदने में महिलाओं को पहले से अधिक जेब ढीली करनी पड़ रही है।
महंगाई के बाद भी बाजारों में बरकरार है पसहर चावल की मांग
कीमतों में आई इस तेजी का असर पर्व के उत्साह पर नहीं पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का पालन करने के लिए व्रती महिलाएं ऊंचे दामों पर भी पसहर चावल की खरीदारी कर रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि लोग भले ही 250 से 500 ग्राम ही चावल खरीद रहे हों, लेकिन खरीदारी करने वालों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है। महिलाएं परंपरा को निभाने के लिए बजट संतुलित करके पूजा की सभी जरूरी चीजें जुटा रही हैं।



