
Kurud College Result Row: पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से संबद्ध संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुरूद में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। यहां बीए चतुर्थ सेमेस्टर के छात्रों की जिस विषय की परीक्षा हुई ही नहीं, उसका परिणाम घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, मार्कशीट में छात्रों को गैरहाजिर दिखाते हुए एटीकेटी थमा दी गई है। इस गड़बड़ी के बाद से दर्जनों विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।

6 जुलाई को निर्धारित परीक्षा का नहीं आया था प्रश्नपत्र
विश्वविद्यालय द्वारा जारी मई-जून 2026 सेमेस्टर परीक्षा की समय-सारणी के अनुसार 6 जुलाई 2026 को बीए चतुर्थ सेमेस्टर के अर्थशास्त्र विषय के अंतर्गत डीएसई-मनी एंड बैंकिंग की परीक्षा होनी थी। निर्धारित तिथि पर छात्र केंद्र पहुंचे, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से प्रश्नपत्र भेजा ही नहीं गया। इसके बाद न तो उस दिन परीक्षा हुई और न ही आगे किसी नई तारीख पर यह पर्चा आयोजित कराया गया।

21 अगस्त को जारी परिणाम में बीकॉम का विषय किया गया प्रदर्शित
Pandit Ravishankar Shukla University: बिना परीक्षा आयोजित किए ही विश्वविद्यालय ने 21 अगस्त 2026 को परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया। जब छात्रों ने अपना रिजल्ट देखा तो वे हैरान रह गए। मार्कशीट में संबंधित विषय की जगह बीकॉम संकाय का विषय दर्शाया गया था। परीक्षा न होने के बावजूद विद्यार्थियों को अनुपस्थित दर्ज कर एटीकेटी दे दी गई, जबकि कला संकाय के छात्रों ने बीकॉम का कोई विषय चुना ही नहीं था।
पीड़ित छात्रों ने कुलपति से मिलकर सुनाई अपनी आपबीती
परिणाम में हुई इस बड़ी गड़बड़ी से परेशान छात्र सीधे पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने कुलपति और सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या रखी। छात्रों ने मांग की है कि डीएसई-मनी एंड बैंकिंग विषय की दोबारा परीक्षा लेकर संशोधित अंकसूची जारी की जाए। इसके साथ ही पांचवें सेमेस्टर में प्रवेश की अंतिम तिथि आगे बढ़ाई जाए ताकि उनका साल खराब न हो।
एनएसयूआई ने प्रवेश पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
एनएसयूआई विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष पुनेश्वर लहरे ने इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब पाठ्यक्रम गलत होने की बात कह रहा है। यदि सिलेबस में त्रुटि थी तो उसी विषय का एडमिट कार्ड क्यों जारी किया गया। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण अब अगले सत्र में छात्रों के प्रवेश पर संकट मंडरा रहा है।

चौथे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को पढ़ा दिया गया छठवें सेमेस्टर का पाठ्यक्रम
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कॉलेज के प्राध्यापकों ने चौथे सेमेस्टर की कक्षाओं में छठवें सेमेस्टर का पाठ्यक्रम पढ़ा दिया था। 6 जुलाई को जब परीक्षा का समय आया और पेपर नहीं पहुंचा, तब कॉलेज प्रबंधन को अपनी इस गलती का अहसास हुआ। उस समय अपनी नाकामी छिपाने के लिए कॉलेज प्रशासन ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि विश्वविद्यालय से प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं कराया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दिए जांच कमेटी गठित करने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार शैलेंद्र पटेल ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कराई जाएगी। इसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जा रहा है जो यह तय करेगी कि चूक किस स्तर पर हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही जांच पूरी कर विद्यार्थियों के हित में उचित कदम उठाया जाएगा।



