
Mahasamund Timber Smuggling: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी के अवैध परिवहन और फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) से जुड़े मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस टीम ने गिरफ्तार आरोपी मनीष अग्रवाल के मुड़पार सरसीवां स्थित निवास पर दबिश देकर सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान मकान के भीतर से 81 लाख रुपये की भारी-भरकम नगद राशि बरामद की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
मकान से बरामद हुए 81 लाख रुपये नगद
Mahasamund Timber Smuggling Case: जांच अधिकारी के नेतृत्व में पहुंची पुलिस टीम ने जब आरोपी के घर की तलाशी ली, तो कमरों में भारी मात्रा में नोटों के बंडल मिले। पुलिस ने मौके पर ही गिनती कराने के बाद पूरी 81 लाख रुपये की राशि को अपने कब्जे में ले लिया है। इस रकम को विधिवत जब्त कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा केवल लकड़ी तस्करी का है या इसके पीछे कोई और अवैध कारोबार शामिल है।

बीएनएसएस की धारा 107 के तहत होगी कुर्की की प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए महासमुंद पुलिस ने बरामद नकदी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के अंतर्गत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कानून अपराध के जरिए अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने और उसकी कुर्की करने से संबंधित है। पुलिस अब न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर इस पूरी रकम को शासन के पक्ष में कुर्क कराने की तैयारी कर रही है।
फर्जी NOC और लकड़ी परिवहन में पहले हुई थी गिरफ्तारी
खैर की कीमती लकड़ी के गैरकानूनी परिवहन और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कुछ दिन पहले ही हुआ था। पुलिस ने मामले की मुख्य कड़ी माने जाने वाले मनीष अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। रिमांड और पूछताछ के दौरान मिले अहम सुरागों के आधार पर ही पुलिस की टीम ने आरोपी के सरसीवां स्थित आवास पर छापेमारी की योजना बनाई थी।

अवैध कमाई के वित्तीय स्रोतों की पड़ताल में जुटी पुलिस
गहन तलाशी के दौरान इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद पुलिस ने इस पूरे अंतर्राज्यीय नेटवर्क की वित्तीय जांच तेज कर दी है। पुलिस की विशेष टीम अब यह खंगाल रही है कि 81 लाख रुपये की यह रकम कहां-कहां से भेजी गई थी और इसमें कौन-कौन से अन्य लोग भागीदार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के बैंक खातों और संपत्ति से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, जिससे इस गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुंचा जा सके।



