
Navratri 2026 Garba Rules: नवरात्र पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम समाज के लोगों से इस वर्ष गरबा आयोजनों से दूरी बनाए रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय समाज में शांति और परस्पर सौहार्द बनाए रखने की दिशा में एक विचारणीय कदम है।
गरबा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि धार्मिक परंपरा है
Waqf Board Statement:डॉ. सलीम राज ने स्पष्ट किया कि गरबा कोई साधारण सांस्कृतिक नृत्य या मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हिंदू धर्म की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ पवित्र आयोजन है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर अन्य समुदायों के लोग वहां केवल नृत्य में शामिल होने के उद्देश्य से जाते हैं, जबकि इस आयोजन का मुख्य आधार धार्मिक भावनाएं हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए।
आयोजकों की अनुमति और परंपरा का पालन अनिवार्य
Garba Entry Controversy: वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि कोई मुस्लिम भाई या बहन वेशभूषा और धार्मिक मान्यताओं का आदर करते हुए कार्यक्रम में शामिल होना चाहता है, तो उसे सबसे पहले आयोजक समिति से औपचारिक अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही उन्हें आयोजन स्थल पर प्रवेश करना चाहिए ताकि किसी प्रकार का विवाद न हो।
तिलक लगाने और गंगाजल ग्रहण करने की कही बात
डॉ. सलीम राज ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति समिति की स्वीकृति से गरबा में भाग लेता है, तो उसे आयोजन की मर्यादा का पूरी तरह पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को माथे पर तिलक लगाकर और गंगाजल ग्रहण करके ही पंडाल में प्रवेश करना चाहिए। इससे आयोजन की धार्मिक पवित्रता बनी रहेगी और स्थानीय लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।
समाज के लोगों से संयम बरतने का किया आग्रह
अंत में वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने समाज के युवाओं और नागरिकों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसे स्थान पर जाने से बचना चाहिए जहां आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हों और जिससे अनावश्यक तनाव उत्पन्न होने की आशंका बनी रहे। उन्होंने सभी नागरिकों से एक-दूसरे के पर्व और उत्सवों का सम्मान करते हुए सामाजिक भाईचारा बनाए रखने का आह्वान किया।



