
Ajay Chandrakar Statement Rahul Gandhi: झारखंड में सरकारी भर्तियों में धांधली तथा पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। इसी बीच छत्तीसगढ़ के कुरुद से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शनों का हवाला देते हुए पूछा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेता झारखंड में आंदोलित युवाओं की सुध लेने रांची कब पहुंच रहे हैं।
‘रांची में भूपेश बघेल का जूता चोरी नहीं होगा’
Jharkhand Paper Leak Strike: भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि जब दिल्ली में नीट परीक्षा और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन हुआ था, तब राहुल गांधी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सड़कों पर उतर आए थे। उस दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के समय भूपेश बघेल का एक पैर का जूता गुम हो गया था। चंद्राकर ने कटाक्ष किया कि यदि भूपेश बघेल अब रांची जाते हैं, तो वहां उनका जूता चोरी नहीं होगा क्योंकि झारखंड में कांग्रेस समर्थित हेमंत सोरेन सरकार है और वहां उनके जूते को पूरा सम्मान और सुरक्षा मिलेगी।
क्या हेमंत सोरेन से इस्तीफा मांगेंगे राहुल गांधी
अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि दिल्ली में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने वाले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अब रांची क्यों नहीं जा रहे हैं। क्या वे अपनी सहयोगी सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा मांगेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों का युवाओं और छात्रों के प्रति यह दोहरा मापदंड पूरी तरह उजागर हो चुका है।
श्री राहुल गांधी एवं सुश्री प्रियंका गांधी रांची कब पहुंच रहे हैं…? क्या मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से इस्तीफा मांगेंगे..?
श्री भूपेश बघेल जी रांची जाएंगे, तो वहां उनका जूता चोरी नहीं होगा, क्योंकि आपकी (कांग्रेस) समर्थित सरकार है… जूता को पूरा सम्मान/सुरक्षा दोनों मिलेगी।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 11 दिनों से डटे हैं छात्र
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्तियों में अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र-छात्राएं पिछले 11 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। यह आंदोलन अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें राज्यभर के युवा शामिल हो रहे हैं।
दूसरे राज्यों के सेवानिवृत्त जजों से जांच कराने पर अड़े छात्र
आंदोलनकारी छात्रों की मांग केवल किसी एक परीक्षा को रद्द कराने तक सीमित नहीं है। छात्र पिछले 4 से 5 वर्षों के दौरान हुई 10 से अधिक विवादित भर्तियों की जांच किसी दूसरे राज्य के हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के स्वतंत्र पैनल से कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य की जांच एजेंसियों पर उन्हें भरोसा नहीं है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
25 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये में सीटें बेचने का गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारी युवाओं का आरोप है कि राज्य में सरकारी नौकरियां बेचने वाला एक बड़ा और संगठित गिरोह सक्रिय है। जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में अलग-अलग पदों के लिए 25 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बोली लगाने की बात सामने आई है। सीजीएल परीक्षा का पेपर परीक्षा से पहले ही लीक कर उत्तर रटवाए गए थे, वहीं लेडी सुपरवाइजर भर्ती में फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्तियां की गईं।
6 और 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा घेराव का ऐलान
छात्र संगठनों ने आंदोलन को और तेज करते हुए 6 और 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव की चेतावनी दी है। इसके साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन और जनसभाएं करने की तैयारी है। छात्र झारखंड आंदोलन के जनक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर हाथ में लेकर पारंपरिक लोकगीतों के जरिए सीएम हेमंत सोरेन की सरकार का विरोध कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा उचित समय पर लेंगे फैसला
भर्तियों में गड़बड़ी के आरोपों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार और जांच एजेंसियां पूरी पारदर्शिता के साथ मामले की पड़ताल कर रही हैं। छात्रों की मांगों की समीक्षा की जा रही है और सभी तथ्य सामने आने के बाद सरकार उचित और नियमानुकूल निर्णय लेगी।
पटना में भी फूटा छात्रों का गुस्सा, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन
झारखंड के साथ-साथ बिहार की राजधानी पटना में भी पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर छात्रों का आक्रोश देखा गया। मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले हजारों छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान धक्का-मुक्की होने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
कांग्रेस की चुप्पी और दोहरे रवैये पर उठते सवाल
झारखंड में भर्ती घोटालों और पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों छात्रों के उग्र आंदोलन के बीच कांग्रेस की खामोशी अब बड़े राजनीतिक सवालों को जन्म दे रही है। गैर-कांग्रेस शासित राज्यों या केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और भूपेश बघेल जैसे प्रमुख नेता अपने ही हेमंत सोरेन सरकार के दौरान युवाओं के इस बड़े जनाक्रोश पर चुप्पी साधे हुए हैं। कुरुद विधायक अजय चंद्राकर के तीखे जुबानी हमले और छात्रों की मांग ने स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक दलों का यह चयनात्मक रुख उनकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



