
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के करीब मंदिर हसौद इलाके में चल रहे अवैध खनन के काले कारोबार पर प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। ग्राम धनसुली में लंबे समय से बिना अनुमति चूना पत्थर का उत्खनन और भंडारण किया जा रहा था। शनिवार को खनिज विभाग की टीम ने अचानक दबिश देकर 5 अवैध खदानों में चल रहे काम को बंद कराया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भगदड़ मच गई और संचालक काम छोड़कर फरार हो गए। जांच में न केवल अवैध उत्खनन की पुष्टि हुई है, बल्कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की रायल्टी का चूना लगाने का मामला भी सामने आया है।
धनसुली में खनिज विभाग की सर्जिकल स्ट्राइक: 4 क्रेशर सील और खदानों में तालाबंदी
रायपुर जिला खनिज विभाग ने पिछले चार दिनों के भीतर खनन माफियाओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव के नेतृत्व में टीम ने धनसुली और मुरा गांव की खदानों की बारीकी से जांच की। इस दौरान श्रीमहालक्ष्मी लाइम स्टोन और आशापुरा स्टोन क्वारी समेत कई फर्मों के ठिकानों पर छापेमारी की गई। जांच में पाया गया कि ये खदानें न केवल अवैध रूप से संचालित थीं, बल्कि यहां स्वीकृत क्षमता से कहीं ज्यादा पत्थर का भंडारण किया गया था। विभाग ने मौके पर ही 4 क्रेशर मशीनों को सील कर दिया है।
स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर खुदाई: रसूखदारों के ठिकानों पर छापेमारी
जांच टीम को मौके पर कई ऐसी खामियां मिलीं जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी को दर्शाती हैं। कई खदान मालिकों ने अपने आवंटित रकबे से बाहर जाकर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था और वहां गहरी खुदाई कर दी थी। कलेक्टर के निर्देश पर हुई इस जांच में राजेश भवनानी, आशीष अग्रवाल और श्रीराम इंटरप्राइजेज जैसे संचालकों के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। विभाग ने इन सभी संचालकों को नोटिस जारी कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
करोड़ों की रायल्टी पर डाका: सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान
खनिज विभाग के जिला अधिकारी राजेश मालवे के अनुसार यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं है बल्कि बड़े पैमाने पर राजस्व की चोरी है। खदान संचालकों ने रायल्टी बचाने के चक्कर में कागजों पर कम उत्पादन दिखाया जबकि मौके पर भारी मात्रा में चूना पत्थर का स्टॉक मिला। विभाग अब जब्त किए गए स्टॉक का मूल्यांकन कर रहा है ताकि बकाया रायल्टी और जुर्माने की सटीक गणना की जा सके। प्राथमिक अनुमान के मुताबिक यह आंकड़ा करोड़ों में जा सकता है जिसकी वसूली की तैयारी विभाग ने शुरू कर दी है।
तीन दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई: नरदहा और खपरी में भी मचा हड़कंप
खनिज विभाग की टीम इस समय पूरे एक्शन मोड में नजर आ रही है। धनसुली की कार्रवाई से महज तीन दिन पहले ही टीम ने नरदहा और खपरी के इलाकों में 6 खदानों का औचक निरीक्षण किया था। वहां भी अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन और निर्धारित सीमा से अधिक गहराई तक खनन के मामले पकड़े गए थे। तब भी 4 क्रेशर मशीनें सील की गई थीं। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से इलाके के अवैध खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है और कई लोग अपने ठिकानों पर ताला लगाकर फरार हैं।
अधिकारियों की भूमिका भी शक के घेरे में: लापरवाही पर 6 अफसरों को नोटिस
इस पूरे मामले में केवल खदान संचालक ही नहीं बल्कि विभाग के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन लंबे समय तक अफसरों की नजरों से कैसे बचा रहा? इसी लापरवाही को देखते हुए विभाग ने 6 संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। शासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत पाई जाती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। खनिज नियमों के सख्त पालन के लिए अब निगरानी और तेज कर दी गई है।
सख्त कानूनी शिकंजा: रायल्टी वसूली के साथ दर्ज होगा एफआईआर
खनिज विभाग ने साफ कर दिया है कि सील किए गए क्रेशरों को तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि पूरी जांच और जुर्माना वसूली की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। अवैध रूप से उत्खनन किए गए पत्थरों को जब्त कर लिया गया है। विभाग अब इन सभी खदान संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि खनिज संपदा की इस लूट को पूरी तरह रोका जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर ऐसी कार्रवाई हो जो दूसरों के लिए मिसाल बने।



