मंत्री बंगलों में ‘फुलवारी’ की रखवाली में 6 करोड़ एक्स्ट्रा-खर्च: नए-पुराने दोनों बंगलों पर कब्जा, 200 की जगह 350 कर्मचारी, विभाग बोला-सैलरी देने पैसे नहीं

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों के बंगलों की साज-सज्जा और बागवानी (गार्डनिंग) पर होने वाले अतिरिक्त खर्च ने उद्यानिकी विभाग का खजाना खाली कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, मंत्रियों द्वारा पुराने बंगले खाली किए बिना ही नए बंगलों में शिफ्ट हो जाने के कारण, दोनों स्थानों पर कर्मचारियों की तैनाती करनी पड़ रही है, जिससे सालाना 6 करोड़ रुपये का एक्स्ट्रा खर्च बढ़ गया है। विभाग ने शासन से इस अतिरिक्त बजट की मांग की है, क्योंकि उनके पास अक्टूबर के बाद कर्मचारियों को सैलरी देने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

कर्मचारियों की संख्या 200 से बढ़कर हुई 350

दरअसल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्रियों के बंगलों की सुंदरता बढ़ाने के लिए उद्यानिकी विभाग द्वारा फुलवारी तैयार की जाती है। पहले इन बंगलों में बागवानी के लिए करीब 200 कर्मचारी तैनात थे, लेकिन अब नवा रायपुर और पुराने रायपुर, दोनों जगहों पर काम होने के कारण कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 350 हो गई है।

  • दोहरी तैनाती का कारण: प्रदेश के मुखिया समेत कई मंत्रियों के लिए नवा रायपुर में नया बंगला बना है। मंत्री नए बंगले में शिफ्ट हो गए, लेकिन उन्होंने पुराने बंगले पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर नहीं किए। नतीजतन, विभाग को दोनों बंगलों की गार्डनिंग के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती करनी पड़ी, जिससे मजदूरी भुगतान का खर्च बढ़ गया है।
  • अपवाद: उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपना पुराना बंगला खाली कर दिया है। वहीं, मंत्री ओपी चौधरी पुराने बंगले में ही रह रहे हैं और उन्होंने नवा रायपुर के बंगले में कोई काम नहीं कराया है।

सालाना बजट खत्म, 7 माह से अटकी 6 करोड़ की राशि

उद्यानिकी विभाग के अफसरों ने बताया कि पुराने रायपुर के बंगलों में बागवानी का सालाना बजट 3 करोड़ रुपये था। इस बजट से साल में तीन बार सीजन के हिसाब से फुलवारी सजाई जाती है।

असिस्टेंट डॉयरेक्टर उद्यानिकी मिथिलेश देवांगन ने बताया कि अप्रैल 2025 में विभाग ने नवा रायपुर के बंगलों में फुलवारी और दैनिक वेतन भोगियों को वेतन देने के लिए 6 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव शासन को भेजा था। 7 माह बीत जाने के बाद भी इस बजट को मंजूरी नहीं मिली है। विभाग ने पत्र में लिखा है कि उनका बजट पूरी तरह खत्म हो चुका है और अक्टूबर के बाद सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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