
Bemetara News: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पुलिस की बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बेमेतरा सिटी कोतवाली क्षेत्र के वार्ड नंबर 7 में पुलिस ने फंदे पर लटकी एक महिला को बिना चिकित्सीय जांच के ही मृत मान लिया। इसके बाद कमरे का दरवाजा बंद कर बाहर से ताला लगा दिया और टीम कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने थाने चली गई। करीब 2 घंटे बाद जब पुलिस दोबारा कमरे का ताला खोलकर अंदर दाखिल हुई, तो महिला की सांसें चल रही थीं। यह दृश्य देखते ही मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने नहीं की ठीक से जांच, मर्ग कायम करने थाने लौट गई टीम
घटना की जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 7 में एक महिला के अपने घर में फंदे से लटके होने की सूचना सिटी कोतवाली पुलिस को मिली थी। खबर मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन घटनास्थल पर बुनियादी जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। पुलिसकर्मियों ने महिला की नब्ज या सांस जांचे बिना ही उसे मृत घोषित मान लिया। इसके बाद क्राइम सीन सुरक्षित करने के नाम पर कमरे का दरवाजा बंद कर बाहर ताला जड़ दिया गया और पुलिसकर्मी मर्ग पंचनामा तैयार करने के लिए वापस थाने चले गए।

2 घंटे बाद दोबारा ताला खोला तो उड़े होश, आनन-फानन में अस्पताल में कराया भर्ती
Bemetara Police: थाने में कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद जब पुलिस टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची और कमरे का ताला खोला, तो वहां का नजारा देखकर सब हैरान रह गए। महिला की सांसें लगातार चल रही थीं और वह जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी। पुलिस ने बिना देर किए स्थानीय लोगों की मदद से महिला को नीचे उतारा और तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने महिला की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश, पुलिस पर लगाया संवेदनहीनता का आरोप
इस अमानवीय लापरवाही की खबर फैलते ही मौके पर परिजनों और स्थानीय नागरिकों का भारी जमावड़ा लग गया। परिजनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने मौके पर तुरंत महिला की जांच की होती और बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाया होता, तो उसकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। गुस्साए लोगों ने मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को घेरकर अपनी भड़ास निकाली और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

जांच प्रक्रिया और कानूनी प्रोटोकॉल पर उठे सवाल, उच्च अधिकारी साधे हैं चुप्पी
यह पूरा घटनाक्रम पुलिस की कार्यप्रणाली और मानक प्रक्रिया (SOP) के सीधे उल्लंघन को दर्शाता है। किसी भी व्यक्ति को मृत घोषित करने का अधिकार केवल पंजीकृत डॉक्टर के पास होता है। बिना डॉक्टरी परीक्षण के किसी व्यक्ति को मृत मानकर ताले में बंद कर देना पुलिस व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि महिला के होश में आने और उसका बयान दर्ज होने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।



