
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से करीब बीस किलोमीटर दूर बम्हनी सुकुलदैहान गांव में स्थित ‘भूगर्भा मां चंडी मंदिर’ अपनी अद्भूत मान्यताओं और चमत्कारों के लिए पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। करीब डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुराने इस मंदिर में नवरात्रि के दिनों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस पवित्र धाम को लेकर क्षेत्र में कई ऐसी जनश्रुतियां प्रचलित हैं, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मुरादें लेकर इस सिद्ध पीठ में माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्षों पहले गांव के महंगू नामक एक बैगा को चेचक की बीमारी हुई थी, जिसके बाद उसे सपने में माता ने अपनी उपस्थिति का आभास कराया था। बताए गए स्थान पर जब खुदाई की गई, तो जमीन के भीतर से माता की यह दुर्लभ प्रतिमा प्राप्त हुई। ग्रामीणों ने जब इस प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने का प्रयास किया, तो एक हैरान करने वाली बात सामने आई। मान्यता है कि लाख कोशिशों के बाद भी माता की यह प्रतिमा अपने मूल स्थान से एक इंच भी नहीं हिल सकी।
समय के साथ लगातार बढ़ रहा है माता की प्रतिमा का आकार
इस मंदिर को लेकर सबसे बड़ा दावा यहां के पुजारी और स्थानीय लोग करते हैं। उनका मानना है कि माता की प्रतिमा का आकार हर साल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पुजारियों के अनुसार, हर साल माता के शृंगार के लिए जो वस्त्र तैयार किए जाते हैं, वे समय के साथ छोटे पड़ने लगते हैं। हालांकि इस बात की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन भक्तों के लिए यह अगाध आस्था और चमत्कार का विषय बना हुआ है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में प्रतिदिन माता का भव्य शृंगार और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

डोंगरगढ़ आने वाले श्रद्धालु भी मां भूगर्भा के दरबार में टेकाते हैं माथा
राजनांदगांव आने वाले और विश्व प्रसिद्ध डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने वाले तमाम श्रद्धालु इस मंदिर में आना नहीं भूलते। बम्हनी सुकुलदैहान स्थित यह दरबार क्षेत्र की धार्मिक पहचान का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और ज्योति कलश प्रज्वलन का सिलसिला शुरू हो जाता है। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है, ऐसी स्थानीय लोगों की दृढ़ मान्यता है।



