
Zypp Electric CEO Cab driver Viral Video:: गुरुग्राम के एक स्टार्टअप फाउंडर और कैब ड्राइवर के बीच हुई बातचीत इन दिनों इंटरनेट पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है। वीडियो में दिख रहे कैब चालक ने बताया कि वह पहले एक जगह 25 हजार रुपये प्रति माह की तय पगार पर काम करता था। बेहतर भविष्य और ज्यादा पैसों की चाहत में उसने वह नौकरी छोड़ दी और कैब चलाने का फैसला किया। जब गाड़ी में सफर कर रहे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने उसकी मौजूदा कमाई को लेकर सवाल किया, तो ड्राइवर का जवाब सुनकर लोग हैरान रह गए।
CEO के सवाल पर ड्राइवर की रहस्यमयी मुस्कान
यह पूरा मामला तब सामने आया जब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े स्टार्टअप ‘जिप इलेक्ट्रिक’ के सीईओ आकाश गुप्ता ने अपनी कैब के ड्राइवर से बातचीत की। उन्होंने सफर के दौरान ड्राइवर से उसके पुराने काम और मौजूदा आमदनी के बारे में पूछना शुरू किया। बातचीत के दौरान जब आकाश गुप्ता ने हंसते हुए पूछा कि क्या अब आप महीने में एक लाख रुपये तक कमा लेते हैं, तो ड्राइवर ने सीधे जवाब देने के बजाय सिर्फ मुस्कुरा दिया। उसका यह इशारा साफ कर रहा था कि वह अब पहले की तुलना में कई गुना अधिक पैसा कमा रहा है।
देखें वीडियो-
ज्यादा आमदनी की उम्मीद में बदला करियर का रास्ता
चालक ने वीडियो में यह साफ तौर पर स्वीकार किया कि फिक्स सैलरी वाली नौकरी छोड़ने की सबसे बड़ी वजह कम पैसा होना ही था। परंपरागत दफ्तरों में काम के घंटे तय होने के बाद भी तरक्की और वेतन वृद्धि की रफ्तार काफी धीमी होती है। ड्राइवर का मानना था कि फिक्स नौकरी में रहकर वह अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों और जरूरतों को आसानी से पूरा नहीं पा रहा था। कैब एग्रीगेटर्स के साथ जुड़कर काम करने पर मेहनत के हिसाब से पैसे मिलते हैं, जिससे कमाई का दायरा काफी बढ़ जाता है।
सोशल मीडिया पर छिड़ गई नौकरी बनाम स्वरोजगार की बहस
इस वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट यूजर्स के बीच एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या पारंपरिक 9 से 5 की नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू करना ज्यादा फायदेमंद है। इस मुद्दे पर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। एक वर्ग का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति कड़ी मेहनत करने को तैयार है, तो कैब चलाने या डिलीवरी जैसे कामों में किसी बंदिश के बिना अच्छी रकम बनाई जा सकती है। वहीं, दूसरा पक्ष पारंपरिक नौकरी की वकालत कर रहा है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या दी अपनी राय
वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कई लोगों ने लिखा कि आज के दौर में घर चलाने या अमीर बनने के लिए सिर्फ किसी दफ्तर की नौकरी पर ही निर्भर रहना जरूरी नहीं रह गया है। इसके विपरीत, कुछ समझदार यूजर्स ने यह भी ध्यान दिलाया कि हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं। कैब चलाने में मिलने वाली रकम गाड़ी की स्थिति, ईंधन की कीमतों और रोजाना मिलने वाले ट्रिप्स पर टिकी होती है। इसलिए किसी एक व्यक्ति की सफलता को देखकर हर किसी को अपनी सुरक्षित नौकरी नहीं छोड़नी चाहिए।
क्यों सुरक्षित आय और सामाजिक सुरक्षा को बेहतर मानते हैं लोग
चर्चा में शामिल एक बड़े हिस्से का मानना है कि भले ही स्वरोजगार में कभी-कभार बड़ी रकम हाथ आ जाती है, लेकिन दफ्तर की नौकरी की अपनी अलग खूबियां हैं। निजी कंपनियों में मिलने वाला भविष्य निधि (PF), स्वास्थ्य बीमा, सवैतनिक अवकाश (Paid Leaves) और हर महीने की एक निश्चित तारीख को आने वाली सैलरी मन को एक मानसिक शांति देती है। कैब चलाने या फ्रीलांस काम करने में बीमारी या दुर्घटना के दिनों में कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलती, जिससे जोखिम हमेशा बना रहता है।
तेजी से पैर पसारती गिग इकॉनमी और बदलता भारत
इस घटना ने देश में लगातार मजबूत हो रही ‘गिग इकॉनमी’ को लेकर भी नीतिगत चर्चाएं तेज कर दी हैं। आज युवा किसी एक कंपनी का स्थायी कर्मचारी बनने के बजाय अपनी मर्जी से कांट्रैक्ट या टास्क आधारित काम करना पसंद कर रहे हैं। फूड डिलीवरी, राइड शेयरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लाखों लोग पारंपरिक रोजगार से बाहर आकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बदलते कामकाजी माहौल के बीच यह सवाल बेहद अहम हो गया है कि भविष्य का रोजगार किस करवट बैठेगा।



