
CG Ministers Meeting Ajay Jamwal Pawan Sai Warning: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार की देर रात तक चली हाई प्रोफाइल बैठक का असली एजेंडा अब खुलकर सामने आ गया है. इस गुप्त बैठक में मंत्रियों के ढीले कामकाज को लेकर केंद्रीय संगठन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. सूत्रों के मुताबिक, शीर्ष नेतृत्व ने सभी मंत्रियों को दो टूक लहजे में आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है कि धरातल पर जनता के बीच किसी भी तरह की नाराजगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मंत्रियों से साफ कह दिया गया है कि वे दो महीने के भीतर अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं, अन्यथा उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा.
विभागीय सचिवों और कलेक्टरों के साथ मिलकर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश
बैठक के दौरान मंत्रियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने विभागों के सचिवों और प्रभार वाले जिलों के कलेक्टरों के साथ सीधे समन्वय स्थापित करें. आम जनता से जुड़े जितने भी लंबित काम हैं, उन्हें बिना किसी देरी के प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए. संगठन का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. दो महीने बाद केंद्रीय आलाकमान मंत्रियों के कामकाज की दोबारा गहन समीक्षा करेगा, जिसमें लापरवाही बरतने वाले मंत्रियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
दिल्ली दरबार तक पहुंची थी मंत्रियों की रिपोर्ट, सूरजपुर की घटना से बेहद नाराज था राष्ट्रीय संगठन
दिल्ली के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के मंत्रियों के प्रदर्शन की पूरी रिपोर्ट लगातार राष्ट्रीय संगठन के पास भेजी जा रही थी. केंद्रीय नेतृत्व कई मंत्रियों के कामकाज के तौर-तरीकों से लंबे समय से असंतुष्ट चल रहा था और सरकार में कसावट लाने की योजना बन रही थी. इसी बीच सूरजपुर में हुई एक प्रशासनिक घटना ने आग में घी का काम किया, जिससे केंद्रीय नेता बेहद खफा हो गए. दिल्ली ने सबसे पहले प्रदेश संगठन के बड़े नेताओं से जवाब-तलब किया और उसके बाद मंत्रियों की आपात क्लास लगाने का फैसला लिया गया.
प्रशासनिक सख्ती का देना था कड़ा संदेश
आमतौर पर जब भी सत्ता और संगठन के बीच कोई समन्वय बैठक होती है, तो उसका आयोजन भाजपा के प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में किया जाता है. हालांकि, इस बार बैठक का स्थान बदलकर मुख्यमंत्री निवास रखा गया. इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि मामला सीधे तौर पर प्रशासनिक कसावट से जुड़ा था. चूंकि मंत्रियों को कलेक्टरों और सचिवों के जरिए ही जमीन पर काम करवाना है, इसलिए प्रशासनिक सख्ती का संदेश देने के लिए सीएम हाउस को चुना गया. इस बैठक में कुछ चुनिंदा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी तलब किया गया था.
क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय संगठन की ओर से क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय विशेष रूप से उपस्थित रहे. इन दोनों दिग्गज नेताओं ने ही मंत्रियों के सामने केंद्रीय आलाकमान की चिंताओं को रखा. दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव इस बैठक से पूरी तरह बाहर रहे. चूंकि वे स्वयं एक विधायक हैं, इसलिए रणनीतिक रूप से उनका मंत्रियों के कामकाज की आलोचना करना उचित नहीं माना गया और वे इस पूरी प्रक्रिया से दूर रहे.
मीडिया के सामने मंत्रियों ने साधी चुप्पी
कड़ी चेतावनी के साथ ही सभी मंत्रियों को सख्त हिदायत दी गई है कि भीतर की कोई भी बात या नाराजगी बाहर लीक नहीं होनी चाहिए. यही कारण है कि पांच घंटे की मैराथन बैठक के बाद जब मंत्री बाहर निकले, तो उन्होंने मीडिया के तीखे सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया. सभी मंत्रियों ने पहले से तय रणनीति के तहत एक ही रटा-रटाया बयान दिया कि यह सरकार और संगठन के बीच समन्वय की एक नियमित बैठक थी जो समय-समय पर होती रहती है. किसी भी नेता ने अचानक बुलाई गई इस बैठक के असली एजेंडे और डांट का जिक्र सार्वजनिक रूप से नहीं किया.



