
CG Assembly Monsoon Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा का आगामी मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं। आगामी 13 जुलाई से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय सत्र में विपक्ष ने सरकार को चौतरफा घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। इस बार सदन में जन सरोकार और स्थानीय स्तर से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे गूंजेंगे। विपक्ष ने कानून व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर तीखे सवाल तैयार किए हैं। विभिन्न सरकारी विभागों से अब तक सैकड़ों प्रश्नों के लिखित जवाब मांगे जा चुके हैं, जिससे साफ है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिलेगी।
स्कूलों में मंत्रोच्चार और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर तल्ख होंगे विपक्ष के तेवर
इस बार के सत्र में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों पर सदन का तापमान बढ़ना तय है। विधायकों ने इस विभाग से 53 सवाल पूछे हैं। इसमें सरकारी स्कूलों में प्रार्थना के दौरान मंत्रोच्चार को अनिवार्य किए जाने का मामला सबसे ऊपर है, जिस पर विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठाएगा। इसके साथ ही राज्य में लंबे समय से लंबित शिक्षक भर्ती की मौजूदा स्थिति, स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बस्तर-सरगुजा संभाग में शिक्षा व्यवस्था के मौजूदा हालात को लेकर भी शिक्षा मंत्री से जवाब मांगा जाएगा।
नकटी गांव का जमीन विवाद और महतारी वंदन योजना की खामियों पर मांगेंगे जवाब
सत्र के दौरान धमतरी जिले का चर्चित नकटी गांव विवाद भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरेगा। जमीन अधिग्रहण और स्थानीय ग्रामीणों के विरोध से जुड़े इस मामले में राजस्व विभाग को घेरने की तैयारी है। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग से सर्वाधिक 77 प्रश्न पूछे गए हैं। इनमें महतारी वंदन योजना के तहत छूटे हुए हितग्राहियों की स्थिति, विवाहित महिलाओं को दी जाने वाली राशि के नियम, सरकारी स्तर पर होने वाली साड़ी खरीदी और मंगलसूत्र वितरण योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष विस्तृत ब्यौरा मांगेगा।
खेती-किसानी के सीजन में खाद-बीज की किल्लत और पंचायतों के काम पर फोकस
वर्तमान खरीफ सीजन को देखते हुए कृषि विभाग से जुड़े 55 सवाल विधानसभा सचिवालय में दर्ज कराए गए हैं। विपक्षी विधायक सहकारी समितियों में रासायनिक उर्वरकों के भंडारण, खाद और उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता तथा वितरण व्यवस्था में आ रही दिक्कतों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे। वहीं ग्रामीण विकास और प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए पंचायत विभाग से भी 50 से अधिक सवाल पूछे गए हैं, जिनमें ग्राम पंचायतों को मिलने वाले फंड और विकास कार्यों की समीक्षा शामिल है।

दो साल में पूछे गए 11 हजार से ज्यादा प्रश्न, विपक्ष के विधायकों ने दिखाई ज्यादा दिलचस्पी
विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी-मार्च 2024 से लेकर फरवरी-मार्च 2026 के बीच पिछले दो वर्षों में सदन के भीतर कुल 11,526 प्रश्न पूछे गए हैं। इसमें दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के विधायकों ने जनता से जुड़े मुद्दों पर अधिक आक्रामकता दिखाते हुए करीब 7,000 सवाल दागे। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष यानी भाजपा के विधायकों ने भी अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर लगभग 4,500 प्रश्न पूछे हैं, जो यह दिखाता है कि अपनी ही सरकार होने के बावजूद विधायक विकास कार्यों को लेकर सजग हैं।
धर्मलाल कौशिक और अजय चंद्राकर सवाल पूछने में आगे, भूपेश बघेल की सक्रियता रही कम
विधायकों की व्यक्तिगत सक्रियता की बात करें तो भाजपा की ओर से धर्मलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और भावना बोहरा ने सबसे ज्यादा 264-264 सवाल पूछे हैं। वहीं कांग्रेस की तरफ से भोलाराम साहू भी 264 सवालों के साथ बराबरी पर रहे। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने भी विभिन्न नीतिगत मामलों पर 256 प्रश्न उठाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके विपरीत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सदन की बहसों में तो सक्रिय नजर आए, लेकिन लिखित प्रश्नों के मामले में वे काफी पीछे रहे और दो साल में सिर्फ 72 सवाल ही लगाए।
जुलाई सत्र के लिए आए 1033 सवाल, 36 विधायकों ने कोटे के पूरे 20 प्रश्न पूछे
इस साल जुलाई 2026 के इस मानसून सत्र के लिए अब तक कुल 1,033 प्रश्न विधानसभा सचिवालय को प्राप्त हुए हैं। नियमों के मुताबिक पांच दिनों के इस छोटे सत्र में एक बैठक के दौरान कोई भी सदस्य अधिकतम चार प्रश्न ही पूछ सकता है, इस तरह पांच बैठकों के हिसाब से एक विधायक का कोटा अधिकतम 20 सवालों का होता है। सदन के 36 सदस्यों ने अपने कोटे के पूरे 20-20 सवाल पूछे हैं। इन प्रमुख चेहरों में चरण दास महंत, कवासी लखमा, उमेश पटेल, अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।



