
CG Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए कांग्रेस के गढ़ में सीधा वार कर दिया है। सुकमा में स्थित कांग्रेस कार्यालय को ईडी ने अटैच कर दिया है। ये देश में पहली बार हुआ है जब किसी राजनीतिक दल के दफ्तर को ईडी ने अपनी जांच के दायरे में लेते हुए सील किया हो।
कवासी लखमा और बेटे हरीश की करोड़ों की संपत्ति पर भी ईडी का शिकंजा
ईडी की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, रायपुर में कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश लखमा की करीब 6 करोड़ रुपये की संपत्ति को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है।

इसमें जमीन, मकान और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। हैरानी की बात ये है कि सुकमा का जो कांग्रेस भवन अटैच किया गया है, वह हरीश लखमा के नाम पर दर्ज है।

क्या है शराब घोटाले की असली कहानी?
इस पूरे घोटाले की जड़ें उस वक्त की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हैं। ईडी की जांच के मुताबिक, साल 2019 के बाद से अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक आपराधिक सिंडिकेट ने आबकारी विभाग में भारी गड़बड़ी को अंजाम दिया।
2017 में राज्य की शराब नीति में बदलाव करते हुए CSMCL के ज़रिये शराब की सरकारी बिक्री शुरू हुई, लेकिन बाद में इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर अनवर ढेबर ने अपने करीबी अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का एमडी बनवाया। इसके बाद अधिकारी, कारोबारी और रसूखदार नेताओं की टीम मिलकर 2161 करोड़ रुपये का घोटाला करने में जुट गई।

ईडी की चार्जशीट में कौन-कौन घिरे?
ईडी ने इस मामले में 6000 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की है। इसमें कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है। नामचीन चेहरों में शामिल हैं—पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन और देश की बड़ी शराब कंपनियां जैसे छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी, ओम साईं ब्रेवरेज, दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट, और सिद्धार्थ सिंघानिया।
कवासी लखमा फिलहाल जेल में, बेटे की भी संपत्ति की जांच
कवासी लखमा को ईडी ने 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इससे पहले 28 दिसंबर को उनके रायपुर स्थित आवास समेत कई ठिकानों पर ईडी ने रेड डाली थी। फिलहाल लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और ईडी की चार्जशीट में उन्हें शराब घोटाले के ‘सिंडिकेट प्रमुख’ के रूप में पेश किया गया है।
ईडी की इस कार्रवाई से साफ है कि मामला केवल नेताओं और अफसरों तक सीमित नहीं रहा, अब संगठन तक जांच की आंच पहुंच गई है। सुकमा कांग्रेस भवन की अटैचमेंट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में इस घोटाले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।



