
CG School Eye Checkup Scam: छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग का एक बड़ा ढुलमुल रवैया सामने आया है। राज्य के 25 जिलों में बच्चों को नि:शुल्क पावर वाले चश्मे बांटने की योजना में अगस्त महीने की रिपोर्ट पूरी तरह शून्य रही है। लक्ष्य तय होने के बावजूद एक भी बच्चे को चश्मा नहीं बांटा गया है। इससे प्रदेश के लगभग 5 लाख स्कूली बच्चों के सामने पढ़ाई और देखने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
25 जिलों के सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी
CG Health Department Spectacle Notice: मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य संचालनालय ने सभी 25 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को नोटिस थमा दिया है। अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम की स्टेट नोडल अफसर डॉ. निधि ग्वालारे ने पत्र जारी कर इस स्थिति को राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रति उदासीनता और आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में रखा है। विभाग ने सभी अफसरों को एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
मायोपिया के बढ़ते मामलों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
प्रदेश भर के स्कूलों में जांच के दौरान कई बच्चों में माइनस 3 से 4 नंबर तक का पावर पाया गया है। मायोपिया यानी दूर की दृष्टि कमजोर होने के कारण बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर लिखे अक्षर साफ दिखाई नहीं दे रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, अगर समय पर सही पावर का चश्मा न लगाया जाए, तो बच्चों की आंखों का नंबर लगातार बढ़ता जाता है, जिससे उनकी आंखों की रोशनी पर स्थायी असर पड़ सकता है।
बाजार से महंगा चश्मा खरीदने को मजबूर हो रहे अभिभावक
National Blindness Control CG News: सरकारी तंत्र की बेपरवाही के कारण अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। स्कूलों में निशुल्क वितरण न होने की वजह से मजबूरी में अभिभावकों को प्राइवेट दुकानों से 1500 से 2000 रुपये खर्च करके चश्मे बनवाने पड़ रहे हैं। नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इंपेयरमेंट के तहत पहली से बारहवीं कक्षा तक के सभी छात्रों की आंखों की मुफ्त जांच और चश्मा वितरण का प्रावधान है, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन कमजोर साबित हो रहा है।
मोबाइल और स्क्रीन टाइम से लगातार घट रही देखने की क्षमता
Mobile Gaming Eye Damage CG: बच्चों की दृष्टि कमजोर होने के पीछे अत्यधिक मोबाइल उपयोग, ऑनलाइन गेम्स और रील्स देखने की लत को बड़ा कारण माना जा रहा है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम से छोटे बच्चों में भी मायोपिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर जांच और सहायता न मिलने से स्थिति और भी जटिल होती जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की मई 2026 की जिलावार विजन रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मई 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न जिलों में जांच के दौरान हजारों बच्चों की नजर कमजोर पाई गई थी। इसमें रायपुर और दुर्ग जिले की स्थिति सबसे ज्यादा खराब दर्ज की गई है।
| जिला | जांच किए गए छात्र | कमजोर विजन वाले छात्र | प्रतिशत |
| रायपुर | 50,215 | 3,033 | 6.04% |
| बिलासपुर | 59,751 | 2,950 | 4.93% |
| दुर्ग | 37,520 | 2,506 | 6.67% |
| राजनांदगांव | 29,767 | 1,958 | 6.57% |
| धमतरी | 30,958 | 1,899 | 6.15% |
| बस्तर | 33,393 | 1,665 | 4.98% |
| रायगढ़ | 35,942 | 1,638 | 4.55% |
| कोरबा | 41,143 | 1,559 | 3.78% |
| जशपुर | 48,870 | 1,517 | 3.10% |
| कांकेर | 47,748 | 1,500 | 3.14% |
स्टेट नोडल अफसर ने चश्मा वितरण में तेजी लाने के दिए निर्देश
स्टेट नोडल अफसर डॉ. निधि ग्वालारे ने बताया कि स्कूली बच्चों की आंखों की जांच से लेकर नि:शुल्क पावर चश्मा उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिलों के सीएमएचओ की है। कार्य में प्रगति न दिखने पर ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग का प्रयास है कि वितरण प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए ताकि किसी भी बच्चे को अपनी पढ़ाई या दैनिक गतिविधियों में परेशानी का सामना न करना पड़े।



