
CG Kanya Vivah Scam: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत गरीब बेटियों को बांटे गए मंगलसूत्र को लेकर उपजा विवाद अब और गहरा गया है। इस पूरे मामले पर मचे सियासी घमासान के बीच प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने एक बड़ा बयान दिया है। मंत्री ने साफ लफ्जों में स्वीकार किया है कि सामूहिक विवाह के दौरान दुल्हनों को असली नहीं बल्कि नकली यानी आर्टिफिशियल मंगलसूत्र की चेन दी गई थी। इसके पीछे की मुख्य वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बाजार में सोने और चांदी की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर सरकारी उपहारों के बजट पर पड़ा है।
निर्धारित 7 हजार के बजट में असली चांदी देना मुमकिन नहीं
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभागीय बजट का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराया है। उनका तर्क है कि योजना के मौजूदा दिशा-निर्देशों के मुताबिक नवविवाहित जोड़ों को दी जाने वाली कुल उपहार सामग्री पर सिर्फ 7 हजार रुपये खर्च करने का कानूनी प्रावधान है। इसी सीमित राशि के भीतर ही विभाग को वधु के लिए बिछिया, पायल, साड़ियां, पूरा श्रृंगार बॉक्स और घर-गृहस्थी का अन्य जरूरी सामान खरीदना होता है। मंत्री के अनुसार इतनी कम रकम में आज के दौर में असली चांदी का मंगलसूत्र और चेन खरीद पाना प्रशासनिक तौर पर बिल्कुल संभव नहीं था।

जानिए क्या है योजना का 50 हजार रुपये का पूरा पैकेज
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के वित्तीय ढांचे की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि सरकार प्रति जोड़े कुल 50 हजार रुपये का पैकेज देती है। इस कुल राशि में से 8 हजार रुपये विवाह स्थल के टेंट, भोजन और अन्य आयोजन संबंधी खर्चों के लिए तय होते हैं। वहीं 7 हजार रुपये कपड़ों और श्रृंगार सामग्री के मद में जाते हैं। योजना का सबसे बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर दुल्हन की आर्थिक सुरक्षा के लिए रखा गया है। इसके तहत बिचौलियों को दूर करने के लिए अब 35 हजार की जगह 36 हजार रुपये सीधे डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे नवविवाहूता के बैंक खाते में भेजे जा रहे हैं।
कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए बदली व्यवस्था
लक्ष्मी राजवाड़े ने पिछली व्यवस्थाओं पर निशाना साधते हुए दावा किया कि यह योजना बहुत पहले से संचालित हो रही है, लेकिन पूर्व में इसमें बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और घटिया सामान बांटने की शिकायतें मिलती रहती थीं। इसी भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए साय सरकार ने नकद राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने का फैसला किया। मंत्री का कहना है कि जब 36 हजार रुपये सीधे बैंक खाते में जा रहे हैं, तो दुल्हनें अपनी मर्जी और पसंद के अनुसार बाजार से असली सोने या चांदी के आभूषण खरीद सकती हैं। इस नई व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है।
मनेंद्रगढ़ की दुल्हनों ने लगाया 15-15 हजार रुपये वसूली का गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में नया और संवेदनशील मोड़ तब आया जब मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले की कुछ पीड़ित दुल्हनों ने महिला एवं बाल विकास विभाग के स्थानीय मैदानी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़ दिए। कुछ महिलाओं का कहना था कि उन्हें मंगलसूत्र और विवाह की अन्य जरूरी सामग्री सौंपने के बदले में विभागीय कर्मचारियों ने उनसे 15-15 हजार रुपये की अवैध वसूली की थी। इन गंभीर आरोपों के बाद हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जिला प्रशासन ने इसकी जांच बिठाई। हालांकि, कलेक्टर स्तर की शुरुआती जांच रिपोर्ट में संबंधित विभागीय अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई है।
कुछ ही महीनों में काला पड़ गया मंगलसूत्र तो खुली धांधली की पोल
यह पूरा विवाद इसी साल 10 फरवरी को आयोजित हुए भव्य सामूहिक विवाह कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड के अंतर्गत आने वाले चनवारीडांड गांव में एक बड़ा आयोजन कर 184 जोड़ों की शादियां संपन्न कराई गई थीं। विदाई के वक्त सभी दुल्हनों को मंगलसूत्र पहनाया गया था। शादी के कुछ ही महीनों बाद जब कई दुल्हनों के गले का मंगलसूत्र अचानक काला पड़ने लगा, तो उन्हें शक हुआ। महिलाओं ने जब स्थानीय सर्राफा दुकानों में जाकर इसकी जांच कराई, तो पता चला कि वह चांदी नहीं बल्कि गिलट धातु का बना हुआ नकली आभूषण था।
सरकारी दावों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल
भले ही मंत्री ने बढ़ती महंगाई और सीमित बजट की दलील देकर आर्टिफिशियल चेन बांटने की बात को स्वीकार कर लिया है, लेकिन इस स्पष्टीकरण के बाद भी प्रशासनिक जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सरकार को नकली या गिलट के गहने ही बांटने थे, तो इसकी जानकारी गरीब परिवारों को पहले क्यों नहीं दी गई? क्या सरकारी खरीद के नियमों में उपहारों की गुणवत्ता को लेकर कोई कड़े पैमाने तय नहीं थे? विपक्ष का भी आरोप है कि गरीब बेटियों को सम्मान देने के नाम पर महज प्रतीकात्मक औपचारिकता निभाकर विभाग अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
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