
CG Congress New State President: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक फेरबदल को लेकर सरगर्मी अचानक तेज हो गई है. वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का निर्धारित तीन साल का कार्यकाल आगामी 9 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है. इस समयसीमा के नजदीक आते ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य में नए कप्तान की तलाश शुरू कर दी है. पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर कई दिग्गज और युवा चेहरों के नामों पर कयासबाजी का दौर शुरू हो चुका है, जिससे संगठन के भीतर अंदरूनी हलचल काफी बढ़ गई है.
नए चेहरे पर दिल्ली आलाकमान का विचार
पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार छत्तीसगढ़ में संगठन की बागडोर किसी युवा और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने वाले नेता के हाथों में देने का मन बना रहा है. हार के बाद कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने और गुटबाजी को खत्म करने के लिए दिल्ली दरबार इस बार पूरी तरह बदलाव के मूड में नजर आ रहा है. विधानसभा चुनाव 2028 को ध्यान में रखते हुए पार्टी अभी से अपने पूरे संगठनात्मक ढांचे को कसने की तैयारी में जुट गई है.
संगठन में युवाओं को आगे लाने का फॉर्मूला
संगठन में बदलाव की यह रणनीति कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत पिछले साल 25 नवंबर को ही हो गई थी. उस दौरान कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की 41 जिला कांग्रेस कमेटियों में से लगभग 25 जिलों में नए और युवा अध्यक्षों की ताजपोशी कर सबको चौंका दिया था. अब उसी पुराने सफल मॉडल को प्रदेश स्तर पर भी दोहराने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों के लिए युवाओं की एक नई और आक्रामक टीम खड़ी की जा सके.
उमेश पटेल और देवेंद्र यादव रेस में आगे
नवेली कमान की इस दौड़ में पूर्व कैबिनेट मंत्री और खरसिया के मौजूदा विधायक उमेश पटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है. उमेश पटेल के पास संगठनात्मक कामकाज का लंबा अनुभव है और वे एक सौम्य युवा चेहरे के रूप में जाने जाते हैं. इसके साथ ही भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव का नाम भी बड़ी मजबूती से उभरा है. देवेंद्र यादव को पार्टी के भीतर एक बेहद ऊर्जावान और युवाओं के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले कद्दावर नेता के रूप में देखा जाता.
वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी बरकरार
भले ही नए चेहरों को लेकर मंथन चल रहा है, लेकिन वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी राजनीतिक पंडित पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं. बस्तर अंचल के आदिवासी समाज में दीपक बैज की पैठ और विपरीत परिस्थितियों में संगठन को संभाले रखने का उनका अनुभव उनके पक्ष में जाता है. आदिवासी बहुल राज्य होने के नाते कांग्रेस नेतृत्व अंतिम समय पर कोई बड़ा जोखिम लेने से बचने के लिए बैज को दोबारा मौका देने पर भी विचार कर सकता है.
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव भी रेस में शामिल
सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव भी इस राजनीतिक मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं. सिंहदेव ने पूर्व में भी सार्वजनिक मंचों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालने की अपनी इच्छा जाहिर की थी. हालिया दिनों में वे सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में लगातार दौर कर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि वे भी संगठन की इस बड़ी दौड़ में पूरी ताकत से बने हुए हैं.
अभनपुर में 21 जून से बड़ा प्रशिक्षण शिविर
इस बीच संगठनात्मक बदलाव की आखिरी स्क्रिप्ट रायपुर के पास अभनपुर में लिखी जा सकती है. सूत्रों के मुताबिक, अभनपुर में 21 से 30 जून के बीच नवनियुक्त जिला अध्यक्षों का एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित होने जा रहा है. इस शिविर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के शामिल होने की पूरी उम्मीद है. माना जा रहा है कि इस बड़े आयोजन के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए मुखिया के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा.
पार्टी हाईकमान जल्द ले सकता है फैसला
कुल मिलाकर देखा जाए तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस में leadership परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया अब अपने अंतिम और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. पार्टी आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा विंग के उत्साह के बीच एक सटीक संतुलन बिठाने की है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में बैठा केंद्रीय नेतृत्व आगामी 2028 की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए छत्तीसगढ़ में किस चेहरे पर दांव लगाता है.



