CG Krishak Unnati Yojana: छत्तीसगढ़ में धान छोड़ इन सात प्रमुख फसल उगाने पर मिलेंगे 15,000 रुपये प्रति एकड़: जानिए कैसे करना है आवेदन और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत

CG Krishak Unnati Yojana: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाने और खेती-किसानी के ढर्रे में सुधार लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘कृषक उन्नति योजना’ के नए और संशोधित स्वरूप को हरी झंडी दे दी गई है. खरीफ-2026 से लागू होने वाली इस नीति के तहत यदि कोई किसान धान की पारंपरिक खेती को छोड़कर अन्य वैकल्पिक फसलें उगाता है, तो सरकार उसे प्रति एकड़ 15,000 रुपये की इनपुट सहायता (प्रोत्साहन राशि) प्रदान करेगी. सरकार का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सिंगल क्रॉप पैटर्न यानी केवल धान पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है.

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इन सात प्रमुख खरीफ फसलों की खेती पर मिलेगा नगद लाभ, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की तैयारी

राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए नए नियमों के मुताबिक, प्रोत्साहन राशि का यह लाभ केवल चुनिंदा वैकल्पिक फसलों की बुआई करने पर ही देय होगा. यदि किसान धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों का चुनाव करते हैं, तो वे इस योजना के पात्र माने जाएंगे. कृषि विभाग का मानना है कि इस नीति से मैदानी इलाकों में इन पौष्टिक और व्यावसायिक फसलों का रकबा तेजी से बढ़ेगा, जिससे राज्य में कृषि का एक संतुलित मॉडल तैयार हो सकेगा.

जोखिम से बचेंगे किसान और सुधरेगी जमीन की सेहत, जानिए क्या कहते हैं कृषि मामलों के जानकार

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अधिकांश किसान केवल धान की पैदावार पर आश्रित रहते हैं. इसके चलते यदि कभी मौसम खराब हो, कीटों का हमला हो या बाजार में कीमतें गिरें, तो सीधे किसानों की कुल आय प्रभावित होती है. दलहन और तिलहन जैसी फसलें कम पानी में तैयार हो जाती हैं, जिससे भूजल का संरक्षण होता है. इसके साथ ही, इन फसलों को बारी-बारी से उगाने से खेतों की मिट्टी की नाइट्रोजन फिक्सिंग क्षमता बढ़ती है और भूमि की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति लंबे समय तक सुरक्षित रहती है.

एकीकृत किसान पोर्टल और डिजिटल क्रॉप सर्वे बनेगा आधार, सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगी पूरी रकम

योजना के क्रियान्वयन को पूरी तरह पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त रखने के लिए सरकार ने एक आधुनिक डिजिटल ब्लूप्रिंट तैयार किया है. प्रोत्साहन राशि का वितरण सीधे तौर पर ‘एकीकृत किसान पोर्टल’, ‘एग्रीस्टेक पंजीयन’ और पटवारियों द्वारा किए जाने वाले ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ के लाइव डेटा के आधार पर किया जाएगा. इसका मतलब यह हुआ कि किसान ने खेत में वास्तव में कौन सी फसल बोई है, इसका उपग्रह और गिरदावरी डेटा से मिलान होने के बाद ही राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी.

फर्जी दावों और कागजी हेरफेर पर लगेगी पूरी तरह लगाम, वास्तविक किसानों को समय पर मिलेगी सहायता

इस कड़े डिजिटल सत्यापन मॉडल के लागू होने से सरकारी योजनाओं में होने वाले फर्जीवाड़े और बोगस दावों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी. पहले कई बार कागजों पर फसल बदलकर अवैध लाभ लेने की शिकायतें आती थीं, लेकिन अब एग्रीस्टेक मैपिंग के कारण केवल वास्तविक और हकदार किसानों की ही पहचान हो सकेगी. प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि इस पारदर्शी तकनीक से वित्तीय गड़बड़ियां शून्य हो जाएंगी और सही समय पर जरूरतमंद किसानों तक सरकारी इमदाद पहुंच सकेगी.

छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था में दिखेगा बड़ा बदलाव, दीर्घकालिक स्थिरता की ओर बढ़ेंगे कदम

लंबे समय के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह निर्णय छत्तीसगढ़ की पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकता है. जब प्रदेश में धान के समानांतर मोटे अनाजों, दलहन और कपास का उत्पादन बढ़ेगा, तो स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित उद्योगों और प्रसंस्करण केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा. इससे न केवल किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा, बल्कि पर्यावरण, मिट्टी की सेहत और जल प्रबंधन जैसे मोर्चों पर भी राज्य को सकारात्मक और टिकाऊ परिणाम देखने को मिलेंगे.

आवेदन के लिए इन अनिवार्य दस्तावेजों को पहले से रखें तैयार

योजना का लाभ लेने और पोर्टल पर पंजीकरण करने के लिए आवेदक किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेजों का होना अनिवार्य है. इनके बिना डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया अधूरी रह जाएगी:

  • आधार कार्ड: किसान की पहचान के सत्यापन के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज.
  • भूमि संबंधी दस्तावेज: खेत की वर्तमान बी-1 (B-I) खसरा नकल और पी-2 (P-II) खतौनी पर्चा.
  • बैंक खाता पासबुक: सब्सिडी की राशि सीधे खाते में भेजने के लिए बैंक का आईएफएससी (IFSC) कोड और खाता नंबर स्पष्ट होना चाहिए. (खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है).
  • सक्रिय मोबाइल नंबर: पंजीकरण और ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन के लिए चालू मोबाइल नंबर.
  • पासपोर्ट साइज फोटो: ऑनलाइन प्रोफाइल अपडेट करने के लिए.

‘एकीकृत किसान पोर्टल’ पर ऐसे करें ऑनलाइन पंजीकरण, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

सरकार ने आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है. किसान भाई खुद या अपने नजदीकी चॉइस सेंटर (CSC) में जाकर नीचे दिए गए चरणों के अनुसार पंजीकरण करा सकते हैं:

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक ‘एकीकृत किसान पोर्टल’ (Unified Farmer Portal) की मुख्य वेबसाइट पर विजिट करें.
  2. नया पंजीकरण चुनें: होमपेज पर दिए गए ‘कृषक पंजीकरण’ या ‘नया किसान पंजीयन खरीफ 2026’ के विकल्प पर क्लिक करें.
  3. विवरण दर्ज करें: इसके बाद खुले फॉर्म में किसान अपना नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और आधार संख्या सावधानीपूर्वक भरें.
  4. जमीन की जानकारी जोड़ें: अपनी कृषि भूमि का खसरा नंबर, रकबा (एकड़ में) और गांव का चयन कर सबमिट करें.
  5. दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए स्थान पर आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खसरे की स्कैन कॉपी अपलोड करें.
  6. ओटीपी वेरिफिकेशन: मोबाइल पर आए वन टाइम पासवर्ड (OTP) को दर्ज कर फॉर्म को फाइनल सबमिट करें और रसीद का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें.

डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टेक पंजीयन है अनिवार्य, पटवारी करेंगे भौतिक सत्यापन

पंजीकरण फॉर्म भरने के बाद योजना का लाभ पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ (Digital Crop Survey) है. इस नई व्यवस्था के तहत:

  • राजस्व विभाग और कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी (पटवारी और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी) आपके खेत का लाइव जीपीएस (GPS) लोकेशन के साथ भौतिक सत्यापन करेंगे.
  • इस सर्वे के दौरान आपके द्वारा पोर्टल पर दर्ज की गई वैकल्पिक फसल (जैसे- मक्का, रागी, कोदो-कुटकी, मूंगफली या कपास) की मौके पर फोटो खींची जाएगी और उसे ‘एग्रीस्टेक’ ऐप पर अपलोड किया जाएगा.
  • जब आपकी बोई गई फसल का डेटा और पोर्टल का आवेदन आपस में पूरी तरह मैच हो जाएगा, तभी आपकी फाइल को आगे बढ़ाया जाएगा. इस व्यवस्था से कागजी हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो जाती है.

कब और कैसे मिलेगी 15,000 रुपये की राशि? सीधे बैंक खाते में आएगी किस्त

एक बार जब आपका आवेदन और डिजिटल क्रॉप सर्वे का वेरिफिकेशन जिला कृषि कार्यालय द्वारा स्वीकृत कर दिया जाएगा, तो आपकी प्रोत्साहन राशि की फाइल अप्रूव हो जाएगी.

  • डीबीटी के जरिए भुगतान: सरकार योजना की कुल राशि (15,000 रुपये प्रति एकड़) को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे आपके पंजीकृत बैंक खाते में भेजेगी.
  • किस्तों में भुगतान: सरकार फसलों की कटाई और विपणन सीजन के समय इस राशि को एकमुश्त या किस्तों के रूप में सीधे किसानों को जारी करेगी, जिसकी सूचना आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) के जरिए दी जाएगी.

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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