
Mahatari Vandan Scheme: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पांचवें और अंतिम दिन सदन में भारी राजनीतिक घमासान देखने को मिला। प्रश्नकाल के दौरान सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम काटे जाने को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखे हमले किए। इसके बाद विपक्ष ने साय सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का विस्तृत आरोप पत्र सौंपते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिस पर सदन में तीखी बहस का सिलसिला शुरू हो गया।
महिलाओं के नाम कटने पर विधानसभा में तीखी नोकझोंक
प्रश्नकाल की शुरुआत होते ही कांग्रेस विधायकों ने महतारी वंदन योजना के लाभार्थियों की सूची में हुई कटौती का मामला उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अचानक 1.55 लाख महिलाओं के नाम इस योजना से बाहर कर दिए गए हैं, जिसके कारण लाभार्थियों की कुल संख्या 70.09 लाख से घटकर अब 68.54 लाख पर पहुंच गई है। कांग्रेस सदस्यों ने सरकार पर गरीब महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कटौती करने का सीधा आरोप लगाया, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
तकनीकी कारणों और मृत्यु के चलते सूची में हुआ बदलाव
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि किसी भी पात्र महिला का नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से नहीं हटाया गया है। मंत्री ने कहा कि लाभार्थियों की मृत्यु होने, बैंक खातों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा न होने, कुछ परिवारों के आयकरदाता की श्रेणी में आने और जांच के दौरान अपात्र पाए जाने के कारण ही नियमानुसार यह छंटनी की गई है। हालांकि, मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और विरोध स्वरूप बाहर चले गए।
राशन दुकानों में अतिरिक्त चावल की मांग और मसालों की बिक्री पर खाद्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश
इसी दौरान प्रश्नकाल में राशन वितरण प्रणाली की कमियों का मुद्दा भी गरमाया। कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंस ने अंत्योदय कार्डधारी परिवारों को राहत देने के लिए 7 किलो अतिरिक्त चावल देने की मांग उठाई। वहीं, भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने अपनी ही सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि राशन दुकानों में महिला स्व-सहायता समूहों पर दबाव बनाकर नियमों के खिलाफ मसाले बिकवाए जा रहे हैं। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि साक्ष्य और दस्तावेज मिलते ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने पेश किया अविश्वास प्रस्ताव
प्रश्नकाल समाप्त होने के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा। कांग्रेस ने इस प्रस्ताव के साथ 136 बिंदुओं की एक विस्तृत सूची सौंपी, जिसमें सरकार की विफलताओं का ब्यौरा दिया गया था। महंत ने अपने भाषण में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, पेसा (PESA) कानून के सही क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं, भारतमाला सड़क परियोजना और आबकारी विभाग में हो रही प्रशासनिक विसंगतियों को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे।

जंगलों की कटाई को बताया छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला
नेता प्रतिपक्ष ने उत्तरी छत्तीसगढ़ के पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील हसदेव अरण्य क्षेत्र का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के संरक्षण में जंगलों की अंधाधुंध कटाई और कोयला खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने जुलाई 2022 में विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस पुराने प्रस्ताव की याद दिलाई, जिसमें हसदेव के कोल ब्लॉकों को रद्द करने की मांग की गई थी। महंत ने कहा कि दूसरे राज्यों के बिजली संयंत्रों के लिए छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक फेफड़ों को नष्ट किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के दावों पर उठाए सवाल
भगवान राम का उल्लेख करते हुए चरणदास महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ को राम का ननिहाल मानकर उनके वनगमन मार्ग की बातें तो की जाती हैं, लेकिन उन्हीं वनों को उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वनों के इस विनाश के कारण राज्य में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि हसदेव अरण्य में मौजूद 170 से अधिक प्रकार की दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं और 15 साल के लिए आवंटित कोयला खदानों को महज 9 साल में ही खाली कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में 10वां अविश्वास प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ के संसदीय इतिहास पर नजर डालें तो राज्य के गठन के बाद से यह किसी सरकार के खिलाफ लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले अलग-अलग कार्यकाल में 9 बार अविश्वास प्रस्तावों पर लंबी चर्चाएं हो चुकी हैं, लेकिन संख्या बल के कारण कभी कोई सरकार नहीं गिरी। सबसे पहली विधानसभा में अजीत जोगी सरकार के खिलाफ दो बार, डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ पांच बार और पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ दो बार विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव ला चुका है।
विधानसभा में सीटों का गणित भाजपा के पक्ष में मजबूत, साय सरकार के पास है पूर्ण बहुमत
राजनीतिक दृष्टि से भले ही यह अविश्वास प्रस्ताव बेहद चर्चा में है, लेकिन विधायी गणित के मामले में वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार पूरी तरह सुरक्षित है। 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में सत्ताधारी दल भाजपा के पास 54 विधायकों का मजबूत बहुमत है। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं और 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। बहुमत का आंकड़ा सरकार के पक्ष में होने के कारण इस प्रस्ताव का परिणाम पहले से तय है, लेकिन इसके जरिए दोनों दल जनता के बीच अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।



