
छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 5वीं और 8वीं की परीक्षाओं को बोर्ड के तर्ज पर कराया जा रहा है, लेकिन कुरुद ब्लॉक में व्यवस्थाओं ने दम तोड़ दिया। मंगलवार को आलम यह रहा कि सुबह 9 बजे शुरू होने वाली 8वीं की अंग्रेजी परीक्षा सवा घंटे की देरी से 10.15 बजे शुरू हो सकी। मासूम बच्चे परीक्षा केंद्रों में बेंच पर बैठे इंतजार करते रहे और शिक्षा विभाग के अधिकारी पर्चे जुटाने के लिए भागदौड़ करते रहे। महीनों पहले तैयारी पूरी होने के दावों की हवा उस वक्त निकल गई जब परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र ही कम पड़ गए।
फोटोकॉपी के सहारे बोर्ड एग्जाम: सवा घंटे तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे मासूम
धमतरी जिले के कुरुद ब्लॉक में बोर्ड परीक्षा किसी मजाक से कम साबित नहीं हुई। सरस्वती शिशु मंदिर कुरुद और परखंदा जैसे केंद्रों में जब तय समय पर पेपर नहीं पहुंचा, तो अफरा-तफरी मच गई। जिन स्कूलों में 50 से अधिक छात्र थे, वहां प्रश्न पत्रों की संख्या काफी कम निकली। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई और बाहर से फोटोकॉपी कराकर बच्चों को प्रश्न पत्र बांटे गए। इस पूरी कवायद में बच्चों का कीमती समय बर्बाद हुआ और वे मानसिक तनाव में नजर आए।
बंडल में निकले अलग-अलग सेट: शिक्षकों के बीच बना रहा भारी असमंजस
परीक्षा केंद्रों में शिक्षकों की परेशानी तब बढ़ गई जब प्रश्न पत्रों के एक ही बंडल में अलग-अलग सेट मिक्स पाए गए। शिक्षक यह तय नहीं कर पा रहे थे कि कौन सा पर्चा छात्रों को बांटना है और कौन सा नहीं। इस तकनीकी खामी की वजह से परीक्षा प्रक्रिया और भी लंबी खिंच गई। मंदरौद और परखंदा के मिडिल स्कूलों में भी यही स्थिति रही, जहां समन्वय की कमी के कारण छात्रों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
पुरानी गलतियों से नहीं लिया सबक: उत्तर लिखने के लिए जगह तक नहीं
शिक्षक संघों ने विभाग की इस लचर व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है। संयुक्त शिक्षक संघ और समग्र शिक्षक फेडरेशन का कहना है कि 5वीं की परीक्षा में भी ऐसी ही कमियां दिखी थीं, लेकिन विभाग ने कोई सुधार नहीं किया। उत्तर पुस्तिकाओं में पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर के लिए जगह नहीं दी गई है और बच्चों को उत्तर लिखने के लिए भी पर्याप्त स्पेस नहीं मिल रहा है। शिक्षकों के अनुसार, परीक्षा के पैटर्न और प्रबंधन में भारी खामियां हैं जिससे गुणवत्ता की जगह केवल औपचारिकता पूरी हो रही है।
डीईओ का तर्क: फोटोकॉपी कराना लापरवाही नहीं, पहले से थे निर्देश
इस पूरे मामले पर धमतरी के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अभय कुमार जायसवाल का बचाव वाला रवैया सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्न पत्र कम पड़ने की स्थिति में फोटोकॉपी कराने के निर्देश पहले से दिए गए थे। उनका कहना है कि चूंकि प्रश्न पत्र गोपनीय सामग्री होती है, इसलिए इसे समय से पहले खोलकर नहीं देखा जा सकता। डीईओ ने इसे विभागीय लापरवाही मानने से इनकार कर दिया और कहा कि कठिन प्रश्नों के मामले में मूल्यांकन के समय सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा।
गुणवत्ता के दावों की खुली पोल: बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़
केंद्रीयकृत पैटर्न पर परीक्षा कराने का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना था, लेकिन कुरुद ब्लॉक की अव्यवस्था ने जमीनी हकीकत बयां कर दी है। ग्रामीण अंचल के केंद्रों में समन्वय की भारी कमी दिखी। जब विभाग समय पर प्रश्न पत्र तक नहीं पहुंचा पा रहा, तो बोर्ड पैटर्न की गंभीरता पर सवाल उठना लाजिमी है। अभिभावकों और शिक्षकों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाया जाए ताकि बच्चों को परेशानी न हो।



