
CG Patwari Strike Tehsildar Sangh Support: छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का गंभीर असर राज्य की पूरी प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था पर दिखने लगा है। पटवारियों की गैरमौजूदगी के कारण फसल गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम पूरी तरह से ठप पड़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए शासन ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को मैदान में उतरकर पीवी ऐप (PV App) के जरिए फसल सर्वेक्षण करने का जिम्मा सौंपा था। अब इस व्यवस्था के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी एवं तहसीलदार संघ भी उतर आया है।
तहसीलदार संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मैदानी सर्वे से मुक्त रखने की उठाई मांग
CG Digital Crop Survey Pending Data: शासन के आदेश के विरोध में तहसीलदार संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने अधिकारियों को अनिवार्य मैदानी फसल सर्वेक्षण के कार्य से मुक्त रखने की मांग की है। तहसीलदार संघ का कहना है कि पटवारियों के हड़ताल पर रहने के कारण मैदानी स्तर का काम वरिष्ठ अधिकारियों पर थोपना न्यायसंगत नहीं है और इससे विभागीय कामकाज में अव्यवस्था फैल रही है।
प्रदेश भर में 23 लाख से अधिक खसरों की डिजिटल प्रविष्टियां पड़ी हैं लंबित
PV App Technical Issues CG Revenue Department: तहसीलदार संघ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में डिजिटल क्रॉप सर्वे की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। छत्तीसगढ़ में कुल 32,15,837 खसरों में से अब तक केवल 8,48,504 खसरों का ही सर्वे पूरा हो सका है। इसके चलते 23,67,333 खसरों की प्रविष्टियां अभी भी लंबित पड़ी हैं। पटवारियों की अनुपस्थिति के कारण डिजिटल डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी तरह थम गई है।
धान की फसलों के 10 लाख से ज्यादा खसरों का सर्वे काम अटका
CG Revenue Services Affected 2026: खरीफ सीजन में धान की फसल का सटीक आंकड़ा जुटाना उपार्जन प्रक्रिया के लिए अनिवार्य माना जाता है। आंकड़ों के मुताबिक कुल 16,24,868 धान के खसरों में से अब तक मात्र 5,67,991 खसरों की ही एंट्री पोर्टल पर हो पाई है। इसके चलते 10,56,873 खसरे अब भी बाकी हैं। निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस विशाल लक्ष्य को हासिल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
मैदानी सर्वे में झोंकने से नामांतरण, बंटवारा और अदालती कार्य होंगे प्रभावित
CG Crop Survey Delay Impact: तहसीलदार संघ ने स्पष्ट किया है कि तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों पर पहले से ही नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और राजस्व अदालतों के सैकड़ों लंबित मामलों के निपटारे का भारी दबाव रहता है। यदि अधिकारियों को फील्ड सर्वे में लगा दिया जाएगा, तो दफ्तरों के नियमित और न्यायिक कार्य ठप हो जाएंगे। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा और लोगों को अपने छोटे-छोटे कागजी कामों के लिए भटकना पड़ेगा।
नेटवर्क और जीपीएस इनएक्यूरेसी के कारण पीवी ऐप बना अधिकारियों का सिरदर्द
पत्र में डिजिटल सर्वे के दौरान आ रही व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतों की विस्तृत जानकारी दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक ऐप में गैर-जियोरेफरेंस्ड खसरे और पॉलीगॉन ट्रेसिंग करने में काफी समस्याएं आ रही हैं। कमजोर इंटरनेट नेटवर्क और जीपीएस सिग्नल की अनिश्चितता के कारण पीवी ऐप ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अतिरिक्त सर्वर की धीमी गति और दुर्गम इलाकों में पहुंच की कमी के कारण सर्वे का काम प्रभावित हो रहा है।
तकनीकी समस्याओं का हल निकलने तक अतिरिक्त दबाव न बनाने की अपील
तहसीलदार संघ ने शासन से मांग की है कि जब तक पीवी ऐप की तकनीकी कमियों को दूर नहीं किया जाता, तब तक अधिकारियों पर मैदानी जांच का अतिरिक्त दबाव न डाला जाए। संघ का कहना है कि जब तक पटवारियों की मांगों का स्थायी समाधान निकालकर उन्हें काम पर वापस नहीं लाया जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर तहसीलदारों को फील्ड में भेजना अव्यवहारिक है।
हड़ताल और गतिरोध दूर न होने पर आम जनता की परेशानियां बढ़ने की आशंका
राजस्व विभाग में बने इस गतिरोध के कारण आम नागरिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर नक्शा-खसरा सुधार, जाति व निवास प्रमाण पत्र के लिए आवश्यक प्रतिवेदन और गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का काम रुक गया है। यदि शासन और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द वार्ता से हल नहीं निकलता, तो आने वाले दिनों में प्रशासनिक संकट और गहरा सकता है।



