
CG PDS Ration Shop Strike: छत्तीसगढ़ के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े राशन दुकान संचालकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रदेशभर के राशन दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नौ सूत्री मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वे आगामी 5 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. इस संभावित हड़ताल के कारण राज्य की करीब 13 हजार उचित मूल्य की दुकानों में ताले लटक सकते हैं जिससे सरकारी राशन पर निर्भर रहने वाले लगभग 70 लाख कार्डधारियों को जुलाई महीने का अनाज मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.
प्रति क्विंटल 150 रुपये मार्जिन मनी देने की उठी प्रमुख मांग
राशन दुकान संचालकों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में उन्हें बेहद कम कमीशन पर दुकानों का संचालन करना पड़ रहा है. वर्तमान व्यवस्था के तहत संचालकों को राज्य योजना (CGFS) में 30 रुपये और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 90 रुपये प्रति क्विंटल का मार्जिन मिलता है. दुकानदारों का कहना है कि दोनों ही योजनाओं में काम और जिम्मेदारी एक जैसी है, इसलिए इस विसंगति को दूर किया जाना चाहिए. संघ ने मांग की है कि सभी योजनाओं में न्यूनतम मार्जिन मनी को बढ़ाकर सीधे 150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए ताकि दुकान का किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का वेतन आसानी से निकाला जा सके.
नवंबर से अटका है कमीशन का पैसा, कर्ज के बोझ तले दबे दुकानदार
संचालकों का आरोप है कि उन्हें समय पर कमीशन और अन्य भत्तों का भुगतान नहीं मिल रहा है. पिछले साल नवंबर 2025 से लेकर अब तक सात महीनों की मार्जिन मनी का भुगतान विभागीय स्तर पर अटका हुआ है. इसके अलावा खाली बारदाने की राशि और आधार कार्ड लिंकिंग के काम का मेहनताना भी दुकानदारों को नहीं दिया गया है. समय पर पैसा न मिलने की वजह से कई ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदार कर्ज लेकर व्यवस्था चलाने को मजबूर हैं. अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित दुकानदारों ने सरकार से सभी विक्रेताओं के लिए एक अनिवार्य दुर्घटना बीमा योजना भी लागू करने की मांग की है.
तीन महीने का एकमुश्त राशन बांटने वाली नई व्यवस्था से बढ़ीं मुश्किलें
सरकार द्वारा लागू किए गए राशन आवंटन के नए एम-टू सिस्टम और तीन महीने का राशन एक साथ वितरित करने के फैसले पर भी संचालकों ने व्यावहारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था के कारण दुकानों में अचानक कार्डधारियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बनती है. इसके अलावा ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों के पास कच्चे मकान होते हैं जहां तीन महीने का अनाज एक साथ सुरक्षित रखना सीलन और चूहों की वजह से बेहद मुश्किल काम है. गोदाम से सीधे आने वाले माल में अक्सर तौल कम निकलती है, जिसे देखते हुए संचालकों ने एक प्रतिशत सूखत (क्षतिपूर्ति) देने की बात कही है.
शक्कर पर मिलने वाले चार पैसे के कमीशन को बेहद कम बताया
राशन दुकान संचालक संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना के मुताबिक शक्कर के वितरण पर मिलने वाला कमीशन इस समय महज 4 पैसे प्रति किलो है जो कि मजाक जैसा है. संघ ने मांग रखी है कि शक्कर का कमीशन बढ़ाकर 100 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने शक्कर का सरकारी बिक्री मूल्य 17 रुपये से बढ़ाकर सीधे 20 रुपये करने का सुझाव दिया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को बचे हुए 3 रुपये के खुले पैसे वापस लौटाने को लेकर होने वाले रोज-रोज के विवादों से पूरी तरह मुक्ति मिल सके.
पॉश मशीनों के सर्वर और झूठी एफआईआर के डर से सहमे संचालक
कमीशन के अलावा राशन दुकानदार तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों से भी जूझ रहे हैं. उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी है कि फिंगरप्रिंट लेने वाली पॉश मशीनों में आने वाली तकनीकी खराबियों और सर्वर डाउन होने की समस्या का स्थाई समाधान किया जाए. साथ ही स्टॉक की गिनती की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए. संघ के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार स्थानीय राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या प्रशासनिक दबाव के चलते दुकानदारों पर आनन-फानन में झूठी एफआईआर दर्ज करा दी जाती है, जिस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए.
यहाँ छत्तीसगढ़ के राशन दुकान संचालकों की वर्तमान स्थिति और उनकी प्रमुख मांगों का पूरा ब्यौरा दिया गया है:
| विषय | वर्तमान व्यवस्था | संचालकों की प्रमुख मांग |
| मार्जिन मनी (CGFS) | ₹30 प्रति क्विंटल | ₹150 प्रति क्विंटल (समान दर) |
| मार्जिन मनी (NFSA) | ₹90 प्रति क्विंटल | ₹150 प्रति क्विंटल (समान दर) |
| शक्कर कमीशन | 4 पैसे प्रति किलो | ₹100 प्रति क्विंटल |
| शक्कर का बिक्री मूल्य | ₹17 प्रति किलो | ₹20 प्रति किलो (खुले पैसे के विवाद के कारण) |
| लंबित भुगतान | नवंबर 2025 से बकाया | सात महीने के रुके हुए पैसे तुरंत जारी हों |
| स्टॉक में कमी | कोई भरपाई नहीं | 1% सूखत (क्षतिपूर्ति) की मंजूरी मिले |



