Nun Arrest Case Update: दो ननों की गिरफ्तारी केस में पलटा पूरा मामला: युवती ने किया बड़ा खुलासा, बोली- नन निर्दोष, मेरी मर्जी से जा रही थी आगरा

नारायणपुर। Nun Arrest Case Update: दुर्ग रेलवे स्टेशन पर केरल की दो कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी और धर्मांतरण के आरोपों के मामले में नया मोड़ आ गया है। जिस केस को लेकर छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक सियासत गरमाई हुई है, उसमें अब खुद एक आदिवासी युवती सामने आई है। युवती का दावा है कि पूरा मामला झूठा है और ननों को जबरन फंसाया गया है।

कमलेश्वरी प्रधान बोली- न कोई दबाव था, न लालच, खुद की मर्जी से जा रही थी

Conversion Controversy: नारायणपुर की रहने वाली कमलेश्वरी प्रधान, जो उन तीन आदिवासी युवतियों में से एक है, ने मीडिया के सामने आकर बताया कि वह आगरा ननों के साथ अपनी मर्जी से जा रही थी। उसके माता-पिता भी इस फैसले से सहमत थे। कमलेश्वरी ने कहा कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर कुछ लोगों ने उनके साथ जबरदस्ती की, धमकाया और ननों के खिलाफ बयान दिलवाया। उसने बताया कि, “हम पर किसी भी तरह का दबाव नहीं था। हम काम के लिए जा रहे थे। पहले आगरा और फिर भोपाल। वहां एक ईसाई अस्पताल में हमें 10 हजार रुपए महीना वेतन के साथ खाना, कपड़े और रहने की सुविधा मिलने वाली थी।”

दुर्ग स्टेशन पर बदसलूकी का आरोप, धर्मांतरण की कहानी को बताया मनगढ़ंत

Durg Station Case: कमलेश्वरी ने आगे कहा कि स्टेशन पर उनसे और बाकी लड़कियों से जबरन बयान दिलवाए गए। उसने खुद को बीते 10 सालों से ईसाई धर्म मानने वाली बताया और कहा कि धर्मांतरण का सवाल ही नहीं उठता। युवक सुखमन मंडावी को लेकर भी उसने कहा कि वह भी बेवजह फंसाया गया है। उसके खिलाफ भी आरोप झूठे हैं।

क्या है पूरा मामला?

25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल की अगुवाई में केरल की दो ननों – सिस्टर प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, एक युवक सुखमन मंडावी और तीन आदिवासी युवतियों को रोका गया। आरोप लगाया गया कि ये लोग धर्मांतरण के लिए लड़कियों को आगरा ले जा रहे हैं।बजरंग दल की जिला संयोजिका ज्योति शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया और फिर सभी को जीआरपी के हवाले कर दिया गया। बाद में दुर्ग जीआरपी चौकी में केस दर्ज हुआ और ननों सहित युवक को जेल भेज दिया गया।

सियासत भी हुई तेज, कांग्रेस ने बताया “धार्मिक आज़ादी पर हमला”

Religious Freedom: मामले ने तूल पकड़ा तो कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को चिट्ठी लिखी। राहुल गांधी ने इसे भाजपा-आरएसएस का “गुंडा राज” कहा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर विरोध जताया और ननों को निर्दोष बताया। सीपीआई (एम) की बृंदा करात समेत अन्य नेता रायपुर जेल में ननों से मिलने पहुंचे और इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया। कांग्रेस के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर दोहरी राजनीति का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई, अब NIA कोर्ट में होगी सुनवाई

NIA Investigation: इस मामले में 30 जुलाई को एक बड़ा अपडेट तब आया जब जिला अदालत ने ननों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि इस केस में मानव तस्करी की धाराएं शामिल हैं, इसलिए मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अब यह केस एनआईए कोर्ट, बिलासपुर में सुना जाएगा। तब तक दोनों नन जेल में ही रहेंगी।

देखिये पीड़ित कमलेश्वरी प्रधान ने क्या कहा-

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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